फ्रांस ने रोमानिया में अपना Atlantique 2 समुद्री गश्ती विमान इसलिए कुछ और हफ्तों तक तैनात रखने का फैसला किया क्योंकि काला सागर में व्यापारी जहाज़ों पर हमले जारी थे। नाटो के पूर्वी छोर के पास निगरानी बनाए रखने का उद्देश्य नौवहन के खतरों की पहचान करना और अहम ऊर्जा ढाँचे की सुरक्षा में मदद करना था। यह मिशन हर खतरे को रोक देने की गारंटी नहीं था।
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28 अक्टूबर को Contship Jet पर हुआ हमला इस मिशन की उपयोगिता और उसकी सीमा—दोनों दिखाता है। खबरों के मुताबिक, फ्रांसीसी गश्ती विमान ने जहाज़ पर हमला होने से पहले उसकी ओर बढ़ते ड्रोन देखे, लेकिन उन्हें रोक नहीं पाया। जहाज़ डूब गया; उसके सभी 18 चालक दल सदस्य बचा लिए गए।
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तैनाती क्यों बढ़ाई गई?
फ्रांसीसी विमान 18 अक्टूबर को रोमानिया पहुँचा था और उसकी तैनाती मूल रूप से 6 नवंबर तक के लिए थी। 5 नवंबर को उसके कमांडर ने बताया कि वाणिज्यिक जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही में मदद के लिए विमान की मौजूदगी कई और हफ्तों तक जारी रहेगी।
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यह फैसला रोमानिया और बुल्गारिया के तटों के पास व्यापारी जहाज़ों पर हुए हमलों के बाद आया। फ्रांस के मिशन में पश्चिमी काला सागर की निगरानी, नौवहन के खतरों की पहचान और अहम बुनियादी ढाँचे की सुरक्षा में मदद शामिल थी।
18 इससे पहले, 20 अक्टूबर को नाटो ने इस क्षेत्र में अतिरिक्त समुद्री गश्ती विमान, रडार सिस्टम और ड्रोन भेजने की घोषणा की थी।
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अक्टूबर के हमले: घटनाक्रम
- 6 अक्टूबर: बुल्गारिया के पास काला सागर में दो व्यापारी जहाज़ों पर हमला हुआ और उनमें से एक डूब गया। Reuters की रिपोर्ट के वक्त डूबे जहाज़ का चालक दल लापता था; उपलब्ध रिपोर्ट में अंतिम हताहत संख्या नहीं दी गई है।
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- 18 अक्टूबर: फ्रांस का Atlantique 2 पश्चिमी काला सागर में निगरानी के लिए रोमानिया पहुँचा।
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- 20 अक्टूबर: जहाज़ों पर घातक हमलों की श्रृंखला के बाद नाटो ने अतिरिक्त गश्ती विमान, रडार और ड्रोन भेजने की घोषणा की।
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- 23 अक्टूबर: रोमानिया के तट के पास ड्रोन हमले में एक मालवाहक जहाज़ डूब गया। रोमानिया के राष्ट्रपति ने रूस को जिम्मेदार ठहराया; Reuters के अनुसार, कम-से-कम एक नाविक की मौत हुई और तीन लापता थे।
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- 28 अक्टूबर: हाइफ़ा से कॉन्स्टांटा जा रहे यूनानी-मालिकाना हक वाले, लाइबेरिया के ध्वज वाले Contship Jet पर बुल्गारिया के पास तीन समुद्री ड्रोन ने हमला किया। जहाज़ डूब गया, लेकिन उसके सभी 18 चालक दल सदस्य बचा लिए गए।
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- 5 नवंबर: विमान के कमांडर ने पुष्टि की कि उसकी तैनाती कई हफ्तों के लिए बढ़ाई जाएगी।
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रिपोर्टों के मुताबिक, फ्रांसीसी विमान ने हमले से कम-से-कम 30 मिनट पहले ड्रोन का पता लगा लिया था। ड्रोन को रोका नहीं गया। इस चेतावनी से अधिकारियों और जहाज़ को प्रतिक्रिया देने का समय मिला, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टें यह साबित नहीं करतीं कि चालक दल का बचना केवल विमान की वजह से हुआ।
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निगरानी और रोकथाम में फर्क
Contship Jet की घटना एक अहम अंतर स्पष्ट करती है: गश्ती विमान खतरे को देख और उसकी सूचना दे सकता है, लेकिन सिर्फ पहचान लेने से हमला निष्क्रिय नहीं हो जाता। रोमानिया ने अलग से निगरानी क्षमता बढ़ाने और समुद्री बारूदी सुरंगों तथा ड्रोन से निपटने वाले उपकरणों के विकास में तेजी लाने की घोषणा की थी।
20 नाटो की घोषित मदद में विमान, रडार और ड्रोन शामिल थे, फिर भी 20 अक्टूबर की घोषणा के बाद हमले हुए—23 अक्टूबर को जहाज़ डूबा और 28 अक्टूबर को Contship Jet पर हमला हुआ।
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हर हमले की जिम्मेदारी बताते समय सावधानी जरूरी है। रोमानिया के राष्ट्रपति ने 23 अक्टूबर के जहाज़ डूबने के लिए रूस को जिम्मेदार ठहराया, जबकि नाटो ने हमलों को रूस के यूक्रेन युद्ध से जुड़ा हुआ बताया। उपलब्ध रिपोर्टें हर घटना के लिए रूस की जिम्मेदारी को स्वतंत्र रूप से साबित नहीं करतीं।
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जहाज़ों की सुरक्षा का असर व्यापार पर भी
काला सागर अनाज, तेल और तेल उत्पादों की ढुलाई का अहम मार्ग है। इसलिए व्यापारी जहाज़ों पर खतरा केवल सुरक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि व्यापार और खाद्य सुरक्षा की चिंता भी है।
17 31 अक्टूबर को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा कि रूस और यूक्रेन से ऊर्जा तथा अनाज की खेपों की सुरक्षित आवाजाही के लिए सीमित युद्धविराम को लेकर अंतरराष्ट्रीय दिलचस्पी बढ़ रही है।
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इस लिहाज से फ्रांस का फैसला जारी खतरे के बीच निगरानी बनाए रखने का कदम था—यह इस बात का संकेत नहीं कि उसका विमान हर हमला रोक सकता है। Contship Jet पर हमले से पहले मिली चेतावनी ने समय रहते खतरे की पहचान का महत्व दिखाया; जहाज़ का डूबना इस क्षमता की सीमा भी याद दिलाता है।
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