शो की शुरुआत कनाडा के स्वदेशी लोगों के सम्मान के साथ हुई। पारंपरिक वेशभूषा में कलाकारों ने ढोल की थाप पर नृत्य किया, जिसके बाद मनीतोबा के पेग्विस प्रथम राष्ट्र के गायक-गीतकार विलियम प्रिंस ने मंच संभाला । प्रिंस ने पूरे स्टेडियम और एक वैश्विक ऑडियंस को संबोधित करते हुए कहा: "हम एक बार फिर से इकट्ठा हुए हैं, तट से तट तक, इस धरती के प्रथम लोगों की तरफ से। यह एक पल से कहीं बढ़कर है। यह एक सच्चा जुड़ाव है"
। उन्होंने स्वदेशी संस्कृति को "गीतों, कला, शिल्प और नृत्य की एक समृद्ध परंपरा" के रूप में वर्णित किया
। इस खंड ने पॉप धमाके से पहले एक बेहद खास और भावनात्मक माहौल तैयार कर दिया
।
समारोह का संगीत कनाडाई दिग्गजों और वैश्विक कलाकारों के मिश्रण से तैयार किया गया था। फीफा और विभिन्न समाचार रिपोर्टों के अनुसार, प्रस्तुति देने वाले कलाकारों की पूरी सूची इस प्रकार है :
बोस्निया और हर्ज़ेगोविना का राष्ट्रगान सर्बियाई-कनाडाई संगीतकार आलेक्सांदर गायिच ने वायलिन पर बजाया । दृश्य चश्मदीदों के अनुसार, समारोह की खास झलकियों में मूस (एक प्रकार का बारहसिंगा) की कठपुतलियां और लाल, सफेद व सुनहरे रंगों से सजी फुटबॉल पिच शामिल थी, जो कनाडाई झंडे का प्रतिनिधित्व कर रही थी
।
43,002 दर्शकों से खचाखच भरे टोरंटो स्टेडियम में कई बड़ी हस्तियां मौजूद थीं। कनाडा के लिए खुशियां मनाते हुए रयान रेनॉल्ड्स नज़र आए, जबकि टॉम क्रूज़, डेविड बेकहम, माइक मायर्स और अपनी पत्नी के साथ आए जॉर्ज लुकास जैसे सितारे तीनों मेज़बान शहरों के समारोहों के बीच मूव करते दिखे ।
ग्रुप बी का यह मैच अर्जेंटीना के रेफरी फकुंडो टेलो की देखरेख में स्थानीय समयानुसार दोपहर 3:00 बजे शुरू हुआ । यह एक ऐतिहासिक मुकाबला था – दोनों देश पहले कभी एक-दूसरे के आमने-सामने नहीं आए थे
। कनाडा विश्व कप में अब तक 0-6 के स्कोर के साथ उतरा था, वहीं बोस्निया और हर्ज़ेगोविना भी अपनी पहली विश्व कप जीत की तलाश में था
।
21वें मिनट में, बोस्निया के जोवो लुकिक ने एक बेहतरीन मौके का फायदा उठाते हुए हेडर से गोल दाग दिया और मेहमान टीम को 1-0 की बढ़त दिला दी (कुछ शुरुआती रिपोर्टों ने इस गोल को 19वें मिनट का बताया, लेकिन आधिकारिक समय 21 मिनट है
)। एक ऐसी टीम के लिए जो अपने पिछले सभी छह विश्व कप मैच हार चुकी थी, यह शुरुआती बढ़त एक पुराने दर्दनाक इतिहास को दोहराने का खतरा बन कर उभरी थी।
दूसरे हाफ में कोच जेसी मार्श ने अपने बेंच का रुख किया। उन्होंने स्ट्राइकर साइल लारिन को मैदान में उतारा, जिन्हें कनाडा की विश्व कप कहानी को नए सिरे से लिखने के लिए बस एक पल की ज़रूरत थी। 78वें मिनट में, लारिन ने गोलकीपर निकोला वासिल्ज को छकाते हुए एक हाफ-वॉली से गेंद को जाल में पहुंचा दिया और मैच 1-1 पर ला खड़ा किया । यह गोल लारिन के मैदान में आने के लगभग दो मिनट बाद ही हुआ
।
टीम के साथी प्रॉमिस डेविड ने लारिन को यह निर्णायक पास दिया, जो इस्माइल कोने की धमाकेदार दौड़ के बाद आया । इस गोल ने घरेलू दर्शकों को जश्न के सागर में डुबो दिया और कनाडा ने अपनी घरेलू सरज़मीं पर पहला विश्व कप गोल किया
।
कनाडा ने इंजरी टाइम में एक जीत वाले गोल के लिए पूरी ताकत झोंक दी, जिसमें जोनाथन डेविड और तानी ओलुवासेई से गोल करने के मौके चूक गए और लारिन ने एक बार फिर गोल के करीब पहुंचकर दिल की धड़कनें बढ़ा दीं, लेकिन मैच आखिरकार 1-1 की बराबरी पर ही समाप्त हुआ ।
यह ड्रॉ कई मायनों में बेहद खास है:
कनाडा इससे पहले भी एक बड़ी उपलब्धि के करीब आ चुका था – जॉन हर्डमैन के नेतृत्व में 2022 की योग्यता रेस ने सबका ध्यान खींचा था, और टीम 2026 में बेहतर रैंकिंग और बड़ी उम्मीदों के साथ उतरी है । मार्श की टीम के पास अब एक नींव है, भले ही वो थोड़ी संकरी हो, जिस पर नॉकआउट चरण में पहुंचने का सपना टिका है।
2026 विश्व कप का आयोजन मेक्सिको और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित तीन देश मिलकर कर रहे हैं। हर मेज़बान देश ने 11-12 जून को अपना स्वतंत्र उद्घाटन समारोह आयोजित किया, जो पिछले टूर्नामेंटों की एकल-आयोजन परंपरा से बिल्कुल अलग है । कनाडा का अपनी पहचान पर आधारित शो – जिसे आयोजकों ने “एक सांस्कृतिक पच्चीकारी” कहा – का उद्देश्य मेक्सिको के 'पापेल पिकाडो' रूपांकन और संयुक्त राज्य अमेरिका के 'सुपर शाइनी, ग्लोइंग कप' अवधारणा के विपरीत एक छवि प्रस्तुत करना था
।
BMO फील्ड नॉकआउट दौर शुरू होने से पहले ग्रुप बी के और भी मैचों की मेज़बानी करेगा, जो उत्तरी अमेरिका के 16 अलग-अलग स्टेडियमों में खेले जाएंगे । यह सह-मेज़बानी प्रणाली, जिसमें पहली बार टीमों की संख्या 32 से बढ़ाकर 48 की गई है, इसे इतिहास का सबसे बड़ा विश्व कप बनाती है
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कनाडा के लिए अगला मैच बेहद अहम है। कतर या स्विट्ज़रलैंड के खिलाफ जीत टीम को पहली बार पुरुष टीम के लिए राउंड ऑफ 16 में पहुंचा सकती है। फिलहाल, 12 जून की बराबरी एक मामूली-सी लगने वाली, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जिसे हासिल करने में लगभग 40 साल का लंबा सफर तय हुआ।
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