यह प्रदर्शन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि कैरोलाइना ने ऑफ‑सीज़न में एहलर्स को खास तौर पर बड़े मैचों में गोल करने की क्षमता के लिए जोड़ा था—और गेम 2 में उन्होंने वही भूमिका निभाई।
स्कोरलाइन भले ही 3–2 रही, लेकिन खेल का बड़ा हिस्सा हरिकेन्स के नियंत्रण में था। कैरोलाइना ने मॉन्ट्रियल पर 26–12 से शॉट्स की बढ़त बनाई और लगातार दबाव बनाया।
सबसे अहम बात यह रही कि जब टीम को सबसे ज्यादा जरूरत थी—तभी निर्णायक गोल आया। और दोनों बार यह जिम्मेदारी एहलर्स ने निभाई।
मॉन्ट्रियल कैनेडियन्स ने शॉट्स में पिछड़ने के बावजूद मैच में खुद को बनाए रखा।
जोश एंडरसन ने टीम के दोनों गोल किए—जिसमें तीसरे पीरियड का बराबरी वाला गोल भी शामिल था जिसने मैच को ओवरटाइम में पहुंचाया।
यही उनकी ताकत भी है: भले ही विपक्ष खेल पर नियंत्रण रखे, लेकिन कैनेडियन्स सीमित मौकों से भी गोल निकाल सकते हैं। यही वजह है कि सीरीज़ अभी भी बेहद प्रतिस्पर्धी बनी हुई है।
हरिकेन्स का पज़ेशन गेम और संरचना मजबूत दिखी, लेकिन गोल करने का बोझ कुछ हद तक एक ही खिलाड़ी पर रहा। टीम चाहेगी कि अन्य लाइनें भी नियमित रूप से स्कोरिंग में योगदान दें, ताकि दबाव सिर्फ स्टार खिलाड़ियों पर न रहे।
मॉन्ट्रियल की सबसे बड़ी चुनौती ट्रांज़िशन में कैरोलाइना के स्किल खिलाड़ियों को रोकना है। ओवरटाइम में एहलर्स का गोल इसी तरह के तेज़ हमले से आया, जिसने उनके डिफेंस की एक कमजोरी उजागर की।
निक सुज़ुकी – कैनेडियन्स के कप्तान प्लेऑफ़ में टीम के सबसे उत्पादक खिलाड़ियों में रहे हैं और मॉन्ट्रियल की आक्रामक रणनीति का केंद्र हैं।
टेलर हॉल – कैरोलाइना के अनुभवी फॉरवर्ड ने सीरीज़ से पहले कहा था कि लंबा ब्रेक टीम को पूरी तरह फिट होने का फायदा देता है—लेकिन कभी‑कभी लय भी प्रभावित हो सकती है।
सीरीज़ अब मॉन्ट्रियल शिफ्ट हो रही है और कुछ अहम सवाल सामने हैं।
क्या कैरोलाइना का लंबा आराम फायदेमंद रहेगा? टीम को पिछले राउंड के बाद लगभग 11 दिन का ब्रेक मिला था, जिससे खिलाड़ी फिट तो रहे लेकिन मैच की लय पर असर पड़ सकता है।
लेन हटसन का प्रभाव कितना होगा? मॉन्ट्रियल के डिफेंसमैन लेन हटसन प्लेऑफ़ में अपनी टीम के ब्लू‑लाइन स्कोरिंग लीडर रहे हैं और उनका पक‑मूविंग खेल सीरीज़ की दिशा बदल सकता है।
इस जीत के साथ कैरोलाइना ने सिर्फ एक मैच नहीं जीता—बल्कि पूरी सीरीज़ का मोमेंटम बदल दिया।
मॉन्ट्रियल की गेम 1 जीत के बाद हरिकेन्स के सामने घरेलू मैदान पर 0–2 से पीछे होने का खतरा था। लेकिन ओवरटाइम जीत ने सीरीज़ को 1–1 कर दिया और अब दबाव दोनों टीमों पर बराबर है।
सबसे बड़ा संकेत यह है कि कैरोलाइना के पास ऐसा खिलाड़ी मौजूद है जो प्लेऑफ़ के सबसे बड़े पलों में मैच का फैसला कर सकता है। अगर निकोलाज एहलर्स का यह फॉर्म जारी रहता है, तो ईस्टर्न कॉन्फ़्रेंस फ़ाइनल की दिशा जल्दी बदल सकती है।