MarketWatch ने रिपोर्ट किया कि गर्मियों की यात्रा मांग मजबूत रहने के बावजूद ऊंचे फ्यूल खर्च एयरलाइंस के मार्जिन पर दबाव डाल रहे हैं, इसलिए वे उड़ानें घटा रही हैं . AirHelp ने भी बताया कि एयरलाइंस पीक समर ट्रैवल से पहले उड़ानें काट रही हैं, सरचार्ज जोड़ रही हैं और शेड्यूल बदल रही हैं
.
यहां एक जरूरी बात समझनी चाहिए: सभी आंकड़े एक ही चीज नहीं मापते। कुछ आंकड़े मई के प्रकाशित शेड्यूल से हटाई गई उड़ानों के हैं, कुछ जून से सितंबर के बीच दो अलग-अलग तारीखों पर शेड्यूल तुलना के हैं, और कुछ आगे के जोखिम का अनुमान बताते हैं। यानी इन्हें अंतिम कैंसिलेशन गिनती नहीं, बल्कि क्षमता घटने के संकेत की तरह पढ़ना बेहतर है।
Business Insider की Cirium-आधारित रिपोर्ट ने 10 दिन के अंतराल में 24 अप्रैल और 4 मई के शेड्यूल की तुलना की थी, इसलिए यह हालिया हटाई गई उड़ानों को दिखाती है, पूरे सीजन का स्थिर अंतिम आंकड़ा नहीं .
हर उड़ान एयरलाइन के लिए बराबर कमाई नहीं देती। किसी रूट पर विमान भर भी जाए, तो फ्यूल महंगा होने पर किराए से लागत निकालना मुश्किल हो सकता है। कम मार्जिन वाले रूट—खासकर कुछ शॉर्ट-हॉल और लो-कॉस्ट सेवाएं—ज्यादा दबाव में आ सकती हैं, क्योंकि लागत बढ़ने पर उनका गणित जल्दी बिगड़ता है .
ऐसे में एयरलाइंस अक्सर चार कदम उठाती हैं: उड़ानों की फ्रीक्वेंसी कम करना, कुछ रूट मिलाना, विमान दूसरे रूट पर लगाना या उड़ान पूरी तरह रद्द करना। Euro Weekly News ने रिपोर्ट किया कि कुछ उड़ानें शेड्यूल से गायब होने लगी हैं, कुछ रूट समेकित किए जा रहे हैं और एयरलाइंस आगे ईंधन व्यवधान की आशंका के लिए तैयारी कर रही हैं .
जब लाखों सीटें शेड्यूल से हटती हैं, तो यात्रियों के लिए तारीख और समय चुनने की गुंजाइश घटती है। सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब कनेक्टिंग फ्लाइट छूट जाए या मूल उड़ान बदल दी जाए। Adept Traveler ने चेताया कि पतले शेड्यूल में देरी या उसी दिन की समस्या आने पर बैकअप डिपार्चर कम रह जाते हैं .
कम सीटें और ऊंची लागत—दोनों मिलकर किरायों पर दबाव डालते हैं। MarketWatch के अनुसार फ्यूल लागत बढ़ने से गर्मियों के किराए ऊपर जा सकते हैं . AirHelp ने भी रिपोर्ट किया कि कुछ एयरलाइंस ईंधन संकट के जवाब में सरचार्ज जोड़ रही हैं और शेड्यूल बदल रही हैं
.
यह संकट समान रूप से हर एयरलाइन और हर रूट पर नहीं दिखेगा। MarketWatch ने लिखा कि यूरोपीय एयरलाइंस पहले से उड़ानें घटा रही थीं क्योंकि जेट-फ्यूल कमी का असर एयरलाइन कारोबार पर पड़ रहा था . Business Insider की Cirium-आधारित रिपोर्ट में कहा गया कि उसके डेटा में गर्मियों की ज्यादातर हटाई गई उड़ानें Spirit और United Airlines से आईं
. इसका मतलब यह नहीं कि इन एयरलाइंस की हर उड़ान जोखिम में है; सही तरीका है अपने खास रूट और बुकिंग को नियमित रूप से जांचना।
अगर हवाई टिकट महंगे होते हैं, तो कुछ यात्री उड़ान की जगह कार से यात्रा चुन सकते हैं। Marketplace ने रिपोर्ट किया कि विश्लेषकों के मुताबिक इससे पेट्रोल की मांग बढ़ सकती है, वह भी ऐसे समय में जब आपूर्ति पहले से दबाव में है .
घबराने की जरूरत नहीं, लेकिन अब यात्रा योजना में पहले से ज्यादा सतर्कता चाहिए।
यह सिर्फ ईंधन महंगा होने की कहानी नहीं, बल्कि एयरलाइन क्षमता घटने की कहानी भी है। जेट फ्यूल की ऊंची कीमत और आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता के कारण एयरलाइंस कुछ उड़ानों को आर्थिक रूप से कम व्यवहार्य मान रही हैं, इसलिए वे गर्मियों की मजबूत मांग के बावजूद शेड्यूल पतला कर रही हैं .
फिलहाल सबसे ठोस रिपोर्टेड आंकड़े बताते हैं कि मई से करीब 13,000 उड़ानें और लगभग 20 लाख सीटें हटाई गईं, जबकि अलग समर शेड्यूल विश्लेषण में जून से सितंबर तक 75,000 से अधिक उड़ानें हटने की बात सामने आई . अगर ईंधन आपूर्ति स्थिर होती है, तो कटौती की रफ्तार कम हो सकती है। लेकिन ईरान से जुड़ा व्यवधान जारी रहा, तो रिपोर्टों के मुताबिक और समर फ्लाइट्स जोखिम में आ सकती हैं
.
यात्रियों के लिए सीधा संदेश है: जल्दी और सोच-समझकर बुक करें, कनेक्शन में समय रखें, और एयरलाइन ऐप या वेबसाइट पर अपना शेड्यूल नियमित रूप से देखते रहें।
Comments
0 comments