सबसे बड़ा कारण अब भी sanctions ही हैं। Reuters-संबद्ध रिपोर्टिंग के अनुसार, फरवरी में रूस का प्रमुख Urals blend Baltic ports से Brent के मुकाबले करीब तीन साल के सबसे गहरे डिस्काउंट पर बिक रहा था; रिपोर्ट ने इस छूट को यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस पर लगाए गए पश्चिमी प्रतिबंधों का नतीजा बताया ।
Bloomberg-संबद्ध रिपोर्टिंग ने Argus Media के आंकड़ों के हवाले से कहा कि रूस के western ports से Urals का औसत डिस्काउंट Dated Brent से $30.62 प्रति बैरल नीचे पहुंच गया था, जो अप्रैल 2023 के बाद सबसे चौड़ा अंतर था ।
यह फर्क सिर्फ headline price का मामला नहीं है। प्रतिबंध खरीदारों की संख्या घटाते हैं, refiners और traders के लिए compliance risk बढ़ाते हैं और sellers को उन buyers को मनाने के लिए ज्यादा छूट देनी पड़ती है जिन्हें financing, insurance, shipping या resale में अतिरिक्त परेशानी उठानी पड़ सकती है। एक विश्लेषण ने sanctions और market fragmentation को ऐसी वजह बताया, जिसने रूसी तेल व्यापार को महंगी “shadow fleet” logistics की ओर धकेला और compliance penalties के जरिये revenue पर दबाव डाला ।
पश्चिमी प्रतिबंधों के बाद भारत रूसी crude का बड़ा outlet बनकर उभरा। भारतीय refiners ने discount वाले रूसी तेल से फायदा उठाया, और रूस को यूरोप से हटे barrels के लिए नया बाजार मिला। लेकिन हालिया रिपोर्टें दिखाती हैं कि sanctions scrutiny बढ़ने पर भारतीय demand तेजी से नरम पड़ सकती है।
Reuters ने बताया कि फरवरी में भारतीय ports पर पहुंचने वाली Urals cargoes Dated Brent से करीब $10 प्रति बैरल डिस्काउंट पर trade हुईं; यह autumn deliveries के मुकाबले $3–$5 प्रति बैरल ज्यादा छूट थी और 2022 के बाद सबसे चौड़े स्तरों के करीब थी, जब पश्चिमी sanctions pressure तेज था ।
एक अन्य रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख रूसी producers पर ताजा अमेरिकी प्रतिबंधों के बाद भारतीय और चीनी refiners ने खरीद कम की, जिससे Urals discounts और चौड़े हुए । जब भारत जैसा बड़ा buyer पहले जितना अनुमानित नहीं रहता, तो रूस को बाकी मांग के लिए ज्यादा मुकाबला करना पड़ता है।
भारत की भूमिका कम निश्चित होने पर चीन की bargaining power बढ़ती है। 2026 की शुरुआत की रिपोर्टों में कहा गया कि रूसी sellers चीन को delivered Urals पर discount को मौजूदा करीब $10–$12 प्रति बैरल से $2–$5 और बढ़ाने के विकल्प तैयार कर रहे थे, ताकि export flow जारी रहे ।
एक और रिपोर्ट में कहा गया कि भारत की भविष्य की खरीद को लेकर अनिश्चितता के बीच Russian crude discounts to China record levels पर पहुंच गए, क्योंकि sellers demand बनाए रखने के लिए ज्यादा छूट दे रहे थे ।
इस सौदेबाजी की कीमत revenue में दिखती है। The Moscow Times ने Gaidar Institute analysts के हवाले से लिखा कि Chinese refiners को दिए गए discounts ने 2025 में Russian oil suppliers को $2.2 अरब का नुकसान पहुंचाया, भले ही global oil prices बढ़े थे ।
कई बार पाठकों को यह विरोधाभास लग सकता है: अगर Middle East तनाव से तेल महंगा हो रहा है, तो रूसी Urals भी Brent के करीब क्यों नहीं आ जाता? जवाब है—absolute price और relative discount अलग चीजें हैं।
Rigzone ने रिपोर्ट किया कि Middle East escalation से प्रेरित global oil rally के दौरान भी रूस के western ports से Urals, Dated Brent से करीब $30.9 प्रति बैरल नीचे trade कर रहा था; यह अप्रैल 2023 के बाद सबसे चौड़ा gap था ।
साथ ही, एक रिपोर्ट के मुताबिक Middle East conflict से global supplies tight होने पर भारतीय ports पर delivered Urals की कीमत $98.93 प्रति बैरल तक पहुंच गई । यानी Urals की कुल कीमत बाजार के साथ ऊपर जा सकती है, लेकिन Brent के मुकाबले छूट फिर भी बड़ी रह सकती है—क्योंकि buyers Russian-specific risks के लिए compensation मांगते रहते हैं।
Urals का heavy और high-sulfur profile यह समझाता है कि वह Brent से सामान्यतः थोड़ा सस्ता क्यों बिकता है। लेकिन वह सामान्य quality discount sanctions से पहले करीब $1–$3 प्रति बैरल था; मौजूदा $30-plus spread को सिर्फ crude quality से समझाना मुश्किल है ।
इसलिए मौजूदा discount को बेहतर तरीके से यूं समझा जा सकता है: सामान्य quality discount के ऊपर sanctions, logistics और market-access discount की मोटी परत चढ़ गई है।
Urals discount बढ़ने का सीधा असर रूस की oil revenue पर पड़ता है। Reuters-संबद्ध रिपोर्टिंग ने लिखा कि कम oil prices रूस के सरकारी बजट को चोट पहुंचाते हैं और Russian Finance Ministry के data के अनुसार 2025 में राज्य की oil and gas revenues 24% गिरकर 2020 के बाद सबसे निचले स्तर पर आ गईं ।
बड़े बाजार के लिए संकेत यह है कि Brent और Russian crude pricing हमेशा एक जैसी दिशा में नहीं चलेंगे। Brent वैश्विक supply-demand stress को दर्शाता है; Urals की कीमत यह भी बताती है कि कितने खरीदार sanctioned Russian barrels को लेने के लिए तैयार और सक्षम हैं।
फिलहाल इसी दूसरे पहलू—यानी खरीदारों की सीमित संख्या, sanctions compliance और shipping/payment friction—का असर सबसे ज्यादा दिख रहा है। यही वजह है कि तेल बाजार में तेजी के बावजूद रूस का Urals crude Brent के मुकाबले फिर भारी discount पर बिक रहा है।