डच केंद्रीय बैंक डी नेदरलैंड्से बैंक (DNB) ने 86 टन सोना बेचकर अपने भंडार को कम नहीं किया। उसने सोने को न्यूयॉर्क और कनाडा के ओटावा से लंदन पहुंचाया, ताकि गंभीर संकट की स्थिति में उस पर जल्दी कारोबार किया जा सके। बैंक ने इस कदम को बढ़ती भूराजनीतिक अशांति के बीच संकट-तैयारी मजबूत करने से जोड़ा। कुल डच स्वर्ण भंडार 612.4 टन ही बना रहा।
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यह अभियान कोई स्थायी रूप से छिपाया गया कदम नहीं था: DNB ने स्थानांतरण पूरा होने के बाद इसकी घोषणा की थी।
क्या बदला और क्या नहीं बदला
मार्च से अगस्त 2026 के बीच DNB ने न्यूयॉर्क और ओटावा में रखे सोने में से 86 टन लंदन भेजा। यह उन दोनों उत्तरी अमेरिकी ठिकानों पर रखे लगभग 313 टन सोने के एक-चौथाई से अधिक के बराबर था।
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यह भंडारण-स्थान और बाजार तक पहुंच में बदलाव था, न कि राष्ट्रीय सोने की बिक्री। 2025 के अंत में डच स्वर्ण भंडार का मूल्य €72.2 अरब था; इस कदम से धातु की जगह बदली, मालिकाना मात्रा नहीं।
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सोना कैसे स्थानांतरित हुआ
हर सोने की ईंट को अटलांटिक पार भेजना जरूरी नहीं था। रिपोर्टों के अनुसार DNB ने दो तरीके अपनाए:
- करीब 59 टन सोना न्यूयॉर्क में बेचा गया और उसके बराबर सोना लंदन में खरीदा गया।
- 27 टन से अधिक सोना भौतिक रूप से ब्रिटेन भेजा गया; रिपोर्टिंग में इसे DNB के नीदरलैंड स्थित ज़ाइस्ट कैश सेंटर के रास्ते से जोड़ा गया है।
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न्यूयॉर्क में बेचकर लंदन में दोबारा खरीदने का मतलब यह था कि बैंक को पूरी मात्रा में सोने की ईंटें ढोनी नहीं पड़ीं। इससे लंदन के बुलियन बाजार में समकक्ष मूल्य पहुंच गया, जबकि भंडार का एक हिस्सा वास्तव में भी स्थानांतरित किया गया।
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लंदन ही क्यों चुना गया
DNB का कहना है कि लंदन में रखा सोना संकट में अधिक आसानी से कारोबार योग्य है। बैंक ऑफ इंग्लैंड की वॉल्ट प्रणाली थोक भौतिक सोना बाजार के प्रमुख केंद्रों में है। इसलिए वहां बुलियन रखने से जरूरत पड़ने पर खरीदारों और बाजार के ढांचे तक पहुंच बेहतर हो सकती है।
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यही इस फैसले का मूल तर्क है: रिजर्व में सोना होना महत्वपूर्ण है, लेकिन तनावपूर्ण हालात में उसे कितनी तेजी से बेचा, बदला, स्वैप किया या अन्य तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है, यह भी उतना ही अहम है। DNB ने इसे गंभीर संकटों के लिए तैयारी मजबूत करने वाला कदम बताया।
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यह घरेलू भंडारण की ओर पूर्ण वापसी नहीं है। लंदन भी विदेश में स्थित भंडारण केंद्र है। लेकिन DNB ने उत्तरी अमेरिका पर अपनी निर्भरता घटाई और साथ ही दुनिया के बड़े स्वर्ण बाजार तक पहुंच बनाए रखी।
लंदन डच सोने का सबसे बड़ा ठिकाना कैसे बना
इस पुनर्वितरण के बाद डच स्वर्ण भंडार का भौगोलिक बंटवारा काफी बदल गया:
| भंडारण स्थान |
स्थानांतरण से पहले |
स्थानांतरण के बाद |
| लंदन |
18.1% |
32.1% |
| न्यूयॉर्क |
31.3% |
18.5% |
| ओटावा |
19.7% |
18.5% |
| ज़ाइस्ट, नीदरलैंड |
— |
30.8% |
लंदन की हिस्सेदारी 14 प्रतिशत अंक बढ़ी और वह डच सोने का सबसे बड़ा एकल भंडारण स्थान बन गया। न्यूयॉर्क और ओटावा में प्रत्येक के पास 18.5% बचा, जबकि करीब एक-तिहाई सोना नीदरलैंड के ज़ाइस्ट में रहा।
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फ्रांस ने भी ऐसा किया, लेकिन प्राथमिकता अलग थी
फ्रांस ने भी न्यूयॉर्क में रखी सोने की ईंटों को सीधे जहाज से नहीं भेजा। जुलाई 2025 से जनवरी 2026 के बीच बांक द फ्रांस ने न्यूयॉर्क फेड में रखे 129 टन सोने को बेचा और यूरोप में उतनी ही मात्रा का बुलियन खरीदा। यह फ्रांस के कुल स्वर्ण भंडार का लगभग 5% था।
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फ्रांसीसी अभियान में एक व्यावहारिक पहलू और था: पुराने प्रारूप की ईंटों को ऐसे बुलियन से बदलना जो आधुनिक बाजार की पसंदीदा तकनीकी विशिष्टताओं पर खरा उतरता हो। इसलिए यह केवल कस्टडी बदलने का कदम नहीं, बल्कि मानकीकरण की कवायद भी थी।
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दोनों मामलों में बिक्री और पुनर्खरीद का तरीका समान था, पर घोषित तर्क अलग थे। DNB ने संकट-तैयारी और लंदन में कारोबार की सुविधा पर जोर दिया; फ्रांस के केंद्रीय बैंक गवर्नर ने कहा कि उसका लेनदेन राजनीतिक रूप से प्रेरित नहीं था।
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जर्मनी और इटली ने नई बड़ी योजना क्यों नहीं घोषित की
जर्मनी और इटली में अमेरिका से और सोना वापस लाने की घरेलू मांग है, लेकिन दोनों में से किसी ने DNB जैसी नई बड़े पैमाने की योजना घोषित नहीं की है। जर्मनी का करीब 1,236 टन सोना—उसके कुल भंडार का लगभग 37%—अब भी न्यूयॉर्क फेड में है। जर्मन सरकार कह चुकी है कि फिलहाल इसे निकालने पर विचार नहीं हो रहा।
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सार्वजनिक रिकॉर्ड के आधार पर निष्क्रियता की एक निश्चित वजह बताना उचित नहीं होगा। न्यूयॉर्क में भंडार रखने से भौगोलिक विविधीकरण और स्थापित कस्टडी एवं बाजार ढांचे तक पहुंच बनी रह सकती है। विशाल मात्रा में सोने के स्थानांतरण में लॉजिस्टिक्स और परिचालन योजना भी लगती है। जर्मनी पहले ही न्यूयॉर्क से फ्रैंकफर्ट बड़ा स्थानांतरण कर चुका है, जिसमें 2017 में 300 टन शामिल था।
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इसलिए सटीक निष्कर्ष यही है कि जर्मनी या इटली ने सोना कभी नहीं हटाने का स्थायी फैसला नहीं किया है; बस उनके रिजर्व प्रबंधकों ने अभी DNB के 2026 पुनर्वितरण जैसा कोई नया कार्यक्रम घोषित नहीं किया है।
व्यापक स्वर्ण रुझान का मतलब क्या है—और क्या नहीं
DNB का फैसला दिखाता है कि केंद्रीय बैंक अपने रिजर्व की मजबूती को नए नजरिए से देख रहे हैं। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के 2026 सर्वे में 89% रिजर्व प्रबंधकों ने अनुमान लगाया कि अगले 12 महीनों में वैश्विक आधिकारिक स्वर्ण भंडार बढ़ेगा, जबकि 84% ने माना कि पांच वर्ष में कुल रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी अधिक होगी।
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सोने में किसी जारीकर्ता का ऋण-जोखिम नहीं होता और यह विविधीकरण में मदद कर सकता है। फिर भी यह जोखिम-मुक्त नहीं है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव के कारण इसे उच्च-जोखिम वाला रिजर्व एसेट मानता है और कहता है कि इसका आकलन तरलता-समायोजित तथा जोखिम-आधारित रिजर्व-प्रबंधन ढांचे में होना चाहिए।
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इस रुझान को विविधीकरण और संकट-योजना के रूप में समझना अधिक सही है, न कि डॉलर-आधारित रिजर्व से सामूहिक पलायन के रूप में। सर्वे में कई प्रबंधकों ने भविष्य में डॉलर की कम हिस्सेदारी की उम्मीद जताई, लेकिन 2025 के अंत में वैश्विक विदेशी मुद्रा रिजर्व का लगभग 57% हिस्सा अमेरिकी डॉलर में ही था।
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नीदरलैंड के मामले में संदेश साफ है: आधुनिक रिजर्व प्रबंधन में केवल यह नहीं देखा जाता कि केंद्रीय बैंक के पास कितना सोना है। यह भी देखा जाता है कि वह कहां रखा है, उसकी ईंटें बाजार के अनुकूल हैं या नहीं, और दबाव के समय उसे कितनी जल्दी उपयोग में लाया जा सकता है।