AI पर्यावरण और संरक्षण से जुड़े संगठनों को जलवायु डेटा समझने, जंगलों में आग पर नज़र रखने और वन्यजीवों की गिनती करने में मदद दे रहा है। लेकिन इसी तकनीक को चलाने वाले डेटा सेंटर बिजली और पानी की बढ़ती खपत तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर चिंता भी पैदा करते हैं। रॉयटर्स से बातचीत में शामिल सभी 15 संगठनों ने AI के किसी न किसी रूप में इस्तेमाल की बात कही और इसके पर्यावरणीय प्रभाव पर चिंता जताई।
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यह खुलकर AI अपनाने का समर्थन नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक समझौता है: जहां तकनीक संरक्षण के खास काम में मददगार हो, वहां उसका इस्तेमाल करना—और जहां मुमकिन हो, अनावश्यक कंप्यूटिंग कम करना।
संरक्षण के काम में AI कैसे मददगार है?
AI बड़ी मात्रा में पर्यावरणीय जानकारी को जल्दी विश्लेषित कर सकता है। मिसाल के तौर पर, Conservation International उपग्रह तस्वीरों और AI की मदद से कंबोडिया में जंगलों की गश्त करने वाली टीमों को संभावित आग के बारे में चेतावनी देता है।
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Save the Elephants के लिए मशीन लर्निंग ने हवाई सर्वेक्षण की तस्वीरों की समीक्षा तेज़ की है। रिपोर्ट के मुताबिक, पहले करीब 200,000 तस्वीरें देखने में नौ लोगों को नौ महीने लगते थे; अब ऐसा विश्लेषण कुछ घंटों में किया जा सकता है।
10 यह तेज़ी सर्वेक्षण को संरक्षण के काम में जल्दी इस्तेमाल करने लायक बना सकती है। हालांकि, सिर्फ इस आंकड़े से तकनीक का कुल पर्यावरणीय फायदा या लागत तय नहीं होती।
The Nature Conservancy व्यावसायिक मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर रिकॉर्ड किए गए वीडियो का विश्लेषण करने के लिए AI का इस्तेमाल करती है, ताकि पकड़ी गई मछलियों की प्रजातियों और संख्या का पता लगाया जा सके। वीडियो को उसी जगह या उसके पास प्रोसेस करने से बड़ी फाइलें दूर के सर्वर तक भेजने की जरूरत भी कम हो सकती है।
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AI का पर्यावरणीय असर घटाने की कोशिशें
कुछ संगठन यह भी तय कर रहे हैं कि AI का इस्तेमाल किन कामों में और किस तरह किया जाए। World Resources Institute (WRI) का कहना है कि वह संसाधन-सघन कामों—जैसे तस्वीरें और वीडियो बनाना—सीमित करता है। वह खोजों के नतीजे कैश भी करता है, यानी एक जैसे सवालों के जवाब दोबारा तैयार करने के बजाय पहले से मिले नतीजे इस्तेमाल करता है।
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The Nature Conservancy का नावों पर ही वीडियो विश्लेषित करना भी इसी तरह की एक मिसाल है: इससे दूर के सर्वरों तक भेजे जाने वाले डेटा की मात्रा घट सकती है।
26 ऐसे कदम AI की ऊर्जा और संसाधनों की जरूरत खत्म नहीं करते, लेकिन गैरज़रूरी प्रोसेसिंग से बचने में मदद कर सकते हैं।
फायदे और लागत का हिसाब अभी साफ़ नहीं
चिंता किसी एक परियोजना तक सीमित नहीं है। AI को सहारा देने वाले डेटा सेंटरों की बढ़ती बिजली की मांग, पानी की खपत और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन पर रॉयटर्स से बात करने वाले संगठनों ने चिंता जताई।
6 रिपोर्ट में उपयोगी परियोजनाओं और संसाधन बचाने की कुछ कोशिशों के उदाहरण हैं, लेकिन हर परियोजना के कुल पर्यावरणीय असर का हिसाब नहीं दिया गया।
यह फर्क अहम है: वन्यजीव सर्वेक्षण जल्दी पूरा होना या आग की पहले चेतावनी मिलना उपयोगी हो सकता है, लेकिन इससे अपने-आप यह साबित नहीं होता कि संरक्षण का फायदा उस काम में लगी बिजली और पानी की कीमत से बड़ा है। फिलहाल सामने आई तस्वीर चुनिंदा इस्तेमाल और गैरज़रूरी कंप्यूटिंग घटाने की कोशिशों की है—AI के कुल पर्यावरणीय संतुलन पर अंतिम निष्कर्ष की नहीं।
यह सवाल अब जलवायु नीति की चर्चाओं में भी आ रहा है। तुर्की ने COP31 से पहले एक पहल शुरू की है, जिसका उद्देश्य AI ढांचे के विकास को वैश्विक जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप रखने के लिए राजनीतिक प्रतिबद्धता हासिल करना है।
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