इसी बीच, सरकारी कंपनी अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) ने उत्पादन क्षमता और बढ़ाने के लिए बड़े निवेश किए हैं। लक्ष्य है कि 2027 तक क्षमता लगभग 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक पहुंच जाए।
OPEC के भीतर रहते हुए इन निवेशों का पूरा फायदा उठाना मुश्किल था। संगठन से बाहर आने के बाद यूएई अपने आर्थिक हितों और बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन तय कर सकता है।
हालांकि आधिकारिक घोषणा अप्रैल 2026 में हुई, लेकिन विश्लेषकों के अनुसार यह निर्णय लंबे समय से तैयार हो रहा था। उत्पादन आधार (baseline) और कोटा को लेकर विवाद कई वर्षों से जारी थे।
यूएई का तर्क था कि उसके लिए तय कोटा उसकी नई उत्पादन क्षमता और निवेश को सही तरह से प्रतिबिंबित नहीं करता। जैसे‑जैसे देश ने अपनी क्षमता बढ़ाई, वैसे‑वैसे उस क्षमता और OPEC की अनुमति के बीच अंतर भी बढ़ता गया।
इसलिए विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम अचानक भू‑राजनीतिक बदलाव नहीं बल्कि यूएई की ऊर्जा नीति के पुनर्मूल्यांकन का परिणाम है।
OPEC से बाहर निकलने के पीछे यूएई की व्यापक आर्थिक और ऊर्जा रणनीति भी जुड़ी हुई है।
अब OPEC के कोटा से मुक्त होकर यूएई अपनी क्षमता के करीब उत्पादन बढ़ा सकता है—यानी लगभग 4.8 से 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन तक।
सरकार ने संकेत दिया है कि उत्पादन वृद्धि धीरे‑धीरे होगी और इसे वैश्विक मांग तथा बाज़ार स्थिरता के अनुसार समायोजित किया जाएगा।
ऊर्जा परिवर्तन (energy transition) के दौर में भविष्य में तेल की मांग की वृद्धि धीमी पड़ सकती है। ऐसे में कई उत्पादक देश मानते हैं कि जब तक मांग मजबूत है तब तक अधिक उत्पादन करना आर्थिक रूप से लाभदायक हो सकता है।
यूएई भी इसी रणनीति के तहत अपने तेल भंडार का मूल्य जल्द हासिल करना चाहता है।
यूएई सरकार ने कहा है कि यह फैसला देश की दीर्घकालिक आर्थिक दृष्टि और बदलती ऊर्जा क्षमताओं के अनुरूप है। अधिक नियंत्रण मिलने से तेल नीति को राष्ट्रीय निवेश योजनाओं और आर्थिक विविधीकरण (diversification) के साथ बेहतर ढंग से जोड़ा जा सकेगा।
यूएई का बाहर निकलना OPEC के लिए प्रतीकात्मक और व्यावहारिक दोनों दृष्टि से बड़ा झटका माना जा रहा है। यह संगठन के सबसे बड़े और तकनीकी रूप से उन्नत उत्पादकों में से एक था।
जब इतने बड़े उत्पादक संगठन के कोटा सिस्टम से बाहर काम करेंगे, तो वैश्विक आपूर्ति को नियंत्रित करने की OPEC की क्षमता कुछ हद तक कमजोर हो सकती है।
कम अवधि में कीमतों पर असर स्पष्ट नहीं है। उत्पादन बढ़ोतरी कई कारकों पर निर्भर करेगी—जैसे निर्यात ढांचा, वैश्विक मांग और क्षेत्रीय परिस्थितियां।
लेकिन लंबी अवधि में यदि यूएई OPEC की सीमाओं से बाहर जाकर उत्पादन बढ़ाता है, तो अतिरिक्त आपूर्ति वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों पर नीचे की ओर दबाव डाल सकती है।
यूएई की रणनीति का बड़ा हिस्सा यह है कि तेल से मिलने वाले राजस्व का उपयोग अर्थव्यवस्था को विविध बनाने में किया जाए। देश पहले से ही तकनीक, वित्त, पर्यटन और स्वच्छ ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में बड़े निवेश कर रहा है।
OPEC से बाहर निकलकर अबू धाबी को अपने संसाधनों के उपयोग के समय और मात्रा पर अधिक नियंत्रण मिल जाता है। बदले में वह OPEC द्वारा मिलने वाली कुछ कीमत स्थिरता छोड़कर अधिक राष्ट्रीय लचीलापन हासिल कर रहा है।
आखिरकार इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि यूएई उत्पादन कितनी तेजी से बढ़ाता है और क्या अन्य बड़े तेल उत्पादक OPEC की सामूहिक आपूर्ति नीति के प्रति प्रतिबद्ध बने रहते हैं।
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