संक्षिप्त जवाब: अगर पीले निशान वाला 1D सचमुच एंडोमेट्रियम यानी गर्भाशय की अंदरूनी परत की मोटाई है, तो 6 मई 2026 वाली दूसरी स्क्रीनशॉट में माप करीब 1.21 cm, यानी 12.1 mm है। यह 6 नवंबर 2025 वाली पहली स्क्रीनशॉट के करीब 1.06 cm, यानी 10.6 mm से थोड़ा अधिक है। सिर्फ मोटाई के आधार पर देखें तो दूसरी तस्वीर थोड़ी बेहतर लगती है।
लेकिन इसे “यही पक्का अधिक आसानी से इम्प्लांट होगा” कहना सही नहीं होगा। दोनों माप पतले एंडोमेट्रियम की उस सीमा में नहीं दिखते, जिसे शोध में अधिक चिंता से जोड़ा गया है; खासकर <6 mm पर गर्भधारण की संभावना कम हो सकती है [2]। वहीं, एक क्रोमोसोमली सामान्य भ्रूण के medicated frozen embryo transfer यानी FET अध्ययन में ≥8 mm के बाद मोटाई और बढ़ने से परिणामों में जरूरी नहीं कि बड़ा फर्क पड़े [
4]।
तस्वीरों से क्या समझ आता है
- पहली तस्वीर: लगभग 1.06 cm यानी 10.6 mm।
- दूसरी तस्वीर: लगभग 1.21 cm यानी 12.1 mm।
- अगर ये दोनों माप एंडोमेट्रियम के हैं, तो दूसरी तस्वीर थोड़ी मोटी परत दिखाती है।
- फिर भी 10.6 mm भी आमतौर पर “बहुत पतली” श्रेणी जैसा नहीं दिखता, क्योंकि साहित्य में खास चिंता अक्सर काफी कम मोटाई, विशेषकर <6 mm, को लेकर बताई गई है [
2]।
क्या 12.1 mm हमेशा 10.6 mm से बेहतर है?
जरूरी नहीं। IVF या FET में एंडोमेट्रियम की मोटाई महत्वपूर्ण है, लेकिन यह अकेली निर्णायक चीज नहीं है। कुछ शोधों में पतले एंडोमेट्रियम और कम pregnancy/live birth rates के बीच संबंध बताया गया है [1]। लेकिन जब परत एक व्यावहारिक सीमा तक पहुंच जाती है, तो सिर्फ और मोटी परत होने से परिणाम हमेशा बेहतर होंगे, यह साबित नहीं है।




