1 अप्रैल 1867 को सिंगापुर, पेनांग और मलक्का वाले स्ट्रेट्स सेटलमेंट्स सीधे ब्रिटिश ताज के प्रशासन में आए।
जैक्सन प्लान, जिसे रैफल्स टाउन प्लान भी कहा जाता है, 1820 के दशक में तेजी से बढ़ते सिंगापुर शहर को व्यवस्थित करने की योजना थी।
चीन, भारत, मलक्का और आसपास के द्वीपों से आए प्रवासियों ने सिंगापुर को तेजी से बढ़ते बहुजातीय बंदरगाह समुदाय में बदलने में मदद की।
1765 की इलाहाबाद संधि के तहत शाह आलम द्वितीय ने ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल, बिहार और उड़ीसा में राजस्व वसूली का अधिकार दिया।
मलय प्रायद्वीप के दक्षिणी सिरे पर स्थित सिंगापुर, हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर के बीच समुद्री आवाजाही के लिए अहम जगह पर था। [10]
14वीं सदी तक टेमासेक—आज का सिंगापुर—हिंद महासागर और दक्षिण चीन सागर के बीच के समुद्री रास्तों से जुड़ा एक व्यस्त बंदरगाह था।
मलय इतिहास ग्रंथ सेजाराह मेलायु के अनुसार, पालेमबांग के राजकुमार सांग नीला उत्तमा ने लगभग 1299 में सिंगापुरा बसाया।
‘सिंगापुरा’ संस्कृत का नाम है, जिसका अर्थ ‘सिंहों का शहर’ है।
माओ ज़ेडोंग ने 1966 में क्रांतिकारी विचारों को फिर से मजबूत करने और कम्युनिस्ट पार्टी में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए सांस्कृतिक क्रांति शुरू की।
सिंगापुर की शुरुआती बंदरगाह बस्ती को तेमासेक या तेमासिक कहा जाता था। 14वीं सदी के दस्तावेज़ों में इस नाम का उल्लेख मिलता है; सिंगापुरा भी इस बस्ती से जुड़ा ऐतिहासिक नाम है। [6][8]
1958 में शुरू हुई ग्रेट लीप फॉरवर्ड का लक्ष्य चीन का तेज़ी से औद्योगीकरण और कृषि उत्पादन बढ़ाना था। इसके तहत ग्रामीण आबादी को बड़े सामूहिक कम्यूनों में संगठित किया गया और इस्पात उत्पादन पर ज़ोर दिया गया।
चीनी गृहयुद्ध की जड़ चीन पर शासन करने के अधिकार को लेकर राष्ट्रवादियों और कम्युनिस्टों के बीच संघर्ष था।