विश्व बैंक ने 2026 में विकासशील पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र की आर्थिक वृद्धि का अनुमान 4.2% से बढ़ाकर 4.5% कर दिया है। इसकी मुख्य वजह वैश्विक एआई उछाल से जुड़े उच्च-तकनीकी उत्पादों का मजबूत निर्यात और निवेश है। 2027 के लिए बैंक का अनुमान 4.4% है। हालांकि, इस तेजी का लाभ पूरे क्षेत्र में बराबर नहीं बंट रहा: एआई आपूर्ति श्रृंखलाओं से जुड़ी अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा मिल रहा है, जबकि कुछ अन्य जगहों पर महंगी ऊर्जा विकास पर दबाव डाल रही है।
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अनुमान क्यों बढ़ा?
एआई तकनीक के लिए चिप, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे उच्च-तकनीकी सामान बनाने और निर्यात करने वाले देशों को वैश्विक मांग से फायदा हुआ है। एआई से जुड़ी गतिविधियों में बढ़ते निवेश ने भी क्षेत्र की कुछ अर्थव्यवस्थाओं की वृद्धि को पहले के अनुमान से ज्यादा सहारा दिया।
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लेकिन एआई से जुड़े उत्पाद बनाना और देश के भीतर कारोबारों में एआई का इस्तेमाल बढ़ाना एक ही बात नहीं है। विश्व बैंक के मुताबिक, पूर्वी एशिया और प्रशांत क्षेत्र में लोगों और कंपनियों के बीच एआई का उपयोग बढ़ रहा है, फिर भी यह उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के स्तर से नीचे है।
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अलग-अलग देशों की तस्वीर
- वियतनाम: 2026 में वृद्धि का अनुमान 7.4% है—पहले के अनुमान से 1.1 प्रतिशत अंक अधिक। देश एआई से जुड़े उत्पादों के प्रमुख निर्यातकों में है।
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- मलेशिया: 2026 का अनुमान 4.4% से बढ़ाकर 5.1% किया गया है। एआई उत्पादों का निर्यात और निवेश इस सुधार के पीछे हैं; लेकिन इससे वैश्विक तकनीकी मांग कमजोर पड़ने पर जोखिम भी बढ़ता है।
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- थाईलैंड: 2026 में 2.0% वृद्धि का अनुमान है। एआई से जुड़े निर्यात और निवेश सहारा दे रहे हैं, लेकिन ऊंची ऊर्जा लागत और पर्यटन तथा व्यापार में व्यवधान परिदृश्य को कमजोर करते हैं।
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- चीन: अक्टूबर के अपडेट के लिए उपलब्ध स्रोत चीन का ऐसा संशोधित 2026 अनुमान नहीं देते जिसकी यहां भरोसेमंद तुलना की जा सके। इसलिए कोई निश्चित नया आंकड़ा देना उचित नहीं होगा।
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- प्रशांत द्वीपीय अर्थव्यवस्थाएं: महंगी ऊर्जा के कारण इनका परिदृश्य कमजोर है। एक रिपोर्ट में 2026 की वृद्धि का अनुमान 2.2% दिया गया है, जो पहले के अनुमान से कम है।
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बढ़त के साथ कौन-से जोखिम जुड़े हैं?
एआई की वैश्विक मांग पर निर्भरता। जब निर्यात और निवेश का बड़ा हिस्सा एआई से जुड़े सामान पर टिका हो, तो वैश्विक तकनीकी खर्च में गिरावट का असर उत्पादन, निर्यात और निवेश पर पड़ सकता है। विश्व बैंक इस तेजी को अवसर मानता है, लेकिन इसे स्थायी या जोखिम-मुक्त वृद्धि की गारंटी नहीं बताता।
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ऊर्जा की कीमत और सरकारी खर्च। महंगी ऊर्जा का असर खास तौर पर प्रशांत द्वीपीय अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। ईंधन की कीमतों का बोझ कम करने के लिए सरकारें सब्सिडी दे सकती हैं, मगर इससे सार्वजनिक वित्त और बाहरी आर्थिक सुरक्षा पर दबाव बढ़ सकता है। सब्सिडी आयातित ऊर्जा की मूल लागत को खत्म नहीं करती।
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निर्यात और घरेलू उपयोग के बीच अंतर। एआई से जुड़े सामान का निर्यात अपने-आप स्थानीय कंपनियों की उत्पादकता नहीं बढ़ाता। क्षेत्र में एआई का इस्तेमाल बढ़ रहा है, लेकिन उन्नत अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले अभी कम है—इसलिए निर्यात उद्योगों से आगे इसके लाभ फैलाने की गुंजाइश बनी हुई है।
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विश्व बैंक किस दिशा में जोर दे रहा है?
चुनौती यह है कि बाहरी मांग से मिली मौजूदा बढ़त को व्यापक और टिकाऊ घरेलू विकास में बदला जाए। इसके लिए विश्व बैंक भरोसेमंद ऊर्जा और डिजिटल बुनियादी ढांचे, बेहतर कौशल और एआई औजारों तक व्यापक पहुंच की जरूरत बताता है। वह “Small AI”—ऐसे अपेक्षाकृत सुलभ औजार जिन्हें कंपनियां खास कामों के लिए अपना सकें—को कई अर्थव्यवस्थाओं के लिए व्यावहारिक रास्ता मानता है।
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इसका मकसद केवल एआई आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए सामान बनाना नहीं, बल्कि स्थानीय कारोबारों को भी एआई से उत्पादकता के लाभ दिलाना है। साथ ही, इससे कुछ गिने-चुने एआई-संबंधी निर्यात और निवेश पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।