क्योंकि ये परियोजनाएँ लंबी अवधि की हैं, इसलिए माना जा रहा है कि 2020 के दशक के अंत तक तांबे की मांग लगातार मजबूत रहेगी।
इलेक्ट्रिक कारों में पारंपरिक पेट्रोल या डीज़ल कारों की तुलना में काफी अधिक तांबा इस्तेमाल होता है। मोटर, बैटरी, वायरिंग और चार्जिंग सिस्टम—सबमें तांबा अहम धातु है। इसलिए जैसे‑जैसे EV अपनाने की रफ्तार बढ़ती है, तांबे की मांग भी बढ़ती जा रही है।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तेजी से विस्तार ने एक नया मांग स्रोत पैदा किया है। बड़े डेटा सेंटरों को भारी बिजली और कूलिंग सिस्टम की जरूरत होती है, जिनमें पावर डिस्ट्रीब्यूशन, कनेक्शन और उपकरणों में तांबा व्यापक रूप से इस्तेमाल होता है।
इन तीनों रुझानों को अक्सर विश्लेषक “संरचनात्मक मांग” कहते हैं—यानी ऐसी मांग जो केवल आर्थिक चक्रों पर नहीं बल्कि तकनीकी और ऊर्जा बदलाव पर आधारित होती है।
Cochilco ने पिछले साल के दौरान कई बार अपना 2026 का मूल्य अनुमान बढ़ाया है:
लगातार संशोधनों से संकेत मिलता है कि मांग उम्मीद से ज्यादा मजबूत है और आपूर्ति विस्तार उतना तेज़ नहीं हो रहा जितना पहले अनुमान लगाया गया था।
चिली दुनिया का सबसे बड़ा तांबा उत्पादक देश है और वैश्विक खनन उत्पादन का लगभग एक‑चौथाई हिस्सा देता है। इसलिए यहां उत्पादन में बदलाव का असर पूरी दुनिया पर पड़ता है।
Cochilco के अनुसार 2026 में चिली का तांबा उत्पादन लगभग 2% घटकर करीब 5.3 मिलियन मीट्रिक टन रह सकता है। इसके पीछे गिरती अयस्क गुणवत्ता और परिचालन चुनौतियां हैं।
कुछ संकेतक इस धीमेपन को दिखाते हैं:
कम अयस्क ग्रेड का मतलब है कि समान मात्रा में तांबा निकालने के लिए ज्यादा पत्थर को प्रोसेस करना पड़ता है—जिससे लागत बढ़ती है और उत्पादन धीमा हो जाता है।
चिली के अलावा भी विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक तांबा आपूर्ति मांग के साथ कदम मिलाने में संघर्ष कर सकती है। Cochilco के अनुमान के अनुसार 2025 में लगभग 124,000 मीट्रिक टन का परिष्कृत तांबा घाटा हो सकता है।
इस पृष्ठभूमि में कीमतें पहले ही ऐतिहासिक ऊंचाइयों के करीब पहुंच चुकी हैं। 2026 की शुरुआत में तांबे के फ्यूचर्स लगभग $6 प्रति पाउंड के आसपास कारोबार कर रहे थे।
हालांकि Cochilco का दृष्टिकोण काफी आशावादी है, लेकिन सभी बैंक और विश्लेषक इससे पूरी तरह सहमत नहीं हैं।
कुछ वित्तीय संस्थान मानते हैं कि बाजार तंग बना रहेगा, जबकि अन्य का कहना है कि वैश्विक आर्थिक जोखिम या भविष्य में नई आपूर्ति कीमतों को नीचे ला सकती है। उदाहरण के लिए J.P. Morgan ने चेतावनी दी है कि कमजोर वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में तांबे की कीमतें दबाव में आ सकती हैं।
इसी वजह से तांबे के बाजार को अक्सर “बुलिश लेकिन अस्थिर” कहा जाता है।
2026 के लिए $5.55 प्रति पाउंड का नया अनुमान दिखाता है कि तांबा बाजार गहरे संरचनात्मक बदलाव से गुजर रहा है। ऊर्जा संक्रमण, इलेक्ट्रिक वाहन और AI इंफ्रास्ट्रक्चर मांग को तेज़ी से बढ़ा रहे हैं, जबकि चिली समेत कई जगहों पर उत्पादन सीमित है।
अगर ये रुझान जारी रहते हैं, तो आने वाले वर्षों में तांबा ऊर्जा‑परिवर्तन युग की सबसे रणनीतिक और महत्वपूर्ण धातुओं में से एक बना रह सकता है।
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