रूस का यूक्रेन में आक्रमण रुका नहीं है, लेकिन उसकी रफ्तार अब पहले जैसी नहीं रही। सबसे साफ संकेत क्षेत्रीय नियंत्रण के आंकड़ों में दिखता है: ISW डेटा पर आधारित रिपोर्टिंग के अनुसार रूस की बढ़त जनवरी 2026 में 319 वर्ग किलोमीटर से घटकर फरवरी में 123 वर्ग किलोमीटर और मार्च में सिर्फ 23 वर्ग किलोमीटर रह गई । AFP/ISW से जुड़ी एक समीक्षा ने मार्च को करीब ढाई साल में ऐसा पहला महीना बताया जब रूस को मोर्चे पर लगभग कोई क्षेत्रीय लाभ नहीं मिला
। इसके बाद ISW ने आकलन किया कि अप्रैल में रूसी बलों ने 116 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर नियंत्रण खोया—यूक्रेन के अगस्त 2024 के कुर्स्क अभियान के बाद यूक्रेनी थिएटर में रूस का पहला शुद्ध क्षेत्रीय नुकसान
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इस धीमेपन की कोई एक वजह नहीं है। उपलब्ध रिपोर्टिंग बताती है कि कई कारक साथ काम कर रहे हैं: यूक्रेन स्थानीय पलटवार और मध्यम दूरी के हमलों से पहल को चुनौती दे रहा है, ड्रोन जमीनी हमलों को ज्यादा महंगा बना रहे हैं, और रूस को सैनिक भर्ती तथा संचालन-संबंधी बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है ।
ISW के 2 मई के आकलन के अनुसार, रूस की आगे बढ़ने की दर नवंबर 2025 से लगातार घट रही है । 2026 की शुरुआत के मासिक आंकड़े इस बदलाव को साफ दिखाते हैं:
यहां एक जरूरी सावधानी है: मार्च और अप्रैल के जिन आंकड़ों का हवाला दिया गया है, उनमें कुछ रूसी घुसपैठ अभियानों या ऐसे इलाकों को शामिल नहीं किया गया जहां रूसी सैनिक अंदर तक पहुंचे हों लेकिन नियंत्रण स्थापित न कर पाए हों । यानी ये आंकड़े “कब्जे में आए क्षेत्र” को मापते हैं, हर रूसी मौजूदगी को नहीं।
ISW के 31 मार्च के आकलन में कहा गया कि रूसी बढ़त इसलिए धीमी हुई क्योंकि यूक्रेनी बल लंबे समय से अलग-अलग मोर्चों पर पहल को चुनौती दे रहे हैं । मार्च की सुस्ती पर रिपोर्टिंग ने दक्षिण-पूर्व सहित यूक्रेन की स्थानीय पलटवार कार्रवाइयों को भी अहम वजह बताया
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युद्धक्षेत्र में यह फर्क बड़ा होता है। सीमित पलटवार भी किसी बड़े आक्रमण की लय बिगाड़ सकते हैं। अगर रूसी इकाइयों को हाल में कब्जाए गए स्थानों की रक्षा करनी पड़े, यूक्रेनी जांच-हमलों का जवाब देना पड़े या रिजर्व बलों को एक सेक्टर से दूसरे सेक्टर ले जाना पड़े, तो वे अगले बड़े धक्के के लिए बलों को आसानी से इकट्ठा नहीं कर पातीं। परिणाम हमेशा किसी नाटकीय यूक्रेनी सफलता के रूप में नहीं दिखता, लेकिन इतना जरूर हो सकता है कि रूसी दबाव छोटे लाभों में सिमट जाए—या ISW की माप के अनुसार अप्रैल की तरह शुद्ध नुकसान में बदल जाए ।
UNN की रिपोर्ट, सैन्य विश्लेषकों और फ्रंट-लाइन ट्रैकिंग डेटा के हवाले से, कहती है कि रूस की आक्रामक रफ्तार कमजोर होने की वजहों में ड्रोन से बढ़ती मुश्किलें और अनुबंध सैनिकों की भर्ती की समस्याएं शामिल हैं ।
बात यह नहीं कि ड्रोन अकेले रूस को रोक रहे हैं। असली बात यह है कि ड्रोन-प्रधान युद्धक्षेत्र में बार-बार पैदल या जमीनी हमले करना ज्यादा महंगा और जोखिमभरा हो जाता है। जब महीने भर की बढ़त कुछ दर्जन वर्ग किलोमीटर तक सीमित हो—या नकारात्मक हो जाए—तो लगातार निगरानी और ज्यादा क्षति हमलों का फायदा तेजी से घटा देती है ।
CSIS ने रूस के युद्ध को मामूली लाभ के लिए असाधारण लागत वाला युद्ध बताया और अनुमान लगाया कि फरवरी 2022 से रूसी बलों को करीब 12 लाख casualties झेलनी पड़ी हैं । उसी विश्लेषण के अनुसार, 2024 में पहल हासिल करने के बाद भी रूस की प्रमुख आक्रामक कार्रवाइयां औसतन केवल 15 से 70 मीटर प्रतिदिन की रफ्तार से आगे बढ़ीं
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यही वजह है कि भर्ती का सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है। UNN ने रिपोर्ट किया कि रूस पर्याप्त अनुबंध सैनिकों की भर्ती में संघर्ष कर रहा है, जिससे 2024 और 2025 में सीमित क्षेत्रीय लाभ दिलाने वाली भारी-क्षति वाली आक्रामक रफ्तार को बनाए रखना मुश्किल होता है । रूस हमले जारी रख सकता है, लेकिन उपलब्ध आंकड़े बताते हैं कि उन हमलों से मिलने वाला क्षेत्रीय प्रतिफल घट रहा है
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ISW ने 2025 के अंत से रूस की बढ़त घटने के पीछे कई और कारण गिनाए: यूक्रेनी जमीनी पलटवार, यूक्रेन के मध्यम दूरी के हमले, फरवरी 2026 में यूक्रेन में रूसी बलों द्वारा Starlink टर्मिनल इस्तेमाल पर रोक, और Kremlin की ओर से Telegram को सीमित करने की कोशिशें । ISW के 31 मार्च के आकलन में भी कहा गया कि यूक्रेनी पलटवारों और मध्यम दूरी के हमलों के साथ ये संचार दबाव रूसी सेना की मौजूदा समस्याओं को और बढ़ा रहे हैं
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इन वजहों को असर डालने के लिए रूसी इकाइयों को पूरी तरह नष्ट करने की जरूरत नहीं होती। वे हमलों का तालमेल, बलों की तैनाती, रसद की आवाजाही और स्थानीय दबाव को बड़े संचालनात्मक लाभ में बदलने की क्षमता को कमजोर कर सकती हैं। इससे समझ आता है कि रूस हमले तो कर रहा है, लेकिन उन्हें तेज क्षेत्रीय बढ़त में बदलने में संघर्ष कर रहा है ।
यह धीमापन इस दावे को कमजोर करता है कि रूस जल्द ही पूरे डोनबास पर तेजी से कब्जा कर सकता है। UNN ने सैन्य विश्लेषकों और फ्रंट-लाइन ट्रैकिंग डेटा के हवाले से रिपोर्ट किया कि रूसी सेना फिलहाल पूरे क्षेत्र को जल्दी कब्जे में लेने में सक्षम नहीं है ।
इसका मतलब यह भी नहीं कि यूक्रेन जल्द ही बड़े इलाके वापस ले ही लेगा। उपलब्ध रिपोर्टें बस यह दिखाती हैं कि लड़ाई तेज रूसी breakthrough के बजाय धीमी, महंगी और घिसटती हुई लड़ाई बन रही है। सबसे मजबूत निष्कर्ष सीमित लेकिन अहम है: 2026 की शुरुआती वसंत ऋतु तक रूस की आक्रामक कार्रवाई कीमत के मुकाबले बहुत कम जमीन दे रही थी, और अप्रैल में ISW की माप के अनुसार यह शुद्ध नुकसान में बदल गई ।
उपलब्ध स्रोत यह साबित नहीं करते कि रूस की सुस्ती स्थायी है। मासिक फ्रंट-लाइन डेटा बदल सकता है, और ISW के क्षेत्रीय आंकड़ों में घुसपैठ बनाम वास्तविक नियंत्रण को लेकर स्पष्ट सावधानियां हैं ।
फिर भी मौजूदा पैटर्न साफ है: रूस की बढ़त इसलिए धीमी हुई है क्योंकि यूक्रेन पहल को अधिक प्रभावी ढंग से चुनौती दे रहा है, जबकि रूसी बल ड्रोन, पलटवार, मध्यम दूरी के हमलों, भर्ती दबाव और संचालनात्मक रुकावटों से जूझ रहे हैं। रूस हमला करने में सक्षम है, लेकिन हालिया डेटा तेज मार्च नहीं, बल्कि घटते प्रतिफल वाला आक्रमण दिखाता है ।
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रूस की बढ़त इसलिए धीमी हुई है क्योंकि यूक्रेन ड्रोन, स्थानीय पलटवार और मध्यम दूरी के हमलों से पहल को चुनौती दे रहा है।
रूस की बढ़त इसलिए धीमी हुई है क्योंकि यूक्रेन ड्रोन, स्थानीय पलटवार और मध्यम दूरी के हमलों से पहल को चुनौती दे रहा है। रूस को मामूली क्षेत्रीय बढ़त के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ रही है; भर्ती की दिक्कतें और संचार संबंधी दबाव भी उसकी रफ्तार घटा रहे हैं।
रूस अभी भी हमले करने में सक्षम है, लेकिन हालिया आंकड़े डोनबास पर तेज कब्जे के बजाय घटते प्रतिफल वाली लंबी, महंगी लड़ाई की ओर इशारा करते हैं।