अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यानी IMF का COFER डेटा आधिकारिक विदेशी मुद्रा भंडार की करेंसी-कंपोजिशन को ट्रैक करता है। इसमें अमेरिकी डॉलर, यूरो, चीनी रेनमिन्बी, जापानी येन, पाउंड स्टर्लिंग, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, कनाडाई डॉलर, स्विस फ्रैंक और अन्य मुद्राएं शामिल हैं । यही बात अहम है: रिजर्व पर चर्चा अक्सर डॉलर में होती है, लेकिन भंडार में रखी परिसंपत्तियां कई अलग-अलग मुद्राओं में हो सकती हैं।
देर अप्रैल 2026 की बाजार टिप्पणियों में अमेरिकी डॉलर को कमजोर बताया गया, क्योंकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की दर कटौती की उम्मीदें बढ़ रही थीं और वैश्विक जोखिम भावना बेहतर हो रही थी । ऐसे माहौल में यूरो, येन, पाउंड या अन्य गैर-डॉलर रिजर्व परिसंपत्तियां डॉलर में ज्यादा बड़ी दिखती हैं। दक्षिण कोरिया की केंद्रीय-बैंक रिपोर्टिंग ने इसी प्रक्रिया को साफ किया: प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर में गिरावट ने गैर-डॉलर परिसंपत्तियों के डॉलर-मूल्य को बढ़ाया ।
अप्रैल 2026 के डेटा को समझने के लिए दक्षिण कोरिया सबसे ठोस केस स्टडी है। बैंक ऑफ कोरिया के आंकड़ों पर आधारित ChosunBiz और Asia Today की रिपोर्टों के मुताबिक, अप्रैल के अंत में दक्षिण कोरिया का विदेशी मुद्रा भंडार $427.88 अरब था, जो मार्च के अंत से $4.22 अरब ज्यादा था । इस बढ़त के पीछे बताई गई वजहें थीं—मुद्रा विनिमय दरों की चाल और विदेशी परिसंपत्तियों पर अधिक रिटर्न या परिचालन आय ।
कोरिया के रिजर्व की बनावट यह भी दिखाती है कि हेडलाइन नंबर सिर्फ नकद डॉलर का ढेर नहीं होता। अप्रैल के अंत में कुल रिजर्व में सिक्योरिटीज $384.07 अरब, यानी 89.8%, थीं; डिपॉजिट $18.76 अरब, विशेष आहरण अधिकार यानी SDR $15.81 अरब, सोना $4.79 अरब और IMF रिजर्व पोजिशन $4.45 अरब थी । साफ है कि विदेशी मुद्रा भंडार एक निवेशित पोर्टफोलियो भी होता है, सिर्फ बैंक के लॉकर में रखा निष्क्रिय डॉलर कैश नहीं।
वैल्यूएशन ही अकेला कारक था, ऐसा कहना भी जल्दबाजी होगी। अप्रैल में Commerzbank ने नोट किया कि चीन, ताइवान और दक्षिण कोरिया में व्यापार और चालू खाते के सरप्लस तेजी से बढ़ रहे थे, जबकि उनकी मुद्राएं यूरो के मुकाबले कमजोर थीं और दक्षिण कोरियाई वॉन तो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भी कमजोर था । बैंक ने इस पैटर्न को व्यवस्थित FX हस्तक्षेप से जोड़ा, जो वास्तविक विनिमय दरों को कम रखने में मदद कर सकता है ।
इसका तंत्र सीधा है। केंद्रीय बैंक विनिमय दरों को प्रभावित करने के लिए विदेशी मुद्रा खरीद या बेच सकते हैं । अगर कोई देश निर्यात या चालू खाते के सरप्लस से आई विदेशी मुद्रा को खरीदकर अपनी स्थानीय मुद्रा को बहुत तेज मजबूत होने से रोकता है, तो उसके रिजर्व बढ़ सकते हैं। लेकिन उल्टी स्थिति में, जब केंद्रीय बैंक कमजोर होती घरेलू मुद्रा को संभालने के लिए विदेशी मुद्रा बेचते हैं, तो रिजर्व घट भी सकते हैं। मार्च 2026 की क्षेत्रीय रिपोर्टों में इंडोनेशिया, भारत और ताइवान को अपनी मुद्राओं को समर्थन देने के लिए हस्तक्षेप करते बताया गया था, जबकि चीन ने अपने दैनिक रेफरेंस रेट के जरिए युआन को समर्थन का संकेत दिया ।
अप्रैल की बढ़त को नए डॉलर की भारी खरीद का साफ-सुथरा प्रमाण नहीं माना जा सकता। प्रकाशित रिजर्व आंकड़े कई चीजों का मिला-जुला असर दिखाते हैं: विनिमय दरों से वैल्यूएशन, निवेश आय, केंद्रीय बैंक के लेन-देन और रिजर्व पोर्टफोलियो की परिसंपत्ति-रचना। दक्षिण कोरिया के आंकड़े ही दिखाते हैं कि सिक्योरिटीज, डिपॉजिट, SDR, सोना और IMF रिजर्व पोजिशन—all—रिपोर्टेड रिजर्व का हिस्सा होते हैं ।
डेटा की सीमा भी ध्यान में रखनी चाहिए। चीन का State Administration of Foreign Exchange आधिकारिक रिजर्व डेटा प्रकाशित करता है, और IMF का COFER डेटा विश्व-स्तर पर रिजर्व कंपोजिशन को ट्रैक करता है । लेकिन उपलब्ध स्रोत देश-दर-देश ऐसा पूरा ब्रेकअप नहीं देते जिससे यह सटीक बताया जा सके कि अप्रैल 2026 की बढ़त में कितना हिस्सा वैल्यूएशन, कितना निवेश आय और कितना FX हस्तक्षेप से आया।
सबसे मजबूत स्पष्टीकरण यही है कि कमजोर अमेरिकी डॉलर ने पहले से मौजूद गैर-डॉलर रिजर्व परिसंपत्तियों का डॉलर में मूल्य बढ़ा दिया। दक्षिण कोरिया का $4.22 अरब का उछाल और $427.88 अरब का अप्रैल-अंत रिजर्व इसका सबसे साफ उदाहरण है, जहां रिपोर्टों ने मुद्रा-चाल और निवेश आय को प्रमुख वजह बताया । कुछ अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार सरप्लस और FX हस्तक्षेप ने भी भूमिका निभाई हो सकती है, लेकिन उपलब्ध साक्ष्य इतने विस्तृत नहीं हैं कि पूरे एशिया के लिए प्रतिशत-वार हिसाब लगाया जा सके ।