अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 23 सितंबर 2026 को वॉशिंगटन के पास स्थित सैन्य हवाई अड्डे, जॉइंट बेस एंड्रयूज़, पर चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का स्वागत किया। इससे शी की तीन दिन की राजकीय यात्रा शुरू हुई। व्हाइट हाउस ने हवाई अड्डे पर स्वागत करने का कार्यक्रम बताया था, लेकिन ट्रंप ने यह तरीका क्यों चुना, इसकी कोई खास वजह नहीं दी। इसलिए इसे वार्ता से पहले शी को दी गई असामान्य तवज्जो के रूप में देखना अधिक सटीक है, किसी तय रियायत के संकेत के रूप में नहीं।
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यह स्वागत अलग क्यों था?
अमेरिकी राष्ट्रपति आम तौर पर विदेशी नेताओं का स्वागत व्हाइट हाउस में करते हैं, उनके विमान के पास नहीं। फर्क मई में ट्रंप की बीजिंग यात्रा से भी साफ होता है: तब हवाई अड्डे पर चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने अगवानी की थी और शी ने अगले दिन ट्रंप का औपचारिक स्वागत किया था। इस तुलना से ट्रंप का कदम कूटनीतिक रूप से उल्लेखनीय बनता है, लेकिन इससे यह साबित नहीं होता कि उन्होंने बदले में कोई रियायत मांगी या हासिल की।
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आगे का कार्यक्रम क्या था?
23 सितंबर को ट्रंप के साथ अमेरिका की प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप ने शी और उनकी पत्नी पेंग लियुआन का स्वागत किया। 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में अलग औपचारिक राजकीय स्वागत समारोह निर्धारित था। उसके बाद दोनों राष्ट्रपतियों की बैठकें और शाम को राजकीय रात्रिभोज रखा गया था। व्हाइट हाउस के अनुसार, समारोह में अमेरिकी सशस्त्र बलों की विभिन्न शाखाओं के 479 सैन्यकर्मी शामिल होने थे; घोषित कार्यक्रम में एक B-2 बमवर्षक और चार F-22 लड़ाकू विमानों की उड़ान भी थी।
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ये विमान 23 सितंबर को एंड्रयूज़ में हुए स्वागत का हिस्सा नहीं थे। वहां से आई रिपोर्ट में दो B-1 बमवर्षकों की उड़ान का उल्लेख है।
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बातचीत से क्या उम्मीद है?
व्यापार और अर्थव्यवस्था से जुड़े तनाव वार्ता के प्रमुख मुद्दे थे। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), ताइवान और व्यापक सुरक्षा चिंताओं पर भी चर्चा की संभावना जताई गई थी। चीन ने उम्मीद व्यक्त की कि बातचीत से दोनों देशों के बीच ‘रणनीतिक स्थिरता’ मजबूत होगी। ये संभावित चर्चा-विषय थे, घोषित समझौतों की सूची नहीं।
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नेताओं की बैठकों से पहले अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने बताया कि दोनों पक्ष व्यापारिक तनाव को सीमित रखने वाली मौजूदा सहमति जनवरी तक बढ़ाने पर राजी हुए हैं। विश्लेषकों ने पहले ही आगाह किया था कि बड़े मतभेद सुलझाने की तुलना में प्रतिद्वंद्विता को संभालना अधिक संभावित नतीजा है। फिलहाल इस सहमति का विस्तार एक ठोस कदम है; ट्रंप और शी की बातचीत से आगे क्या निकलेगा, यह देखना बाकी है।
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