फ्रांस के प्रतिष्ठित साहित्यिक पुरस्कार गोंकूर की शुरुआती सूची में जगह बनाने के बाद हैती-कनाडाई लेखक थेलिसों ओरेलियन का पहला उपन्यास C’était ça ou mourir (अर्थात, ‘यही रास्ता था या मरना’) उससे बाहर हो गया। अकादमी गोंकूर ने २५ सितंबर २०२६ को यह फैसला सुनाया। वजह दो अलग-अलग मुद्दे थे: इस उपन्यास के लेखन में एआई के कथित इस्तेमाल की आशंका और लेखक के पहले प्रकाशित काम में साहित्यिक चोरी के आरोप। सूची से हटाए जाने का मतलब यह नहीं कि उपन्यास को एआई द्वारा लिखा जाना निर्णायक रूप से साबित हो गया है।
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अकादमी ने क्या कहा?
अकादमी के अनुसार, शोधकर्ताओं और पत्रकारों के कई विश्लेषण यह संकेत देते हैं कि उपन्यास संभवतः बड़े पैमाने पर एआई की मदद से तैयार हुआ। उसने लेखक के पुराने काम में हाल में सामने आए साहित्यिक चोरी के मामलों का भी हवाला दिया। अकादमी ने कहा कि वह पुरस्कार की विश्वसनीयता और मनुष्यों द्वारा लिखे साहित्य को सम्मानित करने के अपने उद्देश्य की रक्षा करना चाहती है। ये अकादमी के निष्कर्ष हैं; इनसे उपन्यास के लेखन की स्वतंत्र रूप से पुष्ट कहानी नहीं मिलती।
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फैसला इसलिए भी चर्चा में आया क्योंकि किताब सितंबर की शुरुआत में गोंकूर की पहली सूची में चुनी गई थी। २१ सितंबर को उसे फ़्नाक उपन्यास पुरस्कार मिला—उसी दिन एआई संबंधी आरोप ऑनलाइन सामने आए।
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एआई का आरोप किस आधार पर लगा?
एक्स पर ‘Balance ton Claude’ नाम के खाते ने दावा किया कि उपन्यास के अलग-अलग अंश एआई-डिटेक्टर Pangram में जांचने पर ‘१०० प्रतिशत एआई’ के नतीजे मिले। CBC News ने बताया कि दूसरे अंशों पर उसी टूल से जांच करने पर उसे भी ऐसा ही नतीजा मिला। बाद में निबंधकार और Le Figaro के स्तंभकार सामुएल फ़ितूसी ने कहा कि वह इस खाते के पीछे काम कर रहे समूह का हिस्सा हैं, लेकिन अकेले नहीं थे।
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डिटेक्टर का स्कोर लेखन-प्रक्रिया का प्रमाण नहीं है। AFP द्वारा किए गए परीक्षणों के बारे में प्रकाशित रिपोर्टों में अलग-अलग टूल के परस्पर विरोधी नतीजे सामने आए। बाद की कवरेज में भी उपन्यास के लेखन में एआई की भूमिका को अनसुलझा बताया गया। ऐसे स्कोर समझाते हैं कि आरोप को चर्चा क्यों मिली, लेकिन वे अपने-आप यह तय नहीं करते कि पाठ किसने—या किस चीज़ ने—लिखा।
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लेखक और प्रकाशकों का पक्ष क्या है?
ओरेलियन उपन्यास लिखने के लिए एआई टूल इस्तेमाल करने से इनकार करते हैं। रॉयटर्स ने २३ सितंबर को बताया था कि उनके कनाडाई और फ्रांसीसी प्रकाशक उनके समर्थन में थे। लेखक के मुताबिक, उन्होंने किताब पर २०१७ में काम शुरू किया और पहला मसौदा २०१९ में पूरा कर लिया। यह उनका पक्ष समझने के लिए अहम है, लेकिन बाद में हुए संभावित संशोधनों के सवाल का अपने-आप जवाब नहीं देता।
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अलग से, La Presse ने २०१२ से २०१४ के बीच ओरेलियन के नाम से प्रकाशित कुछ लेखों और पहले प्रकाशित अन्य रचनाओं के बीच समानताएं रिपोर्ट कीं। The Canadian Press ने कहा कि उसने इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की है। ये पुराने काम से जुड़े आरोप हैं, उपन्यास के एआई से लिखे जाने का प्रत्यक्ष सबूत नहीं। विवाद के बीच क्यूबेक के प्रकाशक Les Éditions du Boréal ने किताब का प्रचार रोक दिया।
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साहित्यिक पुरस्कारों के सामने क्या सवाल है?
कनाडा के Writers’ Trust और Giller Foundation का कहना है कि उनके पुरस्कारों में एआई द्वारा लिखी किताबें स्वीकार नहीं हैं। लेकिन पात्रता जांचने के लिए वे काफी हद तक प्रकाशकों पर निर्भर हैं, जो लेखकों के साथ सीधे काम करते हैं। गोंकूर का फैसला दिखाता है कि नियम बनाना और उनका निष्पक्ष ढंग से पालन सुनिश्चित करना अलग चुनौतियां हैं—खासकर जब डिटेक्टर के नतीजे, प्रकाशक का भरोसा और लेखक का बयान एक-दूसरे से मेल न खाएं।
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