EU के राजदूत 22 सितंबर की मध्यरात्रि की समय-सीमा से पहले समझौता पूरा नहीं कर सके, क्योंकि रूस पर लक्षित व्यक्तिगत प्रतिबंधों को सभी 27 सदस्य देशों की सहमति चाहिए थी। लातविया उस समझौते पर राजी नहीं हुआ जिसमें दो प्रमुख कारोबारियों—अलीशेर उस्मानोव और मिखाइल फ्रिडमैन—को प्रतिबंध सूची से हटाना शामिल था। प्रस्ताव के तहत बाकी करीब 3,000 लोगों और संस्थाओं पर पाबंदियां असाधारण रूप से तीन वर्षों के लिए बढ़ाई जानी थीं, लेकिन लातविया ने दो नाम हटाने को रूस पर EU के दबाव में अस्वीकार्य ढील माना।
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प्रस्तावित समझौता क्या था?
समझौते के दो जुड़े हुए हिस्से थे:
- अलीशेर उस्मानोव और मिखाइल फ्रिडमैन को सूची से हटाया जाता, यानी उन पर लागू EU की संपत्ति फ्रीज और यात्रा-पाबंदी खत्म हो जाती।
- सूची में बाकी लोगों और संस्थाओं के प्रतिबंध 36 महीने के लिए बढ़ते, जो सामान्य छोटे अंतराल वाले नवीनीकरण से अलग होता। इससे अगला व्यापक नवीनीकरण विवाद 2029 तक टल जाता।
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राजनयिकों के बीच एक अस्थायी सहमति बनी थी, लेकिन उसे हर EU सदस्य देश की मंजूरी चाहिए थी। लातविया ने मंजूरी रोक दी और पैकेज अंतिम रूप नहीं ले सका।
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फ्रांस, स्लोवाकिया और लक्ज़मर्ग हटाने के पक्ष में क्यों थे?
इन तीन देशों की स्थिति के पीछे एक ही कारण था, ऐसा उपलब्ध रिपोर्टिंग से सिद्ध नहीं होता।
स्लोवाकिया पहले के गतिरोध में अहम था और उस्मानोव को हटाने पर जोर देता रहा था। रिपोर्टों के अनुसार, अंतिम समझौते के हिस्से के तौर पर उसने फ्रिडमैन को हटाने की मांग भी की।
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फ्रांस ने उस्मानोव को हटाने की मांग ऐसे समय की, जब रिपोर्टों में कहा गया कि इससे अज़रबैजान में हिरासत में रखे गए फ्रांसीसी नागरिकों की रिहाई में मदद मिल सकती है। कई माध्यमों ने इस कूटनीतिक संबंध की रिपोर्ट की, लेकिन इसे अज़रबैजान की स्वतंत्र रूप से स्थापित शर्त नहीं माना जा सकता।
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लक्ज़मर्ग का रुख था कि यदि उस्मानोव को हटाया जाता है तो फ्रिडमैन को भी हटाया जाना चाहिए। रिपोर्टों ने इस स्थिति को जमे हुए परिसंपत्तियों को लेकर फ्रिडमैन के लक्ज़मर्ग के विरुद्ध लगभग 16 अरब डॉलर के मध्यस्थता दावे से जोड़ा, हालांकि उपलब्ध रिपोर्टिंग यह साबित नहीं करती कि वही लक्ज़मर्ग का निर्णायक उद्देश्य था।
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लातविया का विरोध निर्णायक कैसे बना?
लातविया अंतिम बाधा इसलिए बना क्योंकि EU के लक्षित प्रतिबंधों के लिए सभी 27 सदस्य देशों की सहमति अनिवार्य है। उसका तर्क था कि दो लोगों को हटाने के बदले लंबी अवधि का नवीनीकरण स्वीकार करना EU की प्रतिबंध नीति को कमजोर करेगा। वार्ता पर आई रिपोर्टिंग के अनुसार, लातवियाई विदेश मंत्री बैबा ब्राज़े ने कहा कि प्रतिबंधों को “कमजोर नहीं, मजबूत” किया जाना चाहिए।
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यह प्रकरण सर्वसम्मति पर आधारित प्रतिबंध-नवीनीकरण की कमजोरी को भी दिखाता है: व्यापक पैकेज को समर्थन मिलने पर भी एक सरकार किसी एक हिस्से पर आपत्ति कर पूरी सहमति रोक सकती है।
मध्यरात्रि की समय-सीमा पर क्या दांव पर था?
तत्काल जोखिम EU की व्यक्तिगत प्रतिबंध सूची को था—यानी करीब 3,000 रूस-संबद्ध व्यक्तियों और संस्थाओं पर संपत्ति फ्रीज तथा यात्रा-पाबंदी। इससे पहले सहमति न बन पाने पर 15 सितंबर से 22 सितंबर तक केवल सात दिन का तकनीकी विस्तार किया गया था।
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यदि EU सभी कानूनी प्रक्रियाएं सर्वसम्मति से पूरी नहीं कर पाता, तो ये लक्षित सूचीबद्धताएं समाप्त हो सकती थीं। इसलिए मामला केवल दो नामों का नहीं था: उस्मानोव और फ्रिडमैन पर विवाद व्यापक व्यक्तिगत-प्रतिबंध व्यवस्था की कानूनी निरंतरता को खतरे में डाल रहा था।
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इसका अर्थ यह नहीं था कि रूस के खिलाफ EU के सभी उपाय खत्म हो जाते। अलग क्षेत्रीय आर्थिक प्रतिबंध इस विशेष नवीनीकरण से बाहर थे और उन पर इसका असर नहीं पड़ना था।
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फिर से होने वाली वार्ता से पहले प्रतिक्रियाएं
EU की विदेश नीति प्रमुख काया कलास ने सदस्य देशों से रूस पर प्रतिबंध बनाए रखने की अपील की और कहा कि अधिकारी नवीनीकरण को जल्द पूरा करने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने बातचीत जारी रहने के दौरान प्रतिबंध व्यवस्था में स्थिरता की जरूरत पर जोर दिया।
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यूक्रेन के प्रधानमंत्री सेरही कोरेत्स्की ने EU से प्रतिबंधों में कोई ढील न देने का आग्रह किया। उनका कहना था कि जब यूक्रेन पर हमले जारी हैं, तो यूरोप रूस के युद्ध को सक्षम बनाने वालों को मित्र की तरह नहीं मान सकता।
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लिथुआनिया के विदेश मंत्री केस्तुतिस बुद्रिस ने भी सार्वजनिक रूप से रूस और क्रेमलिन की आक्रामकता को सक्षम बनाने वालों पर अधिक दबाव डालने की बात कही। हालांकि उनकी रिपोर्ट की गई टिप्पणियां रूस-संबंधी आगे के उपायों के व्यापक संदर्भ में थीं, न कि विशेष रूप से उस्मानोव-फ्रिडमैन समझौते पर दर्ज प्रतिक्रिया के तौर पर।
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मंगलवार सुबह प्रस्तावित वार्ता का लक्ष्य सिर्फ दो नामों पर मतभेद सुलझाना नहीं था। उसके सामने बड़ा संस्थागत सवाल भी था: जब हर नवीनीकरण राजनीतिक सर्वसम्मति पर निर्भर हो, तो इतनी बड़ी प्रतिबंध सूची को लगातार कानूनी रूप से कैसे लागू रखा जाए।
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