70 लैप की इस रेस की शुरुआत में ही ऑटोमेटिक ब्लू फ्लैग सिस्टम (जो पीछे आ रही तेज कार के बारे में धीमी कारों को सचेत करता है) ने गड़बड़ी दिखानी शुरू कर दी। लैप की गई कारों को लक्षित ब्लू फ्लैग भेजने के बजाय, सिस्टम ने स्टीयरिंग व्हील और डैश पैनल पर बिना ड्राइवर नंबर के बेतरतीब नीले सिग्नल दिखाने शुरू कर दिए । FIA ने इस ऑटोमेटेड सिस्टम को तुरंत बंद कर दिया, जिससे ड्राइवरों को ट्रैकसाइड फ्लैग पैनल और अपने इंजीनियर्स के मैनुअल रेडियो कॉल पर निर्भर रहना पड़ा । रेस विजेता लैंडो नॉरिस और तीसरे स्थान पर रहे किमी एंटोनेली ने बाद में खुलासा किया कि उन्हें लीड लैप पर रहते हुए गलती से ब्लू फ्लैग दिखाए गए ।
सबसे गंभीर घटना 39वें लैप में हुई जब रेस लीडर ऑस्कर पियास्त्री (Oscar Piastri) टर्न 3 के पास कार्लोस सैन्ज़ (Carlos Sainz) की विलियम्स को लैप करने की कोशिश कर रहे थे। सैन्ज़, फर्नांडो अलोंसो के साथ पोजीशन के लिए लड़ रहे थे और उनके पास पियास्त्री ब्लाइंड स्पॉट में थे, इसी दौरान दोनों में टक्कर हो गई । इस टक्कर ने पियास्त्री का फ्रंट विंग तोड़ दिया, टायर पंचर कर दिया और कार के फ्लोर को भी गंभीर नुकसान पहुंचाया, जिसके चलते उन्हें 56वें लैप में रेस से बाहर होना पड़ा ।
पियास्त्री ने सैन्ज़ की जागरूकता की कमी को 'अस्वीकार्य' बताया और उनसे 'आईने में देखने' को कहा । वहीं, सैन्ज़ ने सिस्टम की खराबी को 'अच्छा बहाना' करार दिया । स्टीवर्ड्स ने सैन्ज़ को इस टक्कर के लिए 'पूरी तरह जिम्मेदार' ठहराया, लेकिन सिस्टम की खराबी को एक राहत देने वाला कारक मानते हुए मानक 10 सेकंड के बजाय केवल 5 सेकंड का पेनल्टी दिया ।
कार्लोस सैन्ज़ को पियास्त्री के साथ टक्कर के लिए पांच सेकंड का टाइम पेनल्टी मिला । FIA स्टीवर्ड्स ने समझाया कि टक्कर के लिए मानक पेनल्टी 10 सेकंड है, लेकिन खराब ब्लू फ्लैग सिस्टम को एक राहत देने वाली परिस्थिति माना गया ।
हास (Haas) के ओलिवर बेयरमैन (Oliver Bearman) को अंतर्राष्ट्रीय खेल संहिता के परिशिष्ट H, अनुच्छेद 2.5.5 e) के तहत, जब इसाक हज्जर (Isack Hadjar) उनके पास आ रहे थे, तब ब्लू फ्लैग को नजरअंदाज करने के लिए अलग से पांच सेकंड का पेनल्टी दिया गया । बेयरमैन 11 ऐसी लाइट पैनलों से गुज़रे थे जो ब्लू फ्लैग दिखा रही थीं । इस पेनल्टी के कारण वे अंतिम वर्गीकरण में 17वें से 19वें स्थान पर आ गए । बेयरमैन ने बाद में इस स्थिति को 'दुःस्वप्न' बताते हुए कहा, 'आप इनफील्ड से गुज़रते हैं, आपके पास आईने में देखने का समय नहीं होता और मूल रूप से हर लैप में मुझे ब्लू फ्लैग मिलता था, तब भी जब मुझे ब्लू फ्लैग नहीं मिलना चाहिए था' ।
रेस के बीच में, मैक्स वेरस्टैपेन (Max Verstappen) रेसिंग बुल्स की जोड़ी लियाम लॉसन (Liam Lawson) और अरविद लिंडब्लैड (Arvid Lindblad) से मिले, जो आपस में पोजीशन के लिए लड़ रहे थे। ट्रैकसाइड पर ब्लू फ्लैग पैनल चमकने के बावजूद, वेरस्टैपेन के पास आने पर ये दोनों ड्राइवर लड़ते रहे, जिससे वेरस्टैपेन का समय बर्बाद हुआ । वेरस्टैपेन ने गुस्से में रेडियो पर उन्हें 'मोरन' (बेवकूफ) कहा और उन पर पेनल्टी लगाने की मांग की ।
बाद में लॉसन और लिंडब्लैड दोनों ने समझाया कि सिस्टम खराब होने के कारण उन्हें अपने स्टीयरिंग व्हील या डैश पैनल पर उचित ब्लू फ्लैग चेतावनी नहीं मिली थी । लिंडब्लैड ने कहा, 'उन्होंने कभी नंबर नहीं दिखाए। वे सिर्फ एक नीला झंडा दिखा रहे थे, जो सबसे उपयोगी संदेश नहीं था' । लॉसन ने कहा, 'मैं बस रास्ते में नहीं आने की कोशिश कर रहा था' ।
रॉल्फ शूमाकर (Ralf Schumacher) ने ज़ैंडवूर्ट में अतिरिक्त पेनल्टी की मांग की - पूर्व F1 ड्राइवर ने कहा कि सैन्ज़ को मिला पांच सेकंड का पेनल्टी पर्याप्त नहीं है। यह देखते हुए कि टक्कर से पहले सैन्ज़ सात ब्लू फ्लैग चेतावनियों को पार कर चुके थे, शूमाकर ने तर्क दिया कि डच ग्रां प्री (ज़ैंडवूर्ट) में उन्हें ग्रिड पेनल्टी का सामना करना चाहिए ताकि 'एक मिसाल कायम हो' ।
डेविड कूल्टहार्ड (David Coulthard) का ड्राइवरों और टीमों पर निशाना - पूर्व ड्राइवर ने कहा कि ब्लू फ्लैग की अफरा-तफरी को संभालने का ग्रिड का तरीका 'काफी अच्छा नहीं' था। उन्होंने कहा कि सिस्टम की खराबी एक योगदान कारक थी, लेकिन ड्राइवरों और उनके इंजीनियरों पर परिस्थितिजन्य जागरूकता की जिम्मेदारी अब भी बनी हुई थी ।
टोटो वोल्फ (Toto Wolff) ने पिट वॉल इंजीनियर्स को 'टेलीटबीज़' कहा - मर्सिडीज टीम प्रिंसिपल ने यह टिप्पणी प्रतिद्वंद्वी पिछली टीमों के इंजीनियरों पर की, जिनके ड्राइवरों ने किमी एंटोनेली को ब्लॉक किया। वोल्फ ने तर्क दिया कि ऑटोमेटेड सिस्टम के बिना भी, इंजीनियरों को अपने ड्राइवरों को किनारे हटने के लिए कहना चाहिए था, और उनकी इस विफलता को 'शर्मनाक' बताया । नॉरिस और एंटोनेली दोनों ने कहा कि लीड लैप पर रहते हुए उन्हें गलती से ब्लू फ्लैग दिए गए ।
ऑटोमेटेड सिस्टम पर नई बहस - रेस वीकेंड ने इस सवाल को फिर से खोल दिया है कि क्या F1 इलेक्ट्रॉनिक फ्लैग चेतावनियों पर बहुत अधिक निर्भर हो गया है। ऑटोमेटिक सिस्टम के डाउन होने के साथ, ड्राइवरों को ट्रैकसाइड फ्लैग पैनल और मैनुअल रेडियो कॉल पर निर्भर रहना पड़ा, जिससे व्यापक भ्रम और 'पुराने जमाने' की मार्शलिंग पर वापसी हुई ।
2026 हंगेरियन GP ने महत्वपूर्ण रेस-कंट्रोल तकनीक के लिए अधिक मजबूत बैकअप सिस्टम की मांगों को और तेज कर दिया है। हालांकि मैनुअल मार्शलिंग सिस्टम ने अंततः काम किया, लेकिन देरी और भ्रम के कारण एक रेस लीडर को प्रतिस्पर्धा से बाहर होना पड़ा और कई ड्राइवरों को अराजक रेस में दंडित किया गया, जिसे कार्यशील ऑटोमेटेड चेतावनियों या बेहतर आकस्मिक प्रोटोकॉल के साथ अलग तरीके से प्रबंधित किया जा सकता था।