अप्रैल 2026 में एशिया के विदेशी मुद्रा भंडार की बढ़त को सबसे पहले वैल्यूएशन इफेक्ट के रूप में समझना चाहिए। यानी यह जरूरी नहीं कि केंद्रीय बैंकों ने अचानक बहुत बड़ी मात्रा में नए डॉलर खरीद लिए हों। आधिकारिक रिजर्व कई मुद्राओं की परिसंपत्तियों से बन सकते हैं; जब अमेरिकी डॉलर कमजोर होता है, तो यूरो, येन, पाउंड या अन्य गैर-डॉलर होल्डिंग्स का डॉलर में रिपोर्ट किया गया मूल्य बढ़ सकता है, भले पोर्टफोलियो में वास्तविक बदलाव सीमित हो [24][
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मुख्य वजह: कमजोर डॉलर से वैल्यूएशन गेन
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF का COFER डेटा आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार की करेंसी-कंपोजिशन को ट्रैक करता है। इसमें अमेरिकी डॉलर, यूरो, चीनी रेनमिन्बी, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, कनाडाई डॉलर, स्विस फ्रैंक और अन्य मुद्राएं शामिल हैं [24]। यही बात अहम है: रिजर्व पर चर्चा अक्सर डॉलर में होती है, लेकिन भंडार में रखी परिसंपत्तियां कई अलग-अलग मुद्राओं में हो सकती हैं।
देर अप्रैल 2026 की बाजार टिप्पणियों में अमेरिकी डॉलर को कमजोर बताया गया, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दर कटौती की उम्मीदें बढ़ रही थीं और वैश्विक जोखिम भावना बेहतर हो रही थी [2]। ऐसे माहौल में यूरो, येन, पाउंड या अन्य गैर-डॉलर रिजर्व परिसंपत्तियां डॉलर में ज्यादा बड़ी दिखती हैं। दक्षिण कोरिया की केंद्रीय-बैंक रिपोर्टिंग ने इसी प्रक्रिया को साफ किया: प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में गिरावट ने गैर-डॉलर परिसंपत्तियों के डॉलर-मूल्य को बढ़ाया ।




