इन दोनों सेक्टरों ने मिलकर यूरोप के प्रमुख स्टॉक इंडेक्स की कमाई में तेजी लाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
सिटी का व्यापक दृष्टिकोण अभी भी अपेक्षाकृत सकारात्मक है। बैंक के विश्लेषण के अनुसार यदि कमाई की उम्मीदें कायम रहती हैं तो वैश्विक शेयर बाज़ारों में लगभग 5% तक अतिरिक्त बढ़त की संभावना हो सकती है।
इसका मतलब यह है कि मौजूदा बाजार तेजी केवल वैल्यूएशन के बढ़ने से नहीं, बल्कि असली मुनाफे की वृद्धि से समर्थित हो सकती है। अगर कंपनियों की कमाई बढ़ती रहती है, तो ऊँची ब्याज दरों के बावजूद शेयर कीमतें आगे बढ़ सकती हैं।
हाल की बॉन्ड उथल‑पुथल के पीछे कई व्यापक कारण हैं। प्रमुख वजहों में शामिल हैं:
इन कारणों से निवेशकों को डर है कि केंद्रीय बैंक ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची रख सकते हैं। नतीजतन, सरकारी बॉन्ड बिक रहे हैं और उनकी यील्ड बढ़ रही है।
हालाँकि कमाई का आउटलुक मजबूत है, लेकिन इसमें एक कमजोरी भी छिपी है। वर्तमान में यूरोप में मुनाफे की वृद्धि मुख्य रूप से ऊर्जा और वित्तीय सेक्टरों में केंद्रित है, पूरे बाजार में समान रूप से नहीं फैली है।
कुछ अनुमानों के अनुसार अगर ऊर्जा सेक्टर को निकाल दिया जाए तो कई यूरोपीय कंपनियों की कमाई वृद्धि काफी कमजोर दिखती है।
इसका मतलब है कि बाजार की मजबूती अभी सीमित नेतृत्व (narrow leadership) पर निर्भर है। यदि तेल कीमतें गिरती हैं या बैंकिंग सेक्टर की गति धीमी होती है, तो शेयर बाजार का सहारा कमजोर पड़ सकता है。
आज का बाजार माहौल निवेशकों के लिए एक महत्वपूर्ण संतुलन दिखाता है। एक तरफ बढ़ती बॉन्ड यील्ड्स शेयरों की वैल्यूएशन पर दबाव डालती हैं। दूसरी तरफ मजबूत कॉर्पोरेट कमाई उस दबाव को कम कर सकती है।
फिलहाल यूरोपीय शेयरों को बेहतर मुनाफे की उम्मीदों का सहारा मिल रहा है। लेकिन यह मजबूती कितनी टिकाऊ होगी, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि:
यदि कमाई की रफ्तार बनी रहती है, तो ऊँची यील्ड्स के बावजूद यूरोपीय शेयर स्थिर रह सकते हैं। लेकिन अगर मुनाफे की वृद्धि धीमी पड़ी, तो बॉन्ड मार्केट का दबाव अंततः इक्विटी बाजारों पर हावी हो सकता है।
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