सितंबर में फेड की दर वृद्धि की संभावना पहले से बाजार में काफी हद तक शामिल थी। इसलिए गिरती लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड, राजकोषीय जोखिमों और येन की तेज मजबूती ने डॉलर पर दबाव बनाया। अमेरिकी ट्रेजरी ने 10–20 और 20–30 वर्ष वाली कुछ प्रतिभूतियों के लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक की अधिकतम सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अर...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Why did the U.S. Dollar Index fall for a third consecutive session to below 98.70 and multi-week lows despite markets pricing roughly a 60%. Article summary: The dollar was falling because investors judged that the prospective Fed hike was already largely priced in, while the market’s bigger new message was lower long-end Treasury yields, fiscal-risk concerns, and a narrowing. Topic tags: general, news, general web, user generated, government. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermark
डॉलर किसी केंद्रीय बैंक की संभावित दर-वृद्धि के बावजूद भी गिर सकता है—खासकर तब, जब वह बढ़ोतरी बाजार पहले ही काफी हद तक कीमतों में शामिल कर चुका हो। डॉलर इंडेक्स के 98.70 से नीचे जाने के पीछे यही अहम वजह थी: निवेशक फेडरल रिजर्व की संभावित कार्रवाई से आगे बढ़कर लंबी अवधि की अमेरिकी यील्ड, राजकोषीय जोखिम और अन्य प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की मौद्रिक नीति को देख रहे थे।
नतीजा एक व्यापक मैक्रो ट्रेड के रूप में सामने आया: डॉलर की मांग घटी, येन-फंडेड कैरी ट्रेड खुलने लगे और सोने को डॉलर-मूल्यांकित एसेट तथा पोर्टफोलियो हेज—दोनों रूपों में समर्थन मिला।
मुद्रा बाजार में केवल दरों की दिशा नहीं, बल्कि उम्मीदों में बदलाव मायने रखता है। अगर निवेशक पहले से फेड की दर-वृद्धि की पर्याप्त संभावना मान चुके हैं, तो डॉलर को मजबूती के लिए उससे भी अधिक सख्त रुख का संकेत चाहिए—जैसे बढ़ोतरी की अधिक निश्चितता, आगे और बढ़ोतरी का संकेत, या दूसरे देशों की तुलना में अमेरिकी दरों का बड़ा लाभ।
यही वजह है कि अपेक्षा से बेहतर अमेरिकी रोजगार आंकड़े भी डॉलर को टिकाऊ सहारा नहीं दे पाए। बाजार का ध्यान एक बैठक से आगे, लंबी अवधि की यील्ड, सरकारी वित्त की स्थिति और दुनिया की अन्य केंद्रीय बैंकों की नीति-दिशा पर चला गया था। फेड बैठक से पहले की टिप्पणी में भी कहा गया कि मजबूत रोजगार वृद्धि के बाद डॉलर इंडेक्स अपने पुराने उच्च स्तर पर वापस नहीं जा सका। 23
19 अगस्त को अमेरिकी ट्रेजरी ने कहा कि वह 10–20 वर्ष और 20–30 वर्ष अवधि वाली नाममात्र कूपन प्रतिभूतियों के लिक्विडिटी-सपोर्ट बायबैक का अधिकतम आकार कम-से-कम दोगुना करेगी—प्रति ऑपरेशन 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम-से-कम 4 अरब डॉलर। यह बदलाव 9 सितंबर से 4 नवंबर तक लागू होना था। 50
ट्रेजरी ने इन्हें बाजार की तरलता सुधारने वाले ऑपरेशन बताया, न कि मौद्रिक नीति या फेड द्वारा नया पैसा बनाने की प्रक्रिया। फिर भी बाजार ने इसका तात्कालिक अर्थ लंबी अवधि के ट्रेजरी बॉन्ड के लिए अधिक खरीद समर्थन के रूप में लिया। घोषणा के बाद लंबी अवधि की यील्ड तेज़ी से गिरी; रॉयटर्स के अनुसार 30-वर्षीय यील्ड करीब 10 बेसिस पॉइंट घटी और 10-वर्षीय यील्ड भी नीचे आई। इसी के साथ डॉलर कमजोर हुआ। 36
यह मुद्रा के लिए क्यों मायने रखता है? ट्रेजरी यील्ड कम होने पर डॉलर एसेट रखने से मिलने वाला सापेक्ष रिटर्न घट सकता है। साथ ही, इस घोषणा ने अमेरिकी बजट घाटे, उधारी लागत और सरकारी वित्त की दीर्घकालिक स्थिरता पर बहस फिर तेज की। रॉयटर्स ने बताया कि इन चिंताओं ने तथाकथित “डिबेसमेंट ट्रेड”—यानी मुद्रा की क्रयशक्ति कमजोर पड़ने की आशंका में सोने और बिटकॉइन जैसे एसेट की खरीद—को हवा दी और डॉलर पर दबाव बढ़ाया। 33
हालांकि इसे संतुलित नजरिए से देखना जरूरी है। ट्रेजरी का बायबैक कार्यक्रम ऋण प्रबंधन और बाजार-तरलता का साधन है; केवल इसके आधार पर मुद्रा अवमूल्यन का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। बाजार की प्रतिक्रिया यील्ड और राजकोषीय जोखिम पर संभावित असर के आकलन को दर्शाती है, फेड के मौद्रिक ढांचे में किसी औपचारिक बदलाव को नहीं।
डॉलर इंडेक्स प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की चाल से प्रभावित होता है, और येन की मजबूती इसका बड़ा हिस्सा बनी। बैंक ऑफ जापान की दर-वृद्धि की उम्मीदों ने निवेशकों को येन-फंडेड कैरी ट्रेड बंद करने के लिए प्रेरित किया। ऐसे ट्रेड में निवेशक कम ब्याज वाले येन में उधार लेकर ज्यादा रिटर्न देने वाले एसेट खरीदते हैं; पोजीशन बंद करते समय उन्हें येन फिर से खरीदना पड़ता है।
USD/JPY 152.89 तक गिरा, जो फरवरी के बाद येन का डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत स्तर था। यह चाल 17–18 सितंबर की बैंक ऑफ जापान बैठक में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीदों के बीच आई। 26 अन्य बाजार रिपोर्टों में इस बढ़ोतरी की संभावना लगभग पूरी तरह कीमतों में शामिल बताई गई और गिरावट को कैरी ट्रेड खुलने से जोड़ा गया।
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इसलिए USD/JPY का 150 से नीचे जाना बाजार का एक संभावित परिदृश्य था, कोई निश्चित नतीजा नहीं। यह इस बात पर निर्भर करता कि बैंक ऑफ जापान बढ़ोतरी करता है या आगे भी नीति सामान्य करने का भरोसेमंद संकेत देता है। इसके उलट, सावधानी भरा रुख येन में मुनाफावसूली ला सकता था और डॉलर बिकवाली के एक अहम कारण को कम कर सकता था।
डॉलर को पहले अपेक्षाकृत ऊंची अमेरिकी यील्ड संरचना से सहारा मिला था। लेकिन जब दूसरे प्रमुख केंद्रीय बैंक भी सख्ती करने या दरों को ऊंचा बनाए रखने की दिशा में दिखते हैं, तब यह लाभ कम आकर्षक हो जाता है।
इस परिदृश्य में बैंक ऑफ जापान का संभावित अधिक सख्त रुख खास था, क्योंकि इसका असर येन की पोजीशनिंग पर सीधा पड़ता है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक को लेकर उम्मीदों ने भी इस व्यापक धारणा को मजबूत किया कि ब्याज दरों के मामले में अमेरिका की स्थिति अब उतनी असाधारण नहीं रही। विदेशी मुद्रा बाजार केवल फेड के अगले फैसले को नहीं, बल्कि देशों के बीच सापेक्ष नीतिगत रास्तों को कीमतों में शामिल करता है।
सोने की कीमत आम तौर पर डॉलर में तय होती है। इसलिए डॉलर कमजोर होने पर अन्य मुद्राओं वाले खरीदारों के लिए बुलियन अपेक्षाकृत सस्ता पड़ सकता है और मांग को समर्थन मिल सकता है। लेकिन यह तेजी केवल मुद्रा-आधारित गणित नहीं थी।
वास्तविक ब्याज दरों, राजकोषीय नीति और प्रतिकूल आर्थिक परिस्थितियों के जोखिम को लेकर चिंतित निवेशकों ने भी सोने को विविधीकरण के विकल्प के रूप में देखा। UBS ने सोने को केवल अगली फेड बैठक पर दांव लगाने का साधन नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो हेज और डाइवर्सिफायर बताया। 2
यह अंतर महत्वपूर्ण है। ऊंची मुद्रास्फीति का एक आंकड़ा या फेड का सख्त फैसला, यील्ड और डॉलर बढ़ाकर छोटी अवधि में सोने पर दबाव डाल सकता है। लेकिन सोने के व्यापक निवेश तर्क में रिजर्व विविधीकरण, निवेश प्रवाह और वित्तीय या भू-राजनीतिक झटकों से सुरक्षा की मांग जैसे कारक भी शामिल हैं।
पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने अगस्त में 6.5 लाख औंस सोना जोड़ा, जिससे उसका आधिकारिक स्वर्ण भंडार 7.673 करोड़ औंस हो गया। यह अक्टूबर 2023 के बाद सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी थी और लगातार खरीद का 22वां महीना रहा। 4
यह मात्रा लगभग 20 मीट्रिक टन है। 5 यह खरीद सोने की कीमतों में बढ़त की गारंटी नहीं देती और न ही बाजार के लिए कोई तय न्यूनतम स्तर बनाती है। फिर भी, तेज सोना रैली के बाद भी आधिकारिक क्षेत्र की निरंतर मांग का यह एक संकेत है। निवेशकों के लिए यह तर्क मजबूत होता है कि बुलियन की मांग का कुछ हिस्सा अल्पकालिक सट्टेबाजी के बजाय दीर्घकालिक रिजर्व विविधीकरण से आता है।
UBS का उस समय का 2027 की पहली छमाही के लिए 5,000 डॉलर प्रति औंस का लक्ष्य इसी दीर्घकालिक सोच पर आधारित था: वास्तविक दरों में गिरावट, कमजोर डॉलर और केंद्रीय बैंकों की लगातार मांग। 2 यह पूर्वानुमान है, वादा नहीं; इसकी वैधता आर्थिक परिस्थितियों और वास्तविक निवेश प्रवाह पर निर्भर करेगी।
तीन घटनाएं इस बाजार धारणा की परीक्षा लेने वाली थीं:
डॉलर इंडेक्स की गिरावट फेड की संभावित दर-वृद्धि को खारिज करने का संकेत नहीं थी। यह उन कारकों की नई कीमत-निर्धारण प्रक्रिया थी जिन्हें निवेशक अधिक अहम मान रहे थे: बायबैक घोषणा के बाद घटती लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड, राजकोषीय जोखिमों की चिंता और जापान व यूरोप के मुकाबले अमेरिकी नीति-अंतर का कम होना।
सोने को कमजोर डॉलर से अनुकूल माहौल मिला, जबकि राजकोषीय और विविधीकरण संबंधी चिंताओं ने हेज के रूप में उसकी भूमिका को मजबूत किया। यह रुझान टिकेगा या नहीं, इसका फैसला आने वाले मुद्रास्फीति आंकड़े और केंद्रीय बैंकों के निर्णय करेंगे—लेकिन इस घटनाक्रम ने दिखाया कि फेड का एक, और वह भी आंशिक रूप से पहले से अनुमानित, कदम डॉलर की दिशा तय करने के लिए पर्याप्त नहीं होता।
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सितंबर में फेड की दर वृद्धि की संभावना पहले से बाजार में काफी हद तक शामिल थी। इसलिए गिरती लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड, राजकोषीय जोखिमों और येन की तेज मजबूती ने डॉलर पर दबाव बनाया।
सितंबर में फेड की दर वृद्धि की संभावना पहले से बाजार में काफी हद तक शामिल थी। इसलिए गिरती लंबी अवधि की ट्रेजरी यील्ड, राजकोषीय जोखिमों और येन की तेज मजबूती ने डॉलर पर दबाव बनाया। अमेरिकी ट्रेजरी ने 10–20 और 20–30 वर्ष वाली कुछ प्रतिभूतियों के लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक की अधिकतम सीमा 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन करने की घोषणा की। इसके बाद लंबी अवधि की यील्ड गिरी और डॉलर...
सोने को केवल कमजोर डॉलर से नहीं, बल्कि पोर्टफोलियो हेज और विविधीकरण की मांग से भी समर्थन मिला। अगस्त में चीन के केंद्रीय बैंक की 6.5 लाख औंस खरीद अक्टूबर 2023 के बाद सबसे बड़ी मासिक बढ़ोतरी थी।