2025 की दूसरी छमाही में वैश्विक जनरेटिव AI अपनाने की दर करीब 16.3% रही, यानी दुनिया में लगभग हर छह में से एक व्यक्ति इन टूल्स का इस्तेमाल कर रहा था [3][11]। ग्लोबल नॉर्थ में कामकाजी उम्र की आबादी के बीच अपनाने की दर 24.7% रही, जबकि ग्लोबल साउथ में यह 14.1% थी; यह अंतर 10.6 प्रतिशत अंक तक पहुंच गया [1][3][4]। मुख्य अ...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Microsoft AI Diffusion Report: Generative AI Is Spreading, but the Global Gap Is Growing. Article summary: Microsoft’s report finds global generative AI adoption reached about 16.3% in the second half of 2025, but the Global North was at 24.7% versus 14.1% in the Global South, widening the gap to 10.6 percentage points [1].... Topic tags: ai, generative ai, microsoft, digital divide, global south. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "# UAE leads with 64% AI adoption rate, leaving the US and Europe far behind, Microsoft says. **Global use of generative AI continues to rise, but the gap between developed and deve" source context "UAE leads with 64% AI adoption rate, leaving the US and Europe far behind, Microsoft says" Reference image 2: visual subject "# UAE leads with 64%
Microsoft की नई AI Diffusion रिपोर्ट एक साथ दो तस्वीरें दिखाती है। पहली तस्वीर उत्साहजनक है: जनरेटिव AI अब टेक दुनिया की छोटी-सी चर्चा नहीं रहा, बल्कि आम इस्तेमाल की चीज बनता जा रहा है। दूसरी तस्वीर ज्यादा गंभीर है: इसका फायदा हर जगह बराबर रफ्तार से नहीं पहुंच रहा।
2025 की दूसरी छमाही में दुनिया भर में जनरेटिव AI अपनाने की दर 1.2 प्रतिशत अंक बढ़ी और Microsoft के अनुसार करीब हर छह में से एक व्यक्ति इन टूल्स का इस्तेमाल कर रहा था । रिपोर्ट के कई सारांशों में वैश्विक अपनाने की दर 16.3% बताई गई है, जो 2025 की पहली छमाही में 15.1% थी
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लेकिन असली खबर सिर्फ बढ़ोतरी नहीं है। असली चिंता यह है कि बढ़त असमान है। Microsoft के मुताबिक, ग्लोबल नॉर्थ में अपनाने की रफ्तार ग्लोबल साउथ के मुकाबले लगभग दोगुनी रही, जिससे पहले से बेहतर कनेक्टेड और संपन्न क्षेत्रों की बढ़त और मजबूत हो गई ।
रिपोर्ट इस अंतर को “ग्लोबल नॉर्थ” और “ग्लोबल साउथ” के फ्रेम में देखती है। आसान शब्दों में, ग्लोबल नॉर्थ आम तौर पर उन देशों और क्षेत्रों के लिए इस्तेमाल होता है जहां आय, डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर और संस्थागत क्षमता अपेक्षाकृत मजबूत है; ग्लोबल साउथ में कई उभरती और विकासशील अर्थव्यवस्थाएं आती हैं। यह बंटवारा हर देश की वास्तविकता को पूरी तरह नहीं समझाता, लेकिन वैश्विक पैटर्न देखने में मदद करता है।
2025 की दूसरी छमाही में ग्लोबल नॉर्थ की कामकाजी उम्र की आबादी में 24.7% लोग जनरेटिव AI टूल इस्तेमाल कर रहे थे, जबकि ग्लोबल साउथ में यह आंकड़ा 14.1% था । एक रिपोर्ट सारांश के अनुसार, दोनों के बीच अंतर 2025 की पहली छमाही में 9.8 प्रतिशत अंक था, जो दूसरी छमाही में बढ़कर 10.6 प्रतिशत अंक हो गया
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यानी यह रिपोर्ट सिर्फ AI के लोकप्रिय होने की कहानी नहीं है। यह चेतावनी भी है कि नई तकनीकें अक्सर वहीं पहले और तेजी से असर दिखाती हैं, जहां इंटरनेट, डिवाइस, बिजली, कौशल और संस्थागत तैयारी पहले से मौजूद हों।
ग्लोबल नॉर्थ और ग्लोबल साउथ को सीधे-सीधे “विकसित” और “विकासशील” देशों के बराबर नहीं माना जा सकता, लेकिन उपलब्ध आंकड़ों में पैटर्न मिलता-जुलता दिखता है। Microsoft रिपोर्ट की कवरेज में उद्धृत एक कामकाजी उम्र की तुलना के अनुसार, विकसित देशों में 15–64 वर्ष आयु वर्ग के 27.5% लोग जनरेटिव AI इस्तेमाल कर रहे थे, जबकि विकासशील क्षेत्रों में यह दर 15.4% थी ।
इसका सीधा अर्थ है: जिन देशों के पास बेहतर डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, ज्यादा कनेक्टिविटी और AI अपनाने के लिए तैयार संस्थान हैं, वे सिर्फ शुरुआत में आगे नहीं थे; वे आगे बढ़ने में भी तेज हैं । अगर यही रुझान जारी रहा, तो AI शिक्षा, उत्पादकता और डिजिटल सेवाओं तक पहुंच में पुरानी असमानताओं को कम करने के बजाय उन्हें और मजबूत कर सकता है।
रिपोर्ट और उससे जुड़ी कवरेज बार-बार कुछ बुनियादी वजहों की ओर इशारा करती हैं। इन्फ्रास्ट्रक्चर और भाषा सबसे बड़े विभाजक बनकर सामने आते हैं, और AI के लाभ अपेक्षाकृत छोटे समूह के देशों में ज्यादा केंद्रित दिखते हैं । रिपोर्ट की कवरेज में सीमित इंटरनेट पहुंच और अंग्रेजी-केंद्रित AI मॉडल को गरीब और गैर-अंग्रेजी भाषी क्षेत्रों के लिए बड़ी बाधा बताया गया है
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जनरेटिव AI टूल तभी सचमुच उपयोगी बनते हैं जब इंटरनेट भरोसेमंद और सस्ता हो, बिजली नियमित हो और लोगों के पास उपयुक्त डिवाइस हों। Microsoft-केंद्रित एक रिपोर्ट सारांश के अनुसार, तेज इंटरनेट, भरोसेमंद बिजली और डिवाइस तक पहुंच AI अर्थव्यवस्था में भागीदारी की बुनियादी शर्तें हैं ।
कई प्रमुख AI टूल अंग्रेजी में या उन भाषाओं में बेहतर काम करते हैं जिनमें प्रशिक्षण डेटा और प्रोडक्ट सपोर्ट ज्यादा है। इससे उन उपयोगकर्ताओं के लिए रुकावट पैदा होती है जिनकी स्थानीय भाषा, सांस्कृतिक संदर्भ या रोजमर्रा की जरूरतें इन टूल्स में पर्याप्त रूप से शामिल नहीं हैं ।
AI अपनाना सिर्फ किसी व्यक्ति के ऐप डाउनलोड करने का मामला नहीं है। स्कूलों, कारोबारों, सरकारी एजेंसियों और स्थानीय डेवलपर समुदायों को भी यह समझना होता है कि इन टूल्स को पढ़ाई, सेवा, कामकाज और स्थानीय समस्याओं के समाधान में कैसे बदला जाए। Microsoft का यह निष्कर्ष कि ग्लोबल नॉर्थ में अपनाने की रफ्तार ग्लोबल साउथ से लगभग दोगुनी रही, संकेत देता है कि मजबूत डिजिटल बुनियाद नई तकनीक को तेजी से अपनाने में मदद करती है ।
यह रिपोर्ट मुख्य रूप से “diffusion” यानी तकनीक के फैलाव पर केंद्रित है: जनरेटिव AI टूल कहां और कितने इस्तेमाल हो रहे हैं। एक सारांश के अनुसार, अध्ययन में अपनाने की दर को उन उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी के रूप में मापा गया जिन्होंने रिपोर्टेड अवधि में किसी जनरेटिव AI उत्पाद का इस्तेमाल किया। यह माप aggregated और anonymized Microsoft telemetry डेटा पर आधारित था, जिसे device-market share, internet penetration और देश की आबादी जैसे कारकों के हिसाब से समायोजित किया गया ।
इसलिए इन आंकड़ों को सीधे उत्पादकता लाभ, आर्थिक मूल्य या AI क्षमता का पैमाना नहीं मानना चाहिए। वे यह दिखाते हैं कि इस्तेमाल कहां फैल रहा है। वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि लोग, स्कूल, कंपनियां और सरकारें उस इस्तेमाल को सीखने, सेवाओं, उत्पादकता और स्थानीय रूप से उपयोगी टूल्स में कितना बदल पाती हैं।
Microsoft की रिपोर्ट डिजिटल डिवाइड के एक नए चरण की ओर इशारा करती है: AI टूल उपलब्ध तो ज्यादा हो रहे हैं, लेकिन उनके लाभ बराबर नहीं बंट रहे । सिर्फ AI प्रोडक्ट को दुनिया भर में लॉन्च कर देना इस अंतर को पाटने के लिए काफी नहीं होगा।
सबूत बताते हैं कि भरोसेमंद कनेक्टिविटी, किफायती डिवाइस, बिजली तक पहुंच, स्थानीय भाषाओं में AI सपोर्ट और ऐसी नीतियों में निवेश की जरूरत है जो संस्थानों को इन टूल्स का प्रभावी इस्तेमाल करने में मदद करें ।
निचोड़ साफ है: जनरेटिव AI का वैश्विक इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन उसके साथ वैश्विक खाई भी बढ़ रही है। अगली बड़ी चुनौती यह नहीं कि AI फैलेगा या नहीं — वह फैल चुका है। चुनौती यह है कि क्या विकासशील क्षेत्र उस बुनियादी ढांचे और स्थानीय सपोर्ट तक पहुंच पाएंगे, जो उन्हें इस तकनीक का बराबरी से फायदा उठाने दे।
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2025 की दूसरी छमाही में वैश्विक जनरेटिव AI अपनाने की दर करीब 16.3% रही, यानी दुनिया में लगभग हर छह में से एक व्यक्ति इन टूल्स का इस्तेमाल कर रहा था [3][11]।
2025 की दूसरी छमाही में वैश्विक जनरेटिव AI अपनाने की दर करीब 16.3% रही, यानी दुनिया में लगभग हर छह में से एक व्यक्ति इन टूल्स का इस्तेमाल कर रहा था [3][11]। ग्लोबल नॉर्थ में कामकाजी उम्र की आबादी के बीच अपनाने की दर 24.7% रही, जबकि ग्लोबल साउथ में यह 14.1% थी; यह अंतर 10.6 प्रतिशत अंक तक पहुंच गया [1][3][4]।
मुख्य अड़चनें अब भी बुनियादी हैं: भरोसेमंद इंटरनेट, डिवाइस, बिजली और स्थानीय भाषाओं में उपयोगी AI सपोर्ट की कमी [2][6][14]।
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