ताइवान सरकार ने इस आरोप को सख्ती से खारिज किया है। अधिकारियों का कहना है कि देश का सेमीकंडक्टर उद्योग दशकों के निवेश, औद्योगिक नीति और निजी कंपनियों की नवाचार क्षमता से विकसित हुआ है।
आज ताइवान वैश्विक चिप उद्योग का केंद्र बन चुका है। दुनिया के बड़ी मात्रा में सेमीकंडक्टर—और लगभग सभी अत्याधुनिक चिप—वहीं बनाए जाते हैं, जिनमें प्रमुख कंपनी Taiwan Semiconductor Manufacturing Company (TSMC) है।
ताइवान के अनुसार यह सफलता किसी “चोरी” का परिणाम नहीं बल्कि लंबे समय की तकनीकी रणनीति का नतीजा है।
ट्रम्प की टिप्पणियों का सबसे तत्काल प्रभाव यह हो सकता है कि ताइवानी कंपनियों पर अमेरिका में अधिक उत्पादन स्थापित करने का राजनीतिक दबाव बढ़े।
TSMC पहले ही अमेरिका में बड़े निवेश की घोषणा कर चुका है। 2025 में कंपनी ने अमेरिकी सेमीकंडक्टर सुविधाओं में अतिरिक्त 100 अरब डॉलर निवेश का वादा किया, जिससे उसका कुल नियोजित निवेश लगभग 165 अरब डॉलर तक पहुँच गया—जिसमें एरिज़ोना में नई फैब्रिकेशन फैक्ट्रियाँ, उन्नत पैकेजिंग सुविधाएँ और अनुसंधान केंद्र शामिल हैं।
कंपनी के नेतृत्व ने कहा है कि यह निवेश मुख्य रूप से ग्राहकों की मांग के कारण है और इससे ताइवान में उसकी मूल गतिविधियों पर असर नहीं पड़ेगा।
फिर भी राजनीतिक माहौल कंपनियों के लिए गणित बदल सकता है:
TSMC के अलावा ताइवान के कई छोटे आपूर्तिकर्ता—जैसे उपकरण निर्माता और पैकेजिंग कंपनियाँ—भी अमेरिका के नए चिप हब में अपने ग्राहकों का पीछा करने के दबाव में आ सकते हैं।
कड़े बयानबाज़ी के बावजूद दोनों देशों के बीच सेमीकंडक्टर सहयोग टूटने की संभावना कम है। वैश्विक चिप सप्लाई‑चेन में अमेरिका और ताइवान गहराई से एक‑दूसरे पर निर्भर हैं।
फिर भी संबंधों का स्वर बदल सकता है:
ज्यादा लेन‑देन आधारित नीति: निवेश, टैरिफ या रक्षा राजनीति के साथ तकनीकी सहयोग को जोड़ा जा सकता है।
सप्लाई‑चेन विविधीकरण: अमेरिका लंबे समय से घरेलू चिप उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रहा है ताकि ताइवान पर निर्भरता कम हो।
भू‑राजनीतिक संवेदनशीलता: यदि चिप नीति अमेरिका‑चीन वार्ता से जुड़ती है, तो दोनों बाजारों में काम करने वाली कंपनियों के लिए अनिश्चितता बढ़ सकती है।
ताइवान की चिप कंपनियों के लिए सबसे संभावित रास्ता पूर्ण स्थानांतरण नहीं बल्कि विविधीकरण है।
संभावना है कि कंपनियाँ:
दूसरे शब्दों में, ट्रम्प की बयानबाज़ी से ताइवान का चिप प्रभुत्व तुरंत खत्म होने वाला नहीं है। लेकिन यह जरूर दिखाता है कि सेमीकंडक्टर—जो कभी सिर्फ औद्योगिक क्षेत्र का विषय थे—अब वैश्विक राजनीति और राष्ट्रीय सुरक्षा के केंद्र में आ चुके हैं।
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