मर्सिडीज़ को उम्मीद थी कि उसके नए W17 पैकेज से हर लैप में करीब 0.3 सेकंड का फायदा मिलेगा। लेकिन सेपांग में क्वालिफाइंग के दौरान किमी एंटोनेली चौथे और जॉर्ज रसेल आठवें स्थान पर रहे—यह तब, जब एंटोनेली ने तीसरे अभ्यास सत्र में सबसे तेज़ समय दिया था। नतीजा पीछे हटने जैसा जरूर दिखा, पर टीम ने यह साबित नहीं किया था कि अपग्रेड ने कार को धीमा किया। टोटो वोल्फ ने कहा कि अभ्यास की रफ्तार क्वालिफाइंग में क्यों नहीं दिखी, इसकी वजह समझनी अभी बाकी है।
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कार में कहां दिखीं दिक्कतें?
वोल्फ के मुताबिक मर्सिडीज़ सीधी रफ्तार वाले हिस्सों और धीमे मोड़ों में समय गंवा रही थी। मैक्स वर्स्टापेन की रेड बुल के मुकाबले W17 में ड्रैग—यानी हवा का ज्यादा प्रतिरोध—दिख रहा था। धीमे मोड़ों में कार का व्यवहार भी चिंता का विषय था। इन बातों से यह तो पता चलता था कि समय कहां छूट रहा है, लेकिन यह साबित नहीं होता था कि इसके लिए नए पुर्ज़े ही जिम्मेदार थे।
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टीम को कार का कुछ व्यवहार भी नया और अनजान लगा। वोल्फ ने सेपांग की गर्मी और वहां की अलग तरह की डामर सतह को संभावित वजहों में गिनाया। हालांकि, अभ्यास के अच्छे प्रदर्शन से क्वालिफाइंग तक रफ्तार अचानक क्यों घटी, इसका साफ जवाब टीम के पास नहीं था।
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गर्मी और टायरों ने तस्वीर उलझाई
रसेल ने कहा कि गर्म मौसम और खुरदरी ट्रैक सतह के कारण टायर बहुत तेजी से घिस रहे थे। उनके मुताबिक कारें अपनी सामान्य प्रदर्शन-सीमा से अलग स्थिति में काम कर रही थीं और मर्सिडीज़ को अब भी सही सेटअप तलाशना था। कुछ मोड़ों में नए पैकेज से मिलने वाला डाउनफोर्स महसूस हो रहा था, लेकिन टायरों का ज्यादा गर्म होना और घिसना उस लाभ पर भारी पड़ सकता था।
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इसलिए क्वालिफाइंग के नतीजे को अपग्रेड पर सीधा फैसला मानना जल्दबाज़ी होती। अपेक्षित लैप-टाइम सुधार तो नहीं दिखा, लेकिन नए पुर्ज़ों के साथ कार का संतुलन, सेटअप और टायरों का व्यवहार—तीनों को समझना जरूरी था। उपलब्ध जानकारी से यह तय नहीं हुआ कि इनमें से किसका असर सबसे बड़ा था।
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एंटोनेली की Q2 गलती ने टायरों का विकल्प घटाया
Q2 में एंटोनेली की पहली तेज़ लैप ट्रैक लिमिट से बाहर जाने के कारण रद्द हो गई। Q3 में जगह पक्की करने के लिए उन्हें सॉफ्ट टायरों का एक और सेट इस्तेमाल करना पड़ा। नतीजतन, आखिरी सत्र में उनके पास सिर्फ एक नया सेट बचा, जबकि कुछ प्रतिद्वंद्वियों के पास ज्यादा विकल्प थे।
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एंटोनेली ने कहा कि एक और नया सेट होता तो वह आगे की पंक्ति में जगह के लिए चुनौती दे सकते थे—हालांकि उनके मुताबिक पोल पोज़िशन पहुंच से बाहर थी। लिहाजा उनका चौथा स्थान W17 की रफ्तार पर उठ रहे सवालों के अलावा, Q3 में टायरों की कम उपलब्धता से भी प्रभावित हुआ।
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ग्रिड पर मर्सिडीज़ की जगह और रेस की उम्मीद
मैक्स वर्स्टापेन ने पोल पोज़िशन हासिल की और लुईस हैमिल्टन दूसरे स्थान पर रहे। एंटोनेली क्वालिफाइंग में चौथे और रसेल आठवें स्थान पर थे। इसाक हद्जार पर पांच स्थान की ग्रिड पेनल्टी लागू होने के बाद मर्सिडीज़ के दोनों ड्राइवर क्रमशः तीसरे और सातवें स्थान से रेस शुरू करने वाले थे।
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मर्सिडीज़ ने रेस में वापसी की संभावना देखी, लेकिन टायरों का तेजी से घिसना बेहतर नतीजे की गारंटी नहीं था। टीम को उम्मीद थी कि मुश्किल परिस्थितियां रणनीति के मौके बना सकती हैं। एंटोनेली आगे की कारों को चुनौती देने के लिए अंडरकट—यानी प्रतिद्वंद्वी से पहले पिट में आकर नए टायरों पर तेज़ लैप लगाना—भी आजमाने पर विचार कर रहे थे।
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क्वालिफाइंग के बाद सबसे ठोस निष्कर्ष यही था कि अपग्रेड ने W17 को निश्चित रूप से धीमा कर दिया है, ऐसा साबित नहीं हुआ। मर्सिडीज़ ने सीधी रफ्तार और धीमे मोड़ों में कमजोरियां पहचानीं, जबकि सेपांग की गर्मी और टायरों की मांग ने कार का आकलन और मुश्किल बना दिया। अब टीम को समझना था कि कमी कितनी नए पैकेज से, कितनी सेटअप से और कितनी ट्रैक परिस्थितियों से आई।
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