दक्षिण कोरिया की सरकारी बिजली कंपनी कोरिया इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (केप्को) ने सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स और SK hynix से कहा था: अगले लगभग पाँच साल के बिजली बिल अभी चुका दें। कुल माँग 25 लाख करोड़ वॉन थी। केप्को इस रकम से योंगिन और होनाम क्षेत्रों में सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए बिजली पहुँचाने वाला नेटवर्क बनाना और नए बॉन्ड जारी करने की जरूरत घटाना चाहती थी। लेकिन 14 सितंबर की रिपोर्टों के मुताबिक, दोनों कंपनियों ने प्रस्ताव ठुकरा दिया; केप्को के प्रवक्ता ने भी इनकार की पुष्टि की।
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केप्को को अभी पैसा क्यों चाहिए था?
प्रस्ताव में सैमसंग से 20 लाख करोड़ वॉन और SK hynix से 5 लाख करोड़ वॉन माँगे गए थे। यह रकम उनके लगभग पाँच साल के अनुमानित बिजली बिलों के आधार पर तय की गई थी। केप्को के सामने एक साथ बिजली पारेषण नेटवर्क बनाने का खर्च और नए बॉन्ड पर निर्भरता सीमित रखने की चुनौती थी।
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उसकी वित्तीय परेशानी पुरानी है। अंतरराष्ट्रीय ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी का पूरा बोझ बिजली दरों में नहीं जोड़ा गया, जिससे घाटा और कर्ज बढ़ा। रिपोर्टों के अनुसार, ऊर्जा संकट के बाद भी बिजली दरें आपूर्ति की पूरी लागत वसूल करने के लिए पर्याप्त नहीं थीं।
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25 जून 2026 के अंत में केप्को का कुल कर्ज 210.7 लाख करोड़ वॉन बताया गया था; एक रिपोर्ट ने उसका रोजाना ब्याज खर्च लगभग 11.5 अरब वॉन आँका।
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दरें तय करने के फैसले भी उसकी आय को प्रभावित करते हैं। सरकार और केप्को ने 2026 की तीसरी तिमाही के लिए बिजली बिल में ईंधन-लागत समायोजन +5 वॉन प्रति किलोवॉट-घंटा पर बनाए रखा।
17 पाँच साल के बिल जल्दी मिल जाते, तो तत्काल नकदी की कमी घट सकती थी—लेकिन उससे बिजली बेचने की लागत और उससे मिलने वाली रकम के बीच का अंतर अपने-आप खत्म नहीं होता।
कंपनियों ने मना क्यों किया?
योजना के तहत कंपनियाँ बिजली इस्तेमाल करने से पहले भुगतान करतीं। बाद में केप्को उनके बिजली बिल अग्रिम जमा रकम से काटती और उस रकम पर ब्याज भी देती। एक रिपोर्ट के मुताबिक, प्रस्तावित ब्याज दक्षिण कोरिया के दो साल के सरकारी बॉन्ड के प्रतिफल से अधिक था। दूसरी रिपोर्ट ने इसे सरकारी और केप्को के बॉन्ड प्रतिफल के बीच बताया। अंतिम ब्याज दर तय नहीं हुई थी।
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‘पाँच साल का बिल अग्रिम’ देने का मतलब जरूरी नहीं था कि सारी रकम एक ही दिन चुकाई जाती। एक रिपोर्ट के अनुसार, केप्को ने 2027 के अंत तक 2 लाख करोड़ वॉन की किस्तों का विचार रखा था। भुगतान का कार्यक्रम और बाकी शर्तें कभी पक्के समझौते का हिस्सा नहीं बनीं।
11 रिपोर्टों के मुताबिक, चिप कारोबार के भविष्य को लेकर अनिश्चितता और अपने निवेश की जरूरतों के बीच दोनों कंपनियों को इतनी नकदी पहले से लगाना उचित नहीं लगा।
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अब ग्रिड के लिए धन कहाँ से आएगा?
केप्को के बॉन्ड जारी करने की कानूनी सीमा में दी गई अस्थायी छूट 2027 के अंत में समाप्त होने वाली बताई गई है। इसलिए नेटवर्क निर्माण जारी रखने के लिए दूसरे वित्तीय रास्ते तलाशना अहम है।
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यह कहना गलत होगा कि 25 लाख करोड़ वॉन मिलते ही केप्को के बकाया बॉन्ड उतनी ही रकम से घट जाते। पूरी रकम पुराने बॉन्ड चुकाने में लगती, तभी ऐसा संभव होता। नेटवर्क निर्माण पर खर्च होती, तो लाभ उन नए बॉन्ड के रूप में होता जिन्हें शायद जारी न करना पड़ता। केप्को का कुल कर्ज, बकाया बॉन्ड की रकम के बराबर नहीं है।
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बैंक ऋण या अल्पकालिक वाणिज्यिक पत्र से नकदी मिल सकती है, लेकिन उन्हें भी चुकाना होगा। बॉन्ड सीमा बढ़ाने से उधार लेने की गुंजाइश बनी रहेगी, पर दरों और लागत का अंतर नहीं मिटेगा। सरकार पूँजी भी लगा सकती है: सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्तावित 2027 बजट में केप्को के लिए 500 अरब वॉन का नकद निवेश शामिल था, जबकि अतिरिक्त पूँजी जुटाने और बॉन्ड जारी करने पर चर्चा चल रही थी।
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अग्रिम भुगतान से निर्माण जल्दी शुरू करने में मदद मिल सकती थी, पर उससे ग्रिड कनेक्शन की तारीख की गारंटी या भविष्य के सारे खर्चों का इंतजाम नहीं होता। यह मूलतः आने वाले वर्षों की आमदनी आज लेने का रास्ता था—वह भी ब्याज की लागत के साथ। केप्को की बड़ी चुनौती अब भी वही है: नया बिजली नेटवर्क कैसे बनाया जाए और बिजली आपूर्ति की लागत कैसे पूरी वसूली जाए।
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