AI डेटा सेंटर की चर्चा में अक्सर निवेश और इमारतों पर ध्यान जाता है। विश्व बैंक समूह के अध्यक्ष अजय बंगा का ज़ोर उस बुनियादी सवाल पर है जिसके बिना ये सुविधाएँ चल ही नहीं सकतीं: लगातार उपलब्ध, बड़ी मात्रा में बिजली कहाँ से आएगी? न्यूयॉर्क में क्लाइमेट वीक के दौरान ब्लूमबर्ग ग्रीन की एक चर्चा में उन्होंने कहा कि उभरते बाज़ारों में डेटा सेंटर अभी कम हैं और उनके बड़े पैमाने पर फैलने की संभावना भी कम है। उनके मुताबिक, AI को बहुत अधिक कंप्यूटिंग क्षमता और बिजली चाहिए। विश्व बैंक की एक पूर्व चर्चा में उन्होंने डेटा और उसके साथ काम कर सकने वाले लोगों को भी ज़रूरी बताया था।
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बिजली की मांग कितनी बढ़ सकती है?
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) के केंद्रीय अनुमान के अनुसार, दुनिया के सभी डेटा सेंटर 2025 के लगभग 485 टेरावाट-घंटे (TWh) से बढ़कर 2030 में करीब 950 TWh बिजली इस्तेमाल कर सकते हैं। यह 2030 की अनुमानित वैश्विक बिजली मांग का लगभग 3% होगा। यह सिर्फ़ AI की बिजली खपत का अनुमान नहीं है: इसमें दूसरे डिजिटल कामों के लिए इस्तेमाल होने वाले डेटा सेंटर भी शामिल हैं। एजेंसी AI को इस बढ़ोतरी का सबसे प्रमुख कारण मानती है।
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मौजूदा खपत भी कुछ क्षेत्रों में सिमटी है। 2024 में डेटा सेंटर की वैश्विक बिजली खपत में अमेरिका की हिस्सेदारी 45%, चीन की 25% और यूरोप की 15% थी—तीनों की मिलाकर 85%। हालांकि, इससे यह तय नहीं होता कि 2030 तक बनने वाले नए डेटा सेंटर भी ठीक इसी अनुपात में बँटेंगे।
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क्या उभरते बाज़ारों में डेटा सेंटर बनेंगे ही नहीं?
बंगा की बात को पूर्ण प्रतिबंध या हर देश के लिए एक जैसी भविष्यवाणी नहीं समझना चाहिए। ब्लूमबर्ग ने अफ्रीका में डेटा सेंटर उद्योग के विस्तार की जानकारी दी है, लेकिन वहाँ भरोसेमंद बिजली को सबसे बड़ी चुनौती भी बताया है। मुद्दा अलग-अलग परियोजनाओं के बनने का नहीं, व्यापक स्तर पर विस्तार की संभावना का है।
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डिजिटल खाई और बिजली की प्राथमिकता
अगर नई कंप्यूटिंग क्षमता उन जगहों पर केंद्रित रहती है जहाँ बिजली आपूर्ति और तकनीकी व्यवस्था पहले से मज़बूत हैं, तो कमज़ोर बुनियादी ढांचे वाले देशों के लिए AI को स्थानीय स्तर पर विकसित करना और इस्तेमाल करना कठिन हो सकता है। जलवायु कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट अविश्वसनीय बिजली आपूर्ति, सीमित कंप्यूटिंग क्षमता और तकनीकी विशेषज्ञों की कमी को वंचित क्षेत्रों में बाधा बताती है। संयुक्त राष्ट्र की एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, AI क्षमता विकसित करने के लिए मिलने वाली वित्तीय मदद में भी बड़े भौगोलिक अंतर हैं।
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यही वजह है कि डेटा सेंटर कहाँ बने, यह ऊर्जा के साथ विकास की प्राथमिकताओं का भी सवाल है। क्लाइमेट वीक NYC के कार्यक्रम में कहा गया है कि बढ़ते डेटा सेंटर स्वच्छ और किफ़ायती बिजली के लिए उद्योग, परिवहन और शहरों से प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। बंगा की चिंता इसी चुनाव को सामने लाती है: जहाँ बिजली सीमित है, वहाँ AI सुविधा को आपूर्ति देने के साथ यह भी देखना होगा कि उसी बिजली से दूसरी कौन-सी ज़रूरतें पूरी हो सकती हैं।
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