उन्नत एआई ने वित्तीय साइबर जोखिम को किसी बिल्कुल नई समस्या में नहीं बदला है; उसने एक पुराने खतरे को तेज, बड़े पैमाने वाला और ज्यादा दबाव पैदा करने वाला बना दिया है। IMF यह नहीं कह रहा कि एआई से जुड़ा हर हमला बैंकिंग संकट बन जाएगा। चेतावनी यह है कि जब एआई-तेज हमले बैंकों, क्लाउड सेवाओं, सॉफ्टवेयर, भुगतान नेटवर्क और डेटा ढांचे की आपस में जुड़ी दुनिया से टकराते हैं, तो कम संभावना वाला लेकिन भारी असर वाला जोखिम पूरे वित्तीय सिस्टम में फैल सकता है [1][
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एआई से हमलावरों को क्या बढ़त मिलती है
एआई वित्तीय कंपनियों की मदद भी कर सकता है—कमजोरियां पहचानने, निगरानी करने और घटनाओं पर जल्दी प्रतिक्रिया देने में। लेकिन IMF की चिंता इसका दूसरा पहलू है: अगर हमलावरों की क्षमता बैंकों की सुरक्षा व्यवस्था से तेज चलने लगे, तो वही तकनीक साइबर खतरों को बढ़ा सकती है [1]।
ASIC की चेतावनी भी इसी व्यावहारिक जोखिम पर है। साइबर जोखिम नया नहीं है, लेकिन फ्रंटियर एआई यानी सबसे उन्नत नई पीढ़ी के मॉडल, अगर गलत हाथों में इस्तेमाल हों, तो साइबर सुरक्षा कमजोरियों को अभूतपूर्व गति, पैमाने और जटिलता से सामने ला सकते हैं [20]। IMF विश्लेषण पर आई रिपोर्टों ने भी बताया कि एआई हमलावरों के लिए कमजोरियां खोजने और उनका फायदा उठाने में लगने वाला समय और लागत घटा सकता है ।






