इसका असली मतलब यह है कि आयरन डोम की बैटरियां, लॉन्चर, सपोर्ट वाहन और उन पर तैनात सैनिक अब खुद भी नज़दीकी सुरक्षा के बड़े सवाल में आ गए हैं।
यह खतरा मैदान-स्तर पर गंभीर है। रिपोर्टों के अनुसार फ़ाइबर-ऑप्टिक FPV ड्रोन सामान्य रेडियो लिंक के बजाय पतले भौतिक केबल से नियंत्रित होते हैं, जिससे वे पारंपरिक ड्रोन के खिलाफ इस्तेमाल होने वाले कई इलेक्ट्रॉनिक काउंटरमेज़र को दरकिनार कर सकते हैं , । Times of Israel ने भी रिपोर्ट किया है कि हिज़्बुल्लाह के कुछ FPV ड्रोन फ़ाइबर-ऑप्टिक केबल का इस्तेमाल करते हैं, जिससे वे इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग से प्रभावी रूप से अप्रभावित हो जाते हैं ।
लेकिन यह कहना अलग बात होगी कि हिज़्बुल्लाह ने आयरन डोम की व्यापक मिसाइल-रक्षा भूमिका को निष्प्रभावी करने का तरीका खोज लिया है। यहां उपलब्ध रिपोर्टें हताहतों, युद्धक्षेत्र में अनुकूलन और एयर-डिफेंस ठिकानों पर कथित हमलों की बात करती हैं; वे यह साबित नहीं करतीं कि फ़ाइबर-ऑप्टिक FPV ड्रोन पूरे इज़राइल में रॉकेटों को रोकने की आयरन डोम की क्षमता को रोक सकते हैं।
बेहतर फ्रेमिंग है: पॉइंट डिफेंस, यानी किसी खास ठिकाने की नज़दीकी रक्षा। इज़राइल को अब अपनी वायु-रक्षा प्रणाली की भी रक्षा करनी पड़ रही है—भौतिक बाधाओं, सेंसर, कम दूरी के रोकथाम विकल्पों, गतिशीलता, छिपाव और ड्रोन ऑपरेटरों व लॉन्च नेटवर्क पर दबाव के जरिए। सार्वजनिक रिपोर्टों में पहले ही कहा गया है कि IDF ने आने वाले ड्रोन के खिलाफ जाल और सुरक्षात्मक बाधाओं का इस्तेमाल किया है ।
FPV यानी First Person View: ऑपरेटर ड्रोन के कैमरे जैसा दृश्य देखकर उसे लक्ष्य तक उड़ाता है। आम काउंटर-ड्रोन उपायों में रेडियो कंट्रोल लिंक को जाम करना, नेविगेशन में बाधा डालना या रेडियो सिग्नल का पता लगाना शामिल होता है। फ़ाइबर-ऑप्टिक FPV ड्रोन इस बढ़त को कम कर देते हैं, क्योंकि नियंत्रण सिग्नल हवा में रेडियो तरंगों से नहीं बल्कि एक भौतिक फ़ाइबर से जाता है , ।
इससे ड्रोन अदृश्य या अजेय नहीं हो जाता। उसे अब भी लक्ष्य तक उड़कर आना होता है, गैर-रेडियो सेंसर उसे पहचान सकते हैं, और उसे भौतिक रूप से रोका या गिराया जा सकता है। लेकिन इसका अर्थ यह जरूर है कि असली फ़ाइबर-ऑप्टिक मॉडल के खिलाफ केवल जैमिंग पर भरोसा करना गलत जवाब होगा , , ।
लागत का गणित भी मुश्किल है। Los Angeles Times के अनुसार ये छोटे ड्रोन 300 डॉलर जितनी कम लागत में बन सकते हैं और आसानी से उपलब्ध घटकों से तैयार किए जा सकते हैं । ऐसे में हर छोटे, नीची उड़ान वाले ड्रोन पर महंगा इंटरसेप्टर दागना व्यावहारिक नहीं लगता, खासकर जब वह किसी लॉन्चर, वाहन या सैनिक दल को निशाना बना रहा हो।
कई मीडिया रिपोर्टों में हिज़्बुल्लाह के दावों या फुटेज का हवाला देकर आयरन डोम से जुड़े लक्ष्यों पर FPV ड्रोन हमलों की बात कही गई है। Türkiye Today ने रिपोर्ट किया कि हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी इज़राइल में आयरन डोम एयर-डिफेंस बैटरी पर FPV ड्रोन हमले का फुटेज जारी किया । Middle East Eye ने Jerusalem Post की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि हिज़्बुल्लाह ने उत्तरी सीमा के पास आयरन डोम बैटरी पर FPV ड्रोन हमले का फुटेज जारी किया । FW Magazine ने रिपोर्ट किया कि हिज़्बुल्लाह ने 7 मई को इज़राइल-लेबनान सीमा के पास आयरन डोम लॉन्चर पर हमला करने और अगले दिन उसी पोज़िशन को फिर निशाना बनाने का दावा किया ।
इन दावों को सावधानी से पढ़ना चाहिए। रिपोर्टिंग का कुछ हिस्सा हिज़्बुल्लाह द्वारा जारी फुटेज पर निर्भर है, और Long War Journal ने नोट किया है कि इस ड्रोन वर्ग को फ़ाइबर-ऑप्टिक FPV हथियार के रूप में पेश करने में हिज़्बुल्लाह-समर्थक मीडिया की भूमिका अहम रही है । उपलब्ध स्रोतों से आयरन डोम सिस्टम को हुए वास्तविक युद्धक्षेत्र नुकसान का स्वतंत्र स्तर स्पष्ट नहीं होता।
फिर भी व्यापक ड्रोन समस्या वास्तविक दिखती है। Los Angeles Times ने रिपोर्ट किया कि हिज़्बुल्लाह के फ़ाइबर-ऑप्टिक ड्रोन ने इज़राइली सैनिकों को घायल किया और कम-से-कम एक इज़राइली सैन्यकर्मी की मौत हुई । Vanguard के अनुसार इज़राइली सेना ने एक सप्ताह से कम समय में विस्फोटक ड्रोन हमलों में दो सैनिकों और एक नागरिक कॉन्ट्रैक्टर की मौत की पुष्टि की, जबकि कई अन्य घायल हुए । Times of Israel ने हाल के सप्ताहों में ड्रोन-संबंधी दर्जनों चोटों की बात कही, हालांकि यह भी नोट किया कि सभी ड्रोन हताहतों को स्पष्ट रूप से FPV या फ़ाइबर-ऑप्टिक मॉडल से जोड़ना संभव नहीं था ।
आयरन डोम की मुख्य अहमियत इज़राइल की मिसाइल-रक्षा व्यवस्था में है, लेकिन उसकी बैटरी जमीन पर मौजूद एक सैन्य साइट भी है—लॉन्चर, सेंसर, सपोर्ट वाहन, पावर सिस्टम, रीलोड गतिविधि और सैनिकों के साथ। एक छोटा FPV ड्रोन आयरन डोम के इंटरसेप्ट एल्गोरिद्म को हराए बिना भी असर डाल सकता है; उसे बस खुले उपकरणों को नुकसान पहुंचाना, सैनिकों को घायल करना या साइट की गतिविधि बाधित करनी होती है।
यही वजह है कि इसे एयर-डिफेंस बनाम ड्रोन की सीधी लड़ाई के बजाय सुरक्षा-परतों की समस्या मानना चाहिए। आयरन डोम रॉकेट और मिसाइल खतरों के खिलाफ अहम रह सकता है, लेकिन उसे सस्ते, नज़दीकी और जैमिंग-रोधी ड्रोन से खुद बचाने की जरूरत भी पड़ सकती है। इज़राइल द्वारा जाल और सुरक्षात्मक बाधाएँ लगाने की रिपोर्ट इसी दिशा की ओर इशारा करती है ।
कोई एक उपाय इस समस्या को हल नहीं करेगा। व्यवहारिक जवाब कई परतों वाला होगा: भौतिक सुरक्षा, स्थानीय पहचान, नज़दीकी रोकथाम और लॉन्च नेटवर्क पर दबाव।
जब नियंत्रण लिंक को जाम करना मुश्किल हो, तब भौतिक सुरक्षा का महत्व बढ़ जाता है। जाल, सुरक्षात्मक बाधाएँ, केज, ऊपर से कवर, फ्रैगमेंटेशन स्क्रीन और विस्फोट से दूरी बनाने की व्यवस्था एक छोटे वारहेड से लॉन्चर या सैनिकों को होने वाले नुकसान को कम कर सकती है। सार्वजनिक रिपोर्टों में IDF द्वारा जाल और सुरक्षात्मक बाधाओं के इस्तेमाल की बात कही गई है; एक अन्य रिपोर्ट में दक्षिणी लेबनान में सैनिकों के लिए फिशिंग नेट भेजे जाने का भी जिक्र है , ।
ये उपाय साधारण दिख सकते हैं, लेकिन उनकी बुनियादी उपयोगिता यही है: फ़ाइबर-ऑप्टिक ड्रोन को भी लक्ष्य तक पहुंचना पड़ता है।
सीमा के पास एयर-डिफेंस साइटों को पीछे के सुरक्षित ठिकाने की तरह नहीं, बल्कि अग्रिम पंक्ति के लक्ष्य की तरह देखना होगा। लॉन्चर और सपोर्ट उपकरणों की गतिशीलता, कैमोफ्लाज, व्यावहारिक जगहों पर सिग्नल अनुशासन, डिकॉय और उपकरणों का फैलाव एक सफल FPV हमले के लाभ को कम कर सकते हैं। इससे खतरा खत्म नहीं होता, लेकिन एक ही हिट से ज्यादा नुकसान होने की संभावना घटती है।
छोटे FPV ड्रोन बहुत कम चेतावनी समय देते हैं। स्थानीय सेंसर-मिश्रण ज्यादा व्यावहारिक जवाब है: इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल कैमरे, थर्मल इमेजर, ध्वनि-आधारित पहचान, जरूरत पड़ने पर कम दूरी के रडार और प्रशिक्षित पर्यवेक्षक। किसी एक सेंसर को पर्याप्त मानना जोखिम भरा होगा, खासकर ऐसे सस्ते ड्रोन के खिलाफ जिनसे निपटने के लिए इज़राइली बलों को अपनी रणनीति बदलनी पड़ रही है , ।
जवाबी उपाय की लागत खतरे के पैमाने से मेल खानी चाहिए। यदि एक ड्रोन कुछ सौ डॉलर में बन सकता है, तो महंगे इंटरसेप्टर उन खतरों के लिए बचाए जाने चाहिए जो सचमुच उनकी मांग करते हैं । कम दूरी के काइनेटिक सिस्टम, इंटरसेप्टर ड्रोन, नेट-आधारित विकल्प, एयरबर्स्ट गोला-बारूद और तेज प्रतिक्रिया टीमें छोटे FPV ड्रोन के खिलाफ ज्यादा तर्कसंगत पॉइंट-डिफेंस परत बन सकती हैं।
इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर अब भी गैर-फ़ाइबर ड्रोन, व्यापक UAV गतिविधि, नेविगेशन लिंक और रेडियो पर निर्भर सिस्टम के खिलाफ उपयोगी है। लेकिन असली फ़ाइबर-ऑप्टिक FPV ड्रोन के मामले में रिपोर्टें एक ही सीमा दिखाती हैं: नियंत्रण लिंक रेडियो जैमिंग से बच सकता है, क्योंकि वह भौतिक फ़ाइबर से चलता है , , ।
क्योंकि ये ड्रोन भौतिक फ़ाइबर थ्रेड के जरिए मैन्युअली गाइड किए जाते हैं, खतरे से निपटना केवल उड़ान के अंतिम सेकंडों तक सीमित नहीं हो सकता । उच्च स्तर पर जवाब में ऑपरेटरों, तैयारी स्थलों, सप्लाई रूट और लॉन्च-पूर्व गतिविधि पर खुफिया-आधारित दबाव शामिल होना होगा। जितने अधिक ड्रोन लॉन्च से पहले रोके जाएं, उतना कम बोझ बैटरी की परिधि पर तैनात सैनिकों पर पड़ेगा।
सार्वजनिक रिपोर्टों में Iron Beam को एक हाई-एनर्जी लेज़र सिस्टम के रूप में बताया गया है, जिसका उद्देश्य ड्रोन और रॉकेट जैसे हवाई खतरों के खिलाफ आयरन डोम को पूरक बनाना है । ऐसे सिस्टम समय के साथ लागत-समस्या को कम कर सकते हैं, लेकिन वे तुरंत लागू होने वाली साइट-स्तर की सुरक्षा की जगह नहीं लेते। फिलहाल जवाब स्थानीय, भौतिक और कई-परतों वाला ही दिखता है।
हिज़्बुल्लाह के फ़ाइबर-ऑप्टिक FPV ड्रोन कोई जादुई हथियार नहीं हैं। आयरन डोम को नुकसान पहुंचाने के सबसे मजबूत दावों पर भी सावधानी जरूरी है, क्योंकि कुछ रिपोर्टें हिज़्बुल्लाह मीडिया या हिज़्बुल्लाह द्वारा जारी फुटेज पर आधारित हैं , , ।
लेकिन खतरा वास्तविक और गंभीर है। सस्ते, सटीक और जैमिंग-रोधी FPV ड्रोन इज़राइल को उन एयर-डिफेंस परिसंपत्तियों की रक्षा पर अतिरिक्त सैनिक, पैसा और ध्यान लगाने के लिए मजबूर कर सकते हैं जिनका मूल काम बड़े रॉकेट और मिसाइल खतरों से रक्षा करना है , , । व्यावहारिक जवाब कोई एक नया गैजेट नहीं, बल्कि हार्डनिंग, छिपाव, नज़दीकी सेंसर, कम लागत वाले इंटरसेप्ट, चुनिंदा इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर और ड्रोन लॉन्च नेटवर्क पर दबाव से बनी परतदार रक्षा है।