उधर स्मार्टफोन उद्योग में दूसरे जरूरी कंपोनेंट्स की कीमतें भी बढ़ रही हैं। खासकर DRAM और NAND मेमोरी की लागत बढ़ने की रिपोर्ट है, जिसका कारण आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा‑सेंटर हार्डवेयर की बढ़ती मांग बताई जाती है।
ऐसे में सस्ती डिस्प्ले Samsung को Galaxy S27 के बेस मॉडल की कुल लागत संतुलित रखने में मदद कर सकती है।
अगर Samsung BOE को मंजूरी देता है, तो सबसे संभावित मॉडल डुअल‑सोर्सिंग होगा—यानी दो सप्लायर एक साथ।
रिपोर्ट्स यह भी बताती हैं कि Samsung ने अभी BOE को अंतिम उत्पादन ऑर्डर नहीं दिया है। कंपनी फिलहाल सैंपल टेस्टिंग और गुणवत्ता मूल्यांकन कर रही है।
BOE पिछले कई वर्षों से प्रीमियम स्मार्टफोन ब्रांड्स की सप्लाई‑चेन में जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। आज यह दुनिया के बड़े OLED पैनल निर्माताओं में से एक है और कई प्रमुख कंपनियों को डिस्प्ले सप्लाई कर चुका है।
उदाहरण के तौर पर, Apple भी कुछ iPhone मॉडलों में BOE को सेकेंडरी OLED सप्लायर के रूप में इस्तेमाल कर चुका है, जबकि मुख्य सप्लायर अब भी Samsung Display ही रहा है।
हालांकि BOE का रिकॉर्ड पूरी तरह स्थिर नहीं रहा। 2026 की शुरुआत में रिपोर्ट आई कि उत्पादन गुणवत्ता (yield) समस्याओं के कारण Apple ने iPhone OLED के कुछ ऑर्डर वापस Samsung Display को दे दिए।
इसी वजह से Samsung संभवतः BOE को फ्लैगशिप डिवाइस में इस्तेमाल करने से पहले कड़े गुणवत्ता परीक्षण करेगा।
अगर BOE अंततः Galaxy S27 के लिए पैनल सप्लाई करता है, तो यह Samsung की फ्लैगशिप डिस्प्ले रणनीति में एक उल्लेखनीय बदलाव होगा। अब तक Galaxy S सीरीज़ लगभग पूरी तरह Samsung Display के पैनलों पर निर्भर रही है, जिन्हें उद्योग में सबसे बेहतरीन OLED में गिना जाता है।
दूसरे सप्लायर को शामिल करने से Samsung को कई फायदे मिल सकते हैं:
यह बदलाव जरूरी नहीं कि Samsung Display की भूमिका कम होने का संकेत हो। बल्कि यह स्मार्टफोन उद्योग की एक व्यापक प्रवृत्ति दिखाता है—जहां कंपनियां प्रदर्शन, कीमत और सप्लाई‑सुरक्षा के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करती हैं।
फिलहाल यह योजना अभी मूल्यांकन के चरण में है। अगर इसे लागू किया जाता है, तो संभावित प्रभाव कुछ इस तरह हो सकते हैं:
सरल शब्दों में, यह बदलाव तकनीक बदलने से ज्यादा लागत और सप्लाई‑चेन प्रबंधन से जुड़ा हुआ कदम माना जा रहा है।
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