तीन दिन की गिरावट के बाद 8 मई को कच्चे तेल में तेजी आई; ब्रेंट करीब $101 प्रति बैरल के आसपास रिपोर्ट हुआ। पहले अमेरिका ईरान समझौते और होर्मुज मार्ग में स्थिरता की उम्मीद से कीमतें नरम हुई थीं, लेकिन नई झड़पों ने बाजार की धारणा बदल दी। अब बाजार खबरों के प्रति बेहद संवेदनशील है: तनाव बढ़ा तो जोखिम प्रीमियम बढ़ सकता है...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Oil Prices Rebound as U.S.-Iran Tensions Revive Hormuz Supply Fears. Article summary: Oil prices rebounded on May 8 after three days of losses because renewed U.S. Iran clashes revived supply risk fears around the Strait of Hormuz; Brent was reported around $101 a barrel, but the move reflected a geopo.... Topic tags: oil prices, energy, commodities, geopolitics, iran. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "HONG KONG: Tokyo’s Nikkei index soared yesterday to lead another strong rally across Asia stocks, fuelled by growing optimism the Iran war is close to ending and the revival of dem" source context "08/05/2026 - Page 16" Reference image 2: visual subject "Oil prices climbed higher when trading began on Sunday, after Iran closed the Strait of Hormuz once more and struck sh
तेल की शुक्रवार, 8 मई 2026 की तेजी को सिर्फ ‘गिरावट के बाद उछाल’ कहना अधूरा होगा। तीन दिन की नरमी के बाद कच्चा तेल इसलिए संभला क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच नई झड़पों ने नाजुक युद्धविराम पर सवाल खड़े कर दिए और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर आपूर्ति-जोखिम फिर से बाजार के केंद्र में आ गया—यह रास्ता तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) के वैश्विक शिपमेंट के लिए अहम माना जाता है ।
सप्ताह की शुरुआत में कच्चे तेल पर दबाव था। रिपोर्टों में संकेत मिले थे कि वॉशिंगटन और तेहरान किसी शांति समझौते की ओर बढ़ सकते हैं, जिससे तत्काल आपूर्ति-जोखिम की आशंका कम होती दिख रही थी । इसी उम्मीद ने ब्रेंट और WTI में पिछले सत्रों की गिरावट को हवा दी थी।
लेकिन ताजा झड़पों ने वह भरोसा कमजोर कर दिया। ईरान ने अमेरिका पर एक महीने लंबे युद्धविराम का उल्लंघन करने का आरोप लगाया, जबकि वॉशिंगटन ने कहा कि उसकी कार्रवाई जवाबी थी, क्योंकि ईरानी बलों ने गुरुवार को जलडमरूमध्य से गुजर रहे अमेरिकी नौसैनिक पोतों पर गोलीबारी की थी । बाजार ने तुरंत संदेश लिया: जोखिम पूरी तरह गया नहीं है।
सत्र के दौरान अलग-अलग समय पर ली गई कीमतों की तस्वीरें थोड़ी अलग रहीं, लेकिन दिशा एक ही थी—कच्चे तेल ने तीन दिन की गिरावट रोकते हुए फिर बढ़त बनाई।
Business Times और Dawn ने Reuters के हवाले से बताया कि 03:56 GMT तक ब्रेंट क्रूड वायदा $1.20 यानी 1.2% बढ़कर $101.26 प्रति बैरल पर था, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) $0.85 यानी 0.9% बढ़कर $95.66 प्रति बैरल हो गया था । Dawn के मुताबिक, बाजार खुलने पर दोनों प्रमुख बेंचमार्क 3% से ज्यादा ऊपर थे, हालांकि बाद में बढ़त कुछ कम हो गई
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एक और समय-बिंदु पर उछाल ज्यादा मजबूत दिखा। Times of India ने भारतीय समयानुसार सुबह 7:05 बजे WTI को $96.66 पर, 1.95% ऊपर, और ब्रेंट को $101.60 पर, 1.52% ऊपर बताया । वहीं Investors King ने Reuters के हवाले से छोटी बढ़त वाली तस्वीर दी: ब्रेंट 0.7% चढ़कर $100.73 और WTI $0.45 बढ़कर $95.26 प्रति बैरल पर था
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तेल बाजार में होर्मुज जलडमरूमध्य सिर्फ नक्शे पर एक समुद्री रास्ता नहीं है। रिपोर्टों में इसे वैश्विक तेल और गैस, खासकर LNG, के लिए एक महत्वपूर्ण ट्रांजिट रूट बताया गया है । इसलिए इस क्षेत्र में तनाव बढ़ते ही कारोबारी संभावित बाधा, देरी या शिपिंग जोखिम की आशंका को कीमतों में जोड़ने लगते हैं।
यहां एक जरूरी फर्क समझना चाहिए। उपलब्ध रिपोर्टें आपूर्ति में व्यवधान की आशंका और मार्ग को फिर खोलने या स्थिर रखने की उम्मीदों के कमजोर पड़ने की बात करती हैं; वे किसी पक्की, लगातार भौतिक आपूर्ति-कटौती को स्थापित नहीं करतीं । यानी शुक्रवार की तेजी काफी हद तक ‘जोखिम की कीमत’ थी—बाजार उस संभावना के लिए अधिक भुगतान करने को तैयार था कि अगर तनाव और बढ़ा, तो सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है।
इस हफ्ते का उतार-चढ़ाव दिखाता है कि कच्चा तेल अब अमेरिका-ईरान से जुड़ी खबरों पर बेहद तेजी से प्रतिक्रिया दे रहा है। जब खबरें संभावित कूटनीतिक सफलता और तनाव घटने की ओर इशारा कर रही थीं, कीमतों से कुछ भू-राजनीतिक जोखिम प्रीमियम निकल गया । जब नई लड़ाई ने युद्धविराम को कमजोर दिखाया, ब्रेंट और WTI में वही जोखिम प्रीमियम वापस जुड़ता दिखा
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आगे भी बाजार की दिशा किसी एक स्थिर मांग-आपूर्ति कहानी से ज्यादा अगले भरोसेमंद संकेत पर निर्भर रह सकती है। होर्मुज के आसपास और झड़पें हुईं तो कच्चे तेल को सहारा मिल सकता है, क्योंकि कारोबारी आपूर्ति में व्यवधान की संभावना को अधिक गंभीरता से लेंगे । इसके उलट, अगर बातचीत या स्थिर युद्धविराम के ठोस संकेत मिले, तो वही भू-राजनीतिक प्रीमियम कम हो सकता है जिसने कीमतों को ऊपर धकेला
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कच्चे तेल की वापसी का सार यह है कि बाजार की कहानी ‘तनाव घट रहा है’ से बदलकर ‘आपूर्ति-जोखिम लौट आया है’ हो गई। ब्रेंट का करीब $101 प्रति बैरल के आसपास लौटना इस चिंता को दिखाता है कि अमेरिका-ईरान टकराव नाजुक युद्धविराम को कमजोर कर सकता है और दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा समुद्री मार्गों में से एक को लेकर भरोसा हिला सकता है ।
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तीन दिन की गिरावट के बाद 8 मई को कच्चे तेल में तेजी आई; ब्रेंट करीब $101 प्रति बैरल के आसपास रिपोर्ट हुआ।
तीन दिन की गिरावट के बाद 8 मई को कच्चे तेल में तेजी आई; ब्रेंट करीब $101 प्रति बैरल के आसपास रिपोर्ट हुआ। पहले अमेरिका ईरान समझौते और होर्मुज मार्ग में स्थिरता की उम्मीद से कीमतें नरम हुई थीं, लेकिन नई झड़पों ने बाजार की धारणा बदल दी।
अब बाजार खबरों के प्रति बेहद संवेदनशील है: तनाव बढ़ा तो जोखिम प्रीमियम बढ़ सकता है, और भरोसेमंद डी एस्केलेशन आया तो वही प्रीमियम घट सकता है।