आयरलैंड की डेटा प्रोटेक्शन कमीशन ने 25 मई 2018 से 4 फरवरी 2020 के बीच लोकेशन डेटा के प्रसंस्करण से जुड़े GDPR उल्लंघनों पर Google को €403 मिलियन का जुर्माना लगाया। मामला Web & App Activity, Location History और Location Accuracy से जुड़ा था; निष्कर्षों में गैर कानूनी या अनुचित प्रसंस्करण, अपर्याप्त पारदर्शिता, जरूरत...
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शोध उत्तर

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: Why did Ireland’s Data Protection Commission fine Google €403 million for GDPR breaches involving its Web & App Activity, Location History,. Article summary: Ireland’s Data Protection Commission (DPC) fined Google €403 million for GDPR breaches in its handling of location data through Web & App Activity, Location History and Location Accuracy from 25 May 2018 to 4 February 20. Topic tags: general, news, general web. Style: premium digital editorial illustration, source-backed research mood, clean composition, high detail, modern web publication hero. Use reference image context only for broad subject, composition, and topical grounding; do not copy the exact image. Avoid: logos, brand marks, copyrighted characters, real person likenesses, fake screenshots, UI text, readable text, watermarks, charts with fake numbers,
आयरलैंड की डेटा प्रोटेक्शन कमीशन (DPC) ने Google Ireland Limited पर €403 मिलियन का GDPR जुर्माना लगाया। जांच का विषय केवल यह नहीं था कि Google लोकेशन जानकारी एकत्र करता था, बल्कि यह था कि वह उसे किस कानूनी आधार पर, कितनी स्पष्ट जानकारी देकर, कितने समय तक और कितनी जवाबदेही के साथ इस्तेमाल व सुरक्षित रखता था। जांच में तीन फीचर शामिल थे—Web & App Activity, Location History और Location Accuracy—और अवधि 25 मई 2018, जब GDPR लागू हुआ, से 4 फरवरी 2020 तक की थी। यह जांच यूरोपीय उपभोक्ता संगठनों, जिनमें BEUC भी शामिल है, की शिकायतों के बाद फरवरी 2020 में शुरू हुई। 4
DPC के अनुसार, इन तीनों फीचरों में अलग-अलग लेकिन परस्पर जुड़े GDPR उल्लंघन हुए।
DPC ने पाया कि Web & App Activity और Location History के जरिए लोकेशन डेटा का प्रसंस्करण GDPR के उस सिद्धांत के अनुरूप नहीं था, जिसके तहत व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल कानूनी और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। 4
ये सेटिंग्स किसी व्यक्ति की लोकेशन को उसके Google सेवाओं के इस्तेमाल से जोड़ सकती हैं। नियामक का निष्कर्ष था कि जांच की अवधि में Google की प्रक्रियाएं इस मानक पर खरी नहीं उतरीं। 4
Location Accuracy के संबंध में DPC ने जवाबदेही की कमी पाई। नियामक के अनुसार Google यह प्रदर्शित नहीं कर सका कि उसका प्रसंस्करण GDPR के कानूनी, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रसंस्करण के सिद्धांत के अनुकूल था। 4
GDPR में जवाबदेही का अर्थ सिर्फ यह कहना नहीं है कि कंपनी नियमों का पालन करती है। उसे यह भी दिखाने में सक्षम होना चाहिए कि उसके डेटा-उपयोग के तरीके वास्तव में नियमों के अनुरूप हैं। 4
DPC ने तीनों फीचरों में पारदर्शिता संबंधी उल्लंघन पाए। नियामक की चिंता यह थी कि उपयोगकर्ताओं को शायद पता ही न हो कि उनकी लोकेशन का इस्तेमाल, मसलन, विज्ञापनों को प्रभावित करने या उनकी रुचियों का अनुमान लगाने के लिए किया जा रहा है। ऐसी अस्पष्टता लोगों को अपने बेहद निजी डेटा—वे किन जगहों पर गए हैं—पर प्रभावी नियंत्रण से वंचित कर सकती है। 4
नियामक ने यह भी पाया कि Google ने Web & App Activity और Location History में लोकेशन डेटा जरूरत से ज्यादा समय तक रखा। DPC ने इसे ऐसी स्थिति माना जिसने उपयोगकर्ताओं के नियंत्रण की कमी को और गंभीर बनाया, क्योंकि लोकेशन डेटा किसी व्यक्ति के निजी जीवन के बारे में संवेदनशील संकेत दे सकता है। 4
Google ने कहा कि मामला ऐसी “पुरानी नीतियों” से जुड़ा है जिन्हें बाद में बदला जा चुका है। कंपनी के अनुसार, 2019 से उसने अपनी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए और लोकेशन डेटा के नियंत्रण को आसान बनाने वाले टूल पेश किए। Google ने अपने ऑटो-डिलीट नियंत्रणों का भी उल्लेख किया, जिनके जरिए उपयोगकर्ता डेटा को लगातार तीन, 18 या 36 महीने के चक्र पर अपने-आप हटाने के लिए सेट कर सकते हैं। 2
हालांकि, ये बाद के बदलाव DPC के 2018–2020 अवधि के निष्कर्षों को नहीं बदलते। Google का तर्क है कि उसकी मौजूदा व्यवस्था उस समय जांची गई प्रक्रियाओं से अलग है। 2
जुर्माने के अलावा, DPC ने Google को आदेश दिया कि वह संबंधित डेटा-प्रसंस्करण को छह महीने के भीतर GDPR के अनुरूप बनाए। 4
BEUC—यूरोपीय उपभोक्ता संगठन—उन उपभोक्ता समूहों में शामिल था जिनकी शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई। संगठन ने कहा कि फैसला उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि इससे Google जवाबदेह ठहरता है और यह पुष्टि होती है कि कंपनी ने लोगों का लोकेशन डेटा इस्तेमाल करने के लिए जिस तरह सहमति ली, वह गैरकानूनी था। साथ ही, BEUC ने निर्णय आने में लगे समय को असंगत रूप से लंबा बताया। 24
यह मामला दो बड़े सवाल सामने रखता है: क्या लोकेशन ट्रैकिंग के तरीके GDPR के अनुरूप हैं, और क्या उपभोक्ता अधिकारों को वास्तविक सुरक्षा देने के लिए कार्रवाई पर्याप्त तेजी से होती है? 24
इस फैसले का संदेश यह है कि केवल सेटिंग्स का विकल्प दे देना डेटा-सुरक्षा अनुपालन के लिए पर्याप्त नहीं है। नियामक यह देख सकते हैं कि डेटा के इस्तेमाल का वैध आधार है या नहीं, उपयोगकर्ता को उसका तरीका स्पष्ट रूप से समझाया गया या नहीं, डेटा रखने की अवधि उचित है या नहीं, और कंपनी अपने अनुपालन को साबित कर सकती है या नहीं। इस मामले में DPC ने इन क्षेत्रों में कमियां पाईं और €403 मिलियन का दंड लगाया। 4
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आयरलैंड की डेटा प्रोटेक्शन कमीशन ने 25 मई 2018 से 4 फरवरी 2020 के बीच लोकेशन डेटा के प्रसंस्करण से जुड़े GDPR उल्लंघनों पर Google को €403 मिलियन का जुर्माना लगाया।
आयरलैंड की डेटा प्रोटेक्शन कमीशन ने 25 मई 2018 से 4 फरवरी 2020 के बीच लोकेशन डेटा के प्रसंस्करण से जुड़े GDPR उल्लंघनों पर Google को €403 मिलियन का जुर्माना लगाया। मामला Web & App Activity, Location History और Location Accuracy से जुड़ा था; निष्कर्षों में गैर कानूनी या अनुचित प्रसंस्करण, अपर्याप्त पारदर्शिता, जरूरत से अधिक समय तक डेटा रखना और जवाबदेही की कमी शामिल है।
Google को छह महीने में संबंधित प्रसंस्करण को GDPR के अनुरूप बनाना होगा। कंपनी का कहना है कि मामला पुरानी नीतियों का है और 2019 से उसके नियंत्रणों में बड़े बदलाव किए जा चुके हैं।
आयरलैंड की डेटा प्रोटेक्शन कमीशन ने 25 मई 2018 से 4 फरवरी 2020 के बीच लोकेशन डेटा के प्रसंस्करण से जुड़े GDPR उल्लंघनों पर Google को €403 मिलियन का जुर्माना लगाया। मामला Web & App Activity, Location History और Location Accuracy से जुड़ा था; निष्कर्षों में गैर कानूनी या अनुचित प्रसंस्करण, अपर्याप्त पारदर्शिता, जरूरत...
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आयरलैंड की डेटा प्रोटेक्शन कमीशन (DPC) ने Google Ireland Limited पर €403 मिलियन का GDPR जुर्माना लगाया। जांच का विषय केवल यह नहीं था कि Google लोकेशन जानकारी एकत्र करता था, बल्कि यह था कि वह उसे किस कानूनी आधार पर, कितनी स्पष्ट जानकारी देकर, कितने समय तक और कितनी जवाबदेही के साथ इस्तेमाल व सुरक्षित रखता था। जांच में तीन फीचर शामिल थे—Web & App Activity, Location History और Location Accuracy—और अवधि 25 मई 2018, जब GDPR लागू हुआ, से 4 फरवरी 2020 तक की थी। यह जांच यूरोपीय उपभोक्ता संगठनों, जिनमें BEUC भी शामिल है, की शिकायतों के बाद फरवरी 2020 में शुरू हुई। 4
DPC के अनुसार, इन तीनों फीचरों में अलग-अलग लेकिन परस्पर जुड़े GDPR उल्लंघन हुए।
DPC ने पाया कि Web & App Activity और Location History के जरिए लोकेशन डेटा का प्रसंस्करण GDPR के उस सिद्धांत के अनुरूप नहीं था, जिसके तहत व्यक्तिगत डेटा का इस्तेमाल कानूनी और निष्पक्ष तरीके से होना चाहिए। 4
ये सेटिंग्स किसी व्यक्ति की लोकेशन को उसके Google सेवाओं के इस्तेमाल से जोड़ सकती हैं। नियामक का निष्कर्ष था कि जांच की अवधि में Google की प्रक्रियाएं इस मानक पर खरी नहीं उतरीं। 4
Location Accuracy के संबंध में DPC ने जवाबदेही की कमी पाई। नियामक के अनुसार Google यह प्रदर्शित नहीं कर सका कि उसका प्रसंस्करण GDPR के कानूनी, निष्पक्ष और पारदर्शी प्रसंस्करण के सिद्धांत के अनुकूल था। 4
GDPR में जवाबदेही का अर्थ सिर्फ यह कहना नहीं है कि कंपनी नियमों का पालन करती है। उसे यह भी दिखाने में सक्षम होना चाहिए कि उसके डेटा-उपयोग के तरीके वास्तव में नियमों के अनुरूप हैं। 4
DPC ने तीनों फीचरों में पारदर्शिता संबंधी उल्लंघन पाए। नियामक की चिंता यह थी कि उपयोगकर्ताओं को शायद पता ही न हो कि उनकी लोकेशन का इस्तेमाल, मसलन, विज्ञापनों को प्रभावित करने या उनकी रुचियों का अनुमान लगाने के लिए किया जा रहा है। ऐसी अस्पष्टता लोगों को अपने बेहद निजी डेटा—वे किन जगहों पर गए हैं—पर प्रभावी नियंत्रण से वंचित कर सकती है। 4
नियामक ने यह भी पाया कि Google ने Web & App Activity और Location History में लोकेशन डेटा जरूरत से ज्यादा समय तक रखा। DPC ने इसे ऐसी स्थिति माना जिसने उपयोगकर्ताओं के नियंत्रण की कमी को और गंभीर बनाया, क्योंकि लोकेशन डेटा किसी व्यक्ति के निजी जीवन के बारे में संवेदनशील संकेत दे सकता है। 4
Google ने कहा कि मामला ऐसी “पुरानी नीतियों” से जुड़ा है जिन्हें बाद में बदला जा चुका है। कंपनी के अनुसार, 2019 से उसने अपनी प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण बदलाव किए और लोकेशन डेटा के नियंत्रण को आसान बनाने वाले टूल पेश किए। Google ने अपने ऑटो-डिलीट नियंत्रणों का भी उल्लेख किया, जिनके जरिए उपयोगकर्ता डेटा को लगातार तीन, 18 या 36 महीने के चक्र पर अपने-आप हटाने के लिए सेट कर सकते हैं। 2
हालांकि, ये बाद के बदलाव DPC के 2018–2020 अवधि के निष्कर्षों को नहीं बदलते। Google का तर्क है कि उसकी मौजूदा व्यवस्था उस समय जांची गई प्रक्रियाओं से अलग है। 2
जुर्माने के अलावा, DPC ने Google को आदेश दिया कि वह संबंधित डेटा-प्रसंस्करण को छह महीने के भीतर GDPR के अनुरूप बनाए। 4
BEUC—यूरोपीय उपभोक्ता संगठन—उन उपभोक्ता समूहों में शामिल था जिनकी शिकायतों के बाद जांच शुरू हुई। संगठन ने कहा कि फैसला उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर है, क्योंकि इससे Google जवाबदेह ठहरता है और यह पुष्टि होती है कि कंपनी ने लोगों का लोकेशन डेटा इस्तेमाल करने के लिए जिस तरह सहमति ली, वह गैरकानूनी था। साथ ही, BEUC ने निर्णय आने में लगे समय को असंगत रूप से लंबा बताया। 24
यह मामला दो बड़े सवाल सामने रखता है: क्या लोकेशन ट्रैकिंग के तरीके GDPR के अनुरूप हैं, और क्या उपभोक्ता अधिकारों को वास्तविक सुरक्षा देने के लिए कार्रवाई पर्याप्त तेजी से होती है? 24
इस फैसले का संदेश यह है कि केवल सेटिंग्स का विकल्प दे देना डेटा-सुरक्षा अनुपालन के लिए पर्याप्त नहीं है। नियामक यह देख सकते हैं कि डेटा के इस्तेमाल का वैध आधार है या नहीं, उपयोगकर्ता को उसका तरीका स्पष्ट रूप से समझाया गया या नहीं, डेटा रखने की अवधि उचित है या नहीं, और कंपनी अपने अनुपालन को साबित कर सकती है या नहीं। इस मामले में DPC ने इन क्षेत्रों में कमियां पाईं और €403 मिलियन का दंड लगाया। 4
Studio Global AI
इस पृष्ठ में एक स्रोत-समर्थित उत्तर शामिल है जिसे आप Studio Global के अंदर जारी रख सकते हैं।
आयरलैंड की डेटा प्रोटेक्शन कमीशन ने 25 मई 2018 से 4 फरवरी 2020 के बीच लोकेशन डेटा के प्रसंस्करण से जुड़े GDPR उल्लंघनों पर Google को €403 मिलियन का जुर्माना लगाया।
आयरलैंड की डेटा प्रोटेक्शन कमीशन ने 25 मई 2018 से 4 फरवरी 2020 के बीच लोकेशन डेटा के प्रसंस्करण से जुड़े GDPR उल्लंघनों पर Google को €403 मिलियन का जुर्माना लगाया। मामला Web & App Activity, Location History और Location Accuracy से जुड़ा था; निष्कर्षों में गैर कानूनी या अनुचित प्रसंस्करण, अपर्याप्त पारदर्शिता, जरूरत से अधिक समय तक डेटा रखना और जवाबदेही की कमी शामिल है।
Google को छह महीने में संबंधित प्रसंस्करण को GDPR के अनुरूप बनाना होगा। कंपनी का कहना है कि मामला पुरानी नीतियों का है और 2019 से उसके नियंत्रणों में बड़े बदलाव किए जा चुके हैं।