ट्रेजरी की बढ़ी हुई खरीद ने लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड घटाई, जिससे डॉलर वाली परिसंपत्तियों का रिटर्न आकर्षण कम हुआ। 9 सितंबर से 10–20 वर्ष और 20–30 वर्ष वाले बॉन्ड में प्रति ऑपरेशन खरीद की सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़कर कम से कम 4 अरब डॉलर होगी; यह व्यवस्था 4 नवंबर 2026 तक चलेगी। [1] घोषणा के बाद 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड...
शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Why did the US dollar fall to a three-month low and head for a nearly 1% weekly decline despite the Treasury Department doubling its purchas. Article summary: The dollar fell because the buybacks lowered Treasury yields—and therefore the dollar’s interest-rate support—while also being read as a signal that policymakers were intervening to contain a deeper fiscal and long-durat. Topic tags: general, government, news, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with
पहली नजर में यह उलटा लग सकता है कि अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड खरीद रहा है, फिर भी डॉलर कमजोर हो रहा है। इसका जवाब बाजार के उस रास्ते में छिपा है, जिससे यह कदम असर डालता है: ट्रेजरी की खरीद ने बॉन्ड की मांग और कीमतें बढ़ाईं, यील्ड घटाई और डॉलर को मिलने वाला ब्याज-दर समर्थन कमजोर कर दिया। यानी बॉन्ड बाजार को तत्काल राहत मिली, लेकिन डॉलर पर दबाव आया।
9 सितंबर से अमेरिकी ट्रेजरी लंबी अवधि के नॉमिनल कूपन सिक्योरिटीज—यानी 10 से 20 वर्ष और 20 से 30 वर्ष की परिपक्वता वाले सरकारी बॉन्ड—के लिए लिक्विडिटी-सपोर्ट बायबैक ऑपरेशन का आकार बढ़ाएगा। प्रति ऑपरेशन मौजूदा 2 अरब डॉलर की अधिकतम सीमा बढ़कर कम-से-कम 4 अरब डॉलर हो जाएगी। यह बदलाव 4 नवंबर 2026 तक, यानी मौजूदा रिफंडिंग तिमाही के अंत तक लागू रहेगा।
इन ऑपरेशनों का उद्देश्य लंबी अवधि के ट्रेजरी बॉन्ड में कारोबार और लिक्विडिटी को बेहतर करना है। यह बाजार से सरकारी कर्ज को असीमित रूप से हटाने वाला कोई व्यापक कार्यक्रम नहीं है। रिपोर्टों के अनुसार, मौजूदा तिमाही में अतिरिक्त खरीद कम-से-कम 14 अरब डॉलर की होगी—पूरे ट्रेजरी बाजार के आकार की तुलना में यह अपेक्षाकृत छोटा हस्तक्षेप है।
बॉन्ड की कीमत और यील्ड आम तौर पर विपरीत दिशा में चलती हैं। जब ट्रेजरी बॉन्ड खरीदता है, तो बाजार में एक अतिरिक्त खरीदार आ जाता है। इससे बॉन्ड की कीमत ऊपर जाती है और यील्ड नीचे आती है। घोषणा के तुरंत बाद यही हुआ: 30-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड लगभग 10 बेसिस पॉइंट गिरकर 5.188% हुई, हालांकि बाद में यह करीब 5.208% तक लौट आई।
लंबी अवधि की यील्ड कम होने पर डॉलर में निवेश किए गए फिक्स्ड-इनकम एसेट्स से मिलने वाला अपेक्षित रिटर्न घट सकता है। इससे डॉलर रखने का लाभ दूसरे विकल्पों की तुलना में कम हो जाता है और निवेशकों की डॉलर की मांग कमजोर पड़ सकती है। यही डॉलर गिरने का सीधा ब्याज-दर वाला रास्ता है।
घोषणा के बाद ट्रेजरी यील्ड में गिरावट के साथ डॉलर तीन महीने से अधिक के निचले स्तर पर पहुंच गया।
बायबैक ने बॉन्ड बाजार को अल्पकालिक राहत दी, लेकिन इसने उस समस्या को भी उजागर कर दिया जिसे ट्रेजरी संभालने की कोशिश कर रहा था—लंबी अवधि के कर्ज की बढ़ती लागत और बाजार के ‘लॉन्ग एंड’ में कमजोर लिक्विडिटी। इसलिए यह घोषणा निवेशकों के लिए मिला-जुला संकेत बनी।
एक नजरिए से देखें तो ट्रेजरी की मजबूत मांग बॉन्ड कीमतों को स्थिर कर सकती है और बाजार में अव्यवस्था घटा सकती है। दूसरी ओर, असामान्य और सीमित अवधि वाला हस्तक्षेप यह संकेत दे सकता है कि निजी निवेशकों की लंबी अवधि के अमेरिकी कर्ज में मांग इतनी मजबूत नहीं है कि यील्ड को अपने दम पर नीचे रख सके। रिफंडिंग तिमाही के शेष हिस्से तक ही चलने वाला यह कार्यक्रम स्थायी मांग के स्रोत के रूप में भी सीमित विश्वसनीयता रखता है।
विदेशी मुद्रा बाजार के लिए यह अंतर महत्वपूर्ण है। यदि ट्रेजरी बॉन्ड की मांग में स्थायी सुधार दिखता, तो अमेरिकी बाजारों पर भरोसा बढ़ने से डॉलर मजबूत हो सकता था। लेकिन ऐसा अस्थायी कदम, जो यील्ड को कुछ समय के लिए दबाता है, डॉलर को तुरंत कमजोर कर सकता है—खासकर तब, जब लंबी अवधि के राजकोषीय और कर्ज-संबंधी सवाल अनसुलझे रहें।
लंबी अवधि के बॉन्ड की शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक रही। यील्ड कई वर्षों के ऊंचे स्तरों से तेजी से नीचे आई। रॉयटर्स के अनुसार, ट्रेजरी की घोषणा के बाद 30-वर्षीय यील्ड लगभग 19 साल के उच्च स्तर से नीचे आई।
बाजार का संदेश इस तरह समझा जा सकता है:
डॉलर की व्यापक कमजोरी से यूरो को भी फायदा हुआ। यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) की 20 अगस्त की संदर्भ दर में 1 यूरो का मूल्य 1.1681 अमेरिकी डॉलर था।
यूरो को यूरोप से मिला एक अलग नीतिगत समर्थन भी था। यूरो क्षेत्र की महंगाई जुलाई में बढ़कर 2.9% हो गई, जो जून में 2.8% थी। रॉयटर्स के मुताबिक, इससे ECB की एक और ब्याज-दर बढ़ोतरी की संभावना मजबूत हुई। महंगाई बढ़ने पर मुद्रा को समर्थन मिल सकता है, यदि बाजार को लगता है कि केंद्रीय बैंक ब्याज-दरें ऊंची रखेगा या उन्हें और बढ़ाएगा।
इसलिए यूरो की मजबूती को केवल ट्रेजरी बायबैक से जोड़ना सही नहीं होगा। इसमें अमेरिकी यील्ड सपोर्ट की कमजोरी और यूरोपीय ब्याज-दर रुख के अपेक्षाकृत कम नरम रहने, दोनों की भूमिका थी।
डॉलर की व्यापक कमजोरी से ब्रिटिश पाउंड को भी लाभ मिला। हालांकि उपलब्ध साक्ष्य यह साबित नहीं करते कि पाउंड की चाल अकेले ट्रेजरी घोषणा के कारण थी। जब विनिमय दर डॉलर के मुकाबले बताई जाती है, तो डॉलर गिरने पर अन्य प्रमुख मुद्राओं को यांत्रिक रूप से बढ़त मिल सकती है।
सोने के मामले में ब्याज-दर का तर्क अधिक स्पष्ट है। कम नाममात्र यील्ड से ब्याज न देने वाली परिसंपत्ति, जैसे सोना, रखने की अवसर लागत घटती है। कमजोर डॉलर से गैर-डॉलर निवेशकों के लिए सोना अपेक्षाकृत सस्ता भी हो सकता है। ये परिस्थितियां सोने की मांग को सहारा दे सकती हैं, लेकिन सोने की किसी भी चाल का पूरा कारण केवल बायबैक को नहीं माना जा सकता।
बिटकॉइन की तेजी भी कम यील्ड, अधिक लिक्विडिटी की उम्मीद और पारंपरिक सरकारी कर्ज के विकल्प मानी जाने वाली परिसंपत्तियों की मांग वाली व्यापक कहानी से मेल खाती है। फिर भी बिटकॉइन प्रमुख मुद्राओं या सरकारी बॉन्ड की तुलना में काफी अधिक अस्थिर है। इसलिए उसके साप्ताहिक प्रदर्शन का श्रेय अकेले ट्रेजरी बायबैक को नहीं दिया जा सकता।
ट्रेजरी का फैसला सबसे पहले बॉन्ड बाजार को समर्थन देने का कदम था, लेकिन निवेशकों ने इसके असर और सीमाओं को जिस तरह देखा, उससे यह डॉलर के लिए नकारात्मक बन गया। लंबी अवधि के ट्रेजरी बॉन्ड की मांग बढ़ी, यील्ड नीचे आई और डॉलर का ब्याज-दर लाभ कम हुआ। साथ ही, कार्यक्रम का सीमित आकार और तय समाप्ति-तिथि यह संकेत देती रही कि यह दीर्घकालिक समाधान नहीं, बल्कि अस्थायी राहत है।
संक्षेप में, निवेशकों ने बायबैक को राहत और चेतावनी—दोनों के रूप में देखा। इससे ट्रेजरी की कीमतों को तत्काल सहारा मिला, लेकिन हस्तक्षेप की जरूरत ने उस तनाव को भी रेखांकित किया जिसने लंबी अवधि के कर्ज की मांग को कमजोर किया था। यही वजह है कि ट्रेजरी बॉन्ड चढ़े, जबकि डॉलर गिर गया।
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ट्रेजरी की बढ़ी हुई खरीद ने लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड घटाई, जिससे डॉलर वाली परिसंपत्तियों का रिटर्न आकर्षण कम हुआ।
ट्रेजरी की बढ़ी हुई खरीद ने लंबी अवधि के बॉन्ड की यील्ड घटाई, जिससे डॉलर वाली परिसंपत्तियों का रिटर्न आकर्षण कम हुआ। 9 सितंबर से 10–20 वर्ष और 20–30 वर्ष वाले बॉन्ड में प्रति ऑपरेशन खरीद की सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़कर कम से कम 4 अरब डॉलर होगी; यह व्यवस्था 4 नवंबर 2026 तक चलेगी। [1]
घोषणा के बाद 30 वर्षीय ट्रेजरी यील्ड लगभग 10 बेसिस पॉइंट घटकर 5.188% हुई, जबकि डॉलर तीन महीने से अधिक के निचले स्तर पर पहुंच गया। [3][7]