सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को तेल की कीमतें पहले गिरीं, फिर दिन के अंत तक बढ़कर बंद हुईं। कारोबार की शुरुआत में रूस से अतिरिक्त डीज़ल मिलने और रूस-यूक्रेन ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने की घोषित सहमति से बाजार को कुछ राहत की उम्मीद थी। लेकिन सऊदी अरब और टैंकरों पर हमलों ने ध्यान फिर से मध्य-पूर्व से तेल की आपूर्ति में रुकावट के जोखिम पर ला दिया।
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शुरुआती गिरावट के बाद ब्रेंट और WTI में उछाल
एशियाई कारोबार के शुरुआती घंटों में ब्रेंट 1.37 डॉलर यानी 1.31% गिरकर 103.35 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। अमेरिकी बेंचमार्क WTI भी 1.30 डॉलर यानी 1.42% गिरकर 90.55 डॉलर पर था। इन शुरुआती भावों में रूस से अधिक ईंधन मिलने और ऊर्जा ठिकानों पर हमले थमने की उम्मीदों का असर दिखा।
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हालांकि, दिन के निपटान तक दोनों बेंचमार्क चढ़ चुके थे। ब्रेंट 1.93 डॉलर यानी 1.8% बढ़कर 106.65 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ—15 सितंबर के बाद का इसका सबसे ऊँचा बंद भाव। WTI 1.89 डॉलर यानी 2% बढ़कर 93.74 डॉलर पर बंद हुआ।
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15 शुरुआती गिरावट और दिन के अंत की बढ़त अलग-अलग समय के भाव हैं, इसलिए दोनों रिपोर्टों में विरोधाभास नहीं है।
मध्य-पूर्व की आपूर्ति का जोखिम फिर चर्चा में आया
सप्ताहांत में सऊदी अरब पर हूती हमलों और दो टैंकरों पर हमलों ने क्षेत्र से तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, हूतियों ने रियाद के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर हमले की जिम्मेदारी ली। उस हमले में 13 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक घायल हुए।
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तेल बाजार के लिए सवाल सिर्फ यह नहीं था कि रूस से कितना डीज़ल मिल सकता है। सऊदी अरब के ठिकानों और टैंकरों पर हमलों ने आशंका पैदा की कि क्षेत्र से तेल की आवाजाही भी प्रभावित हो सकती है। दिन के कारोबार की रिपोर्ट ने ब्रेंट की बढ़त को रियाद और तेल टैंकरों पर हमलों से जोड़ा।
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घोषणाओं से लंबे समय तक राहत क्यों नहीं मिली?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि रूस और यूक्रेन एक-दूसरे के ऊर्जा ठिकानों पर हमले रोकने पर सहमत हुए हैं। इस घोषणा के बाद शुरुआती कारोबार में कीमतों पर दबाव पड़ा। लेकिन उपलब्ध रिपोर्टें बाजार की प्रतिक्रिया तो दर्ज करती हैं, यह पुष्टि नहीं करतीं कि संघर्षविराम लागू हो गया था।
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डीज़ल आपूर्ति का सौदा भी कच्चे तेल से अलग, ईंधन बाजार के एक हिस्से से जुड़ा था। सैक्सो ने रूस से 5 लाख टन डीज़ल आपूर्ति के समझौते को बाजार के लिए “सीमित राहत” बताया। दूसरी रिपोर्टों में अतिरिक्त आपूर्ति की घोषणाएँ भी थीं, लेकिन उपलब्ध जानकारियों में मात्रा और समय-सीमा का पूरा मेल नहीं है। इसलिए यह स्पष्ट नहीं होता कि बाजार तक वास्तव में कितनी आपूर्ति पहुँचेगी और कब।
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गोल्डमैन सैक्स का अनुमान और आगे का जोखिम
गोल्डमैन सैक्स ने दिसंबर के लिए ब्रेंट का अनुमान 85 डॉलर से बढ़ाकर 90 डॉलर प्रति बैरल कर दिया। बैंक ने लगातार बने हुए आपूर्ति जोखिमों का हवाला दिया और भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम को 20 डॉलर प्रति बैरल से थोड़ा अधिक आँका।
21 यह अनुमान सोमवार के 106.65 डॉलर के बंद भाव से कम था, लेकिन यह भविष्य का अनुमान है—कीमतें उस स्तर तक जरूर गिरेंगी, इसकी गारंटी नहीं।
उस दिन बाजार में दो तरह की खबरों के बीच खींचतान रही: रूस से संभावित अतिरिक्त डीज़ल और घोषित संघर्षविराम से राहत की उम्मीद, बनाम सऊदी अरब और टैंकरों पर हमलों से बढ़ती आपूर्ति-चिंता। कारोबार की शुरुआत में पहली उम्मीदों ने कीमतें नीचे खींचीं; बाद में क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता ने उन्हें फिर ऊपर पहुँचा दिया।
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