उपलब्ध सूचनाओं के आधार पर—नहीं। ताज़ा रिपोर्टें अभी भी इसे ऐसा नाज़ुक समझौता बताती हैं जिसे मध्यस्थ फिर से संभालने की कोशिश कर रहे हैं, न कि ऐसा समझौता जिसे औपचारिक रूप से रद्द कर दिया गया हो । इस्राइली सेना यानी IDF के अनुसार, इस्राइल-हमास युद्धविराम 10 अक्टूबर 2025 को दोपहर 12 बजे लागू हुआ था
।
यह फर्क अहम है। युद्धविराम तकनीकी रूप से लागू रह सकता है, जबकि व्यवहार में उसका असर धीरे-धीरे कम होता जाए। मार्च 2026 की एक रिपोर्ट में गाजा युद्धविराम को मोटे तौर पर कायम बताया गया था, लेकिन साथ ही कम-स्तर की झड़पों, कथित उल्लंघनों और हमास के खिलाफ इस्राइली कार्रवाइयों के जारी रहने का उल्लेख भी किया गया था । इससे पहले, अक्टूबर 2025 में 1News ने बताया था कि अमेरिका-प्रस्तावित युद्धविराम एक बड़े परीक्षण से गुजरा, जब इस्राइल ने हमास पर उल्लंघन का आरोप लगाया, इस्राइली बलों ने हमले किए और एक इस्राइली सुरक्षा अधिकारी ने कहा कि सहायता भेजना अगली सूचना तक रोका जाएगा
।
यानी ताज़ा हमले अचानक औपचारिक टूटन का प्रमाण नहीं देते। वे उस पैटर्न में फिट बैठते हैं जिसमें समझौता घोषित रूप से चलता रहता है, लेकिन घटनाएं उसे भीतर से खोखला करती जाती हैं।
हमलों का समय इसलिए ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि वे मध्यस्थता के दौरान हुए। हमास नेता काहिरा में युद्धविराम को फिर सक्रिय करने की कोशिशों पर बातचीत कर रहे थे । ऐसी स्थिति में वार्ता का एजेंडा बदल जाता है: लागू करने की प्रक्रिया और अगले चरण की बातचीत से ध्यान हटकर नई मौतों, आरोपों और भरोसे की कमी पर आ जाता है।
पहले से ही कई मुश्किल मुद्दे लंबित हैं। IDF का कहना है कि यह युद्धविराम 20-सूत्रीय योजना का हिस्सा है, जिसके पहले चरण में हमास से गाजा में बचे 48 बंधकों को लौटाने और पूरी तरह निशस्त्र होने की मांग थी । गाजा शांति योजना के उपलब्ध सार्वजनिक विवरण में कहा गया है कि बाद की बातचीत इस्राइली हमलों के दोहराव और हमास के निशस्त्रीकरण पर असहमति के कारण अटकी रही; इस्राइल निशस्त्रीकरण पर प्रगति चाहता है, जबकि हमास का कहना है कि दूसरे चरण पर बातचीत तब हो जब इस्राइल पहले चरण को पूरी तरह लागू करे
।
यही क्रम-विवाद हर नए हमले को और विस्फोटक बना देता है। इस्राइल सैन्य कार्रवाई को हमास की गतिविधियों या उल्लंघनों के जवाब के रूप में पेश कर सकता है। दूसरी ओर, हमास और फलस्तीनी/क्षेत्रीय रिपोर्टिंग इसे इस बात का सबूत बता सकती है कि इस्राइल युद्धविराम का पालन नहीं कर रहा। नतीजा: बातचीत धीमी, अधिक रक्षात्मक और कम भरोसेमंद हो जाती है।
इस्राइल पहले से सार्वजनिक रूप से यह तर्क देता रहा है कि हमास ने युद्धविराम का बार-बार उल्लंघन किया है। IDF के एक पेज में युद्धविराम शुरू होने के बाद हमास द्वारा कथित उल्लंघनों पर इस्राइली बयानों की सूची दी गई है । फरवरी 2026 के एक मामले में टाइम्स ऑफ इस्राइल ने रिपोर्ट किया कि IDF ने कहा था कि रफाह में एक सुरंग से फलस्तीनी बंदूकधारियों के निकलने के बाद उसने हमास operatives पर हमला किया
।
दूसरी तरफ, फलस्तीनी और क्षेत्रीय रिपोर्टिंग उलटी तस्वीर पेश करती है। द न्यू अरब ने लिखा कि अक्टूबर के युद्धविराम के बावजूद इस्राइल गाजा में फलस्तीनियों को मारना जारी रखे हुए है और उसने हत्याओं व ध्वस्तीकरण को समझौते का उल्लंघन बताया ।
ये सिर्फ बयानबाज़ी नहीं है। ऐसी प्रतिस्पर्धी कथाएं वार्ता की दिशा तय करती हैं। अगर हर नई घटना को दोनों पक्ष अपने-अपने आरोपों की पुष्टि के रूप में इस्तेमाल करते हैं, तो मध्यस्थों के लिए बंधकों, निशस्त्रीकरण और मानवीय सहायता जैसे कठिन मुद्दों पर सहमति बनवाना और मुश्किल हो जाता है।
गाजा में इस्राइल के ताज़ा रिपोर्टेड हमले अक्टूबर 2025 के युद्धविराम को खत्म करते नहीं दिखते, लेकिन उसे और कमजोर जरूर करते हैं। अभी इसे ऐसा समझौता बताया जा रहा है जिसे मध्यस्थ बचाने या फिर सक्रिय करने की कोशिश कर रहे हैं । समस्या यह है कि हर नया हमला बातचीत की राजनीतिक जगह को छोटा करता है—और जोखिम बढ़ाता है कि युद्धविराम कागज़ पर जिंदा रहे, पर जमीन पर उसका अर्थ लगातार घटता जाए।