उनके कार्यकाल के अंतिम वर्षों में साइबर खतरे तेजी से बदल रहे थे। सिंगापुर ने AI सुरक्षा के लिए दृष्टिकोण विकसित किए और quantum-safe cryptography यानी ऐसी कूटलेखन तकनीक की ओर संक्रमण की तैयारी शुरू की, जिसे भविष्य के क्वांटम कंप्यूटरों के संभावित खतरों से सुरक्षित माना जाता है। ये प्रयास AI-सक्षम हमलों और क्वांटम कंप्यूटिंग से जुड़े दीर्घकालिक जोखिमों को ध्यान में रखकर किए गए।
कोह का ध्यान केवल सरकारी प्रणालियों की सुरक्षा तक नहीं रहा। उन्होंने CyberSG Talent, Innovation and Growth Collaboration Centre और CyberSG R&D Programme Office के माध्यम से साइबर सुरक्षा प्रतिभा तथा नवाचार से जुड़े प्रयासों को आगे बढ़ाया। इन पहलों का उद्देश्य सिंगापुर में कुशल पेशेवरों की उपलब्धता, शोध क्षमता और साइबर सुरक्षा उद्योग को मजबूत करना था।
यह पारिस्थितिकी तंत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि राष्ट्रीय साइबर लचीलापन केवल सरकारी एजेंसियों से नहीं बनता। इसके लिए प्रशिक्षित विशेषज्ञों, शोध संस्थानों और ऐसी कंपनियों की भी जरूरत होती है जो सुरक्षा समाधान विकसित और लागू कर सकें।
कोह ने सिंगापुर की अंतरराष्ट्रीय साइबर-भागीदारी की रणनीति को भी आकार दिया। उनके कार्यकाल में सिंगापुर ने ICT सुरक्षा पर संयुक्त राष्ट्र के Group of Governmental Experts में भाग लिया और साइबर सुरक्षा से जुड़े UN Open-Ended Working Group की अध्यक्षता की। इससे देश को जिम्मेदार राज्य व्यवहार, साइबर मानदंडों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर होने वाली चर्चाओं में प्रभावशाली मंच मिला।
उन्होंने 2016 में Singapore International Cyber Week (SICW) की शुरुआत की। समय के साथ यह सम्मेलन सरकार, उद्योग और साइबर सुरक्षा क्षेत्र के नेताओं की एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय बैठक बन गया और सिंगापुर को साइबर नीति तथा उद्योग से जुड़ी वैश्विक चर्चाओं का महत्वपूर्ण केंद्र बनाने में मदद मिली।
सार्वजनिक सेवा और सिंगापुर की साइबर सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करने में योगदान के लिए कोह को 2017 में Public Administration Medal (Gold) और 2025 में Public Administration Medal (Gold) (Bar) से सम्मानित किया गया।
2018 में उन्हें पहला Billington CyberSecurity International Leadership Award मिला। इस सम्मान में सिंगापुर की साइबर सुरक्षा रणनीति शुरू करने और अंतरराष्ट्रीय साइबर सहयोग को आगे बढ़ाने में उनकी भूमिका को मान्यता दी गई।
ग्वेंडा फोंग ने 1 जुलाई 2026 को CSA की मुख्य कार्यकारी और साइबर सुरक्षा आयुक्त का पद संभाला। इससे पहले वे 1 अप्रैल से मुख्य कार्यकारी-नामित के रूप में संक्रमण प्रक्रिया में शामिल थीं। उनके पास CSA की नीति-निर्माण प्रक्रिया का प्रत्यक्ष अनुभव है, साथ ही तकनीक, सुरक्षा और डिजिटल समाज से जुड़े व्यापक सरकारी नेतृत्व का अनुभव भी है।
फोंग 2017 से 2022 तक CSA में कार्यरत रहीं और वहां उनकी अंतिम जिम्मेदारी Policy and Corporate Development की Assistant Chief Executive के रूप में थी। इस दौरान वे 2018 के Cybersecurity Act का मसौदा तैयार करने और उसे लागू करने, 2021 की Cybersecurity Strategy को अद्यतन करने तथा घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सिंगापुर के साइबर सुरक्षा प्रयासों का प्रतिनिधित्व करने से जुड़ी रहीं।
इसके बाद उन्होंने Infocomm Media Development Authority (IMDA) में Strategy, Plans and Digital Readiness की Assistant Chief Executive के रूप में काम किया। इस भूमिका में उन्होंने डिजिटल पहुंच और तकनीक अपनाने से जुड़े रणनीतिक तथा शोध कार्यों का नेतृत्व किया। जनवरी 2023 में वे Ministry of Digital Development and Information (MDDI) में Digital Society and Development की Deputy Secretary बनीं और मार्च 2026 तक इस पद पर रहीं। उनके कार्यक्षेत्र में Smart Nation 2.0 को समर्थन देने वाली Digital Society Strategy, डिजिटल समावेशन और सुरक्षा, ऑनलाइन नुकसान से निपटने के उपाय तथा व्यापक सूचना वातावरण शामिल थे।
फोंग का इससे पहले का सार्वजनिक सेवा अनुभव तकनीक, रक्षा और सामाजिक नीति तक फैला है। उन्होंने Defence Science and Technology Agency, Ministry of Defence और Ministry of Health में भी जिम्मेदारियां निभाईं। सार्वजनिक प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने Stanford University से Electrical Engineering में स्नातक और परास्नातक डिग्रियां तथा University College London से International Planning में मास्टर डिग्री हासिल की है। उन्हें 2025 में Public Administration Medal (Silver) भी मिला।
फोंग के पास CSA के कानूनों और रणनीति की पहले से जानकारी है। इसके साथ डिजिटल नीति, ऑनलाइन सुरक्षा और सरकार के विभिन्न विभागों के बीच सुरक्षा-समन्वय का अनुभव भी है। इसलिए उन्हें कोई नई बनी संस्था नहीं, बल्कि कोह के कार्यकाल में तैयार की गई राष्ट्रीय एजेंसी और मजबूत अंतरराष्ट्रीय पहचान विरासत में मिली है। अब उनकी चुनौती इस आधार को AI-सक्षम हमलों, बदलती महत्वपूर्ण अवसंरचना और भविष्य की तकनीकी चुनौतियों के दौर में आगे बढ़ाने की होगी।