हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में मई की शुरुआत की अमेरिका–ईरान झड़प इसलिए अहम थी क्योंकि 8 अप्रैल का युद्धविराम लड़ाई को रोकने की कोशिश तो था, लेकिन इस बुनियादी सवाल का जवाब नहीं देता था: इस अहम समुद्री रास्ते से कारोबारी जहाज़ कैसे गुजरेंगे, और उनकी सुरक्षा किसके हाथ में होगी।
वॉशिंगटन ने इसे नागरिक और वाणिज्यिक जहाज़ों की सुरक्षा के लिए की गई सीमित रक्षात्मक कार्रवाई बताया। तेहरान ने कहा कि उसने उन अमेरिकी युद्धपोतों को चेतावनी दी जो उसके मुताबिक हॉर्मुज़ पर ईरान के नियंत्रण को चुनौती दे रहे थे .
8 अप्रैल की व्यवस्था को अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के अस्थायी युद्धविराम के रूप में रिपोर्ट किया गया था, जिसे हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को फिर खोलने से जोड़ा गया था . उसी समय समुद्री क्षेत्र की रिपोर्टिंग ने इसे अस्थायी और आंशिक पुन: खोलना बताया, न कि ऐसे व्यापक समझौते के रूप में जिसमें जलमार्ग के नियम, सुरक्षा व्यवस्था या राजनीतिक नियंत्रण तय हो गया हो
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यही फर्क आगे की पूरी कहानी समझाता है। युद्धविराम ने सीधी सैन्य बढ़त को कुछ देर रोका, लेकिन जमीन—या कहें समुद्र—पर सवाल वहीं रहा: क्या व्यापारी जहाज़ सुरक्षित गुजर पाएंगे? और यदि हां, तो क्या यह रास्ता ईरानी नियंत्रण में खुलेगा, अमेरिकी सुरक्षा घेरे में, या किसी अस्थिर बीच के रास्ते से?
मई की शुरुआत में अमेरिकी बलों ने हॉर्मुज़ से वाणिज्यिक आवाजाही बहाल कराने की निगरानी वाली कोशिश आगे बढ़ाई। AP से जुड़ी रिपोर्टिंग के अनुसार, नए अमेरिकी सुरक्षा-युक्त मार्ग से सिर्फ दो व्यापारी जहाज़ों के गुजरने की जानकारी थी, जबकि सैकड़ों जहाज़ अभी भी रुके हुए थे .
इसी अभियान के दौरान अमेरिकी सेना ने कहा कि उसने ईरानी बलों पर गोलीबारी की और छह छोटी ईरानी नौकाओं को डुबो दिया, जिनके बारे में उसका दावा था कि वे नागरिक या वाणिज्यिक जहाज़ों को धमका रही थीं या निशाना बना रही थीं . Reuters ने भी रिपोर्ट किया कि अमेरिकी सेना ने छह ईरानी छोटी नौकाएं, क्रूज़ मिसाइलें और ड्रोन नष्ट करने की बात कही; यह तब हुआ जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फंसे टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए नौसेना भेजी थी, जिसे “प्रोजेक्ट फ्रीडम” कहा गया
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यह घटना अकेली नहीं थी। अमेरिका के प्रमुख सहयोगी संयुक्त अरब अमीरात यानी यूएई ने कहा कि युद्धविराम लागू होने के बाद वह ईरानी हमले की चपेट में आया, जिससे यह धारणा और मजबूत हुई कि दबाव सिर्फ हॉर्मुज़ तक सीमित नहीं था .
अमेरिका ने इस झड़प को जलमार्ग खोलने से जुड़ी सीमित और रक्षात्मक कार्रवाई के तौर पर पेश किया। उसके मुताबिक ईरानी छोटी नौकाएं नागरिक या वाणिज्यिक जहाज़ों के लिए खतरा बन रही थीं, और अमेरिकी बलों ने उस मार्ग पर आवाजाही सुरक्षित करने के लिए कार्रवाई की जिसका मकसद शिपिंग पहुंच बहाल करना था .
वॉशिंगटन ने यह भी संकेत दिया कि इस गोलीबारी को युद्धविराम के औपचारिक टूटने के बराबर नहीं माना जा रहा। AP से जुड़ी रिपोर्टिंग के अनुसार, अमेरिकी सैन्य नेताओं ने हॉर्मुज़ और यूएई के खिलाफ हमलों के बावजूद कहा कि युद्धविराम अब भी प्रभावी है . Institute for the Study of War और Critical Threats Project ने बताया कि ट्रंप ने कहा था कि हालिया ईरानी हमले युद्धविराम उल्लंघन नहीं हैं, क्योंकि कोई “heavy firing” नहीं हुई थी
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ईरान की कहानी लगभग उल्टी थी। ईरानी राज्य-संबद्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, ईरानी नौसेना ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की ओर बढ़ रहे अमेरिकी युद्धपोतों के पास मिसाइलें, ड्रोन और रॉकेट दागे, और इसे चेतावनी फायर बताया क्योंकि कथित तौर पर उन जहाज़ों ने ईरानी चेतावनियों को नजरअंदाज किया था .
इस बयानबाजी में ईरान ने अपनी कार्रवाई को नागरिक जहाज़ों पर आक्रामकता के बजाय रोकथाम और चेतावनी के रूप में पेश किया। Institute for the Study of War और Critical Threats Project के आकलन के अनुसार, ईरान अमेरिका की वाणिज्यिक नौवहन स्वतंत्रता सुरक्षित कराने की कोशिशों के जवाब में जलडमरूमध्य पर अपना “control” दिखाना चाहता था . ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर क़ालीबाफ़ ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर युद्धविराम तोड़ने के आरोप लगाए, जिनसे उनके मुताबिक इस जलमार्ग से शिपिंग और ऊर्जा आवाजाही खतरे में पड़ी
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उपलब्ध रिपोर्टिंग के आधार पर सबसे सावधान जवाब यही है: युद्धविराम का औपचारिक और साफ-साफ घोषित अंत नहीं दिखा। अमेरिकी सैन्य नेताओं ने कहा कि यह अब भी प्रभावी है . AP ने लिखा कि युद्ध फिर भड़कने का जोखिम था, लेकिन युद्धविराम टिकता दिखाई दे रहा था; वहीं Reuters ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच गोलीबारी के बाद नाजुक युद्धविराम दबाव में था या खतरे में पड़ गया था
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इसलिए हॉर्मुज़ की यह घटना युद्धविराम का साफ अंत कम और उसकी कड़ी परीक्षा ज्यादा थी। इसने दो असंगत दावों को सामने ला दिया: अमेरिका कह रहा था कि वह नागरिक और वाणिज्यिक जहाज़ों को सुरक्षित रास्ता दे रहा है, जबकि ईरान कह रहा था कि वह अमेरिकी युद्धपोतों को चेतावनी देकर जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण जता रहा है . उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टिंग यह तय नहीं करती कि टकराव शुरू किसने किया; वह इतना जरूर दिखाती है कि एक ही घटना को दोनों पक्षों ने इस सवाल पर अपनी-अपनी दावेदारी साबित करने के लिए इस्तेमाल किया कि हॉर्मुज़ की निगरानी और सुरक्षा किसके हाथ में होनी चाहिए।
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मई की शुरुआत में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की झड़प ने 8 अप्रैल के अमेरिका–ईरान युद्धविराम पर दबाव बढ़ाया, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग में उसका औपचारिक अंत साफ नहीं दिखता [35][37].
मई की शुरुआत में हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की झड़प ने 8 अप्रैल के अमेरिका–ईरान युद्धविराम पर दबाव बढ़ाया, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग में उसका औपचारिक अंत साफ नहीं दिखता [35][37]. 8 अप्रैल की व्यवस्था को हॉर्मुज़ को फिर खोलने से जुड़ा दो सप्ताह का अस्थायी युद्धविराम बताया गया था; समुद्री रिपोर्टिंग ने इसे आंशिक और अस्थायी पुन: खोलना माना, अंतिम समझौता नहीं [23][25].
अमेरिका ने कहा कि उसने वाणिज्यिक जहाज़ों की रक्षा में ईरानी छोटी नौकाओं को निशाना बनाया, जबकि ईरान ने अपने हमले को अमेरिकी युद्धपोतों के लिए चेतावनी बताया [20][28][41].
| क्या युद्धविराम खत्म हो गया? | अमेरिकी अधिकारियों ने कहा कि युद्धविराम अभी प्रभावी है | ईरानी अधिकारियों ने अमेरिका और उसके सहयोगियों पर ऐसे उल्लंघनों का आरोप लगाया जिनसे शिपिंग खतरे में पड़ी |