फरवरी के आखिरी हफ्तों में, अमेरिकी नौसेना के P-8 पोसाइडन निगरानी विमान सक्रियता से इलाके की निगरानी कर रहे थे और दो विमानवाहक युद्धपोत समूह (कैरियर स्ट्राइक ग्रुप) इस तंग समुद्री गलियारे की ओर बढ़ रहे थे, जहां से रोज़ाना करीब 2 करोड़ बैरल कच्चा तेल गुज़रता है । 28 फरवरी, 2026 को अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर हमला कर दिया। जवाब में, ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जो दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग 20% परिवहन करता है
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टोटलएनर्जी की ट्रेडिंग डेस्क की प्रतिक्रिया तेज़ और आक्रामक थी। मार्च 2026 में, कंपनी की ट्रेडिंग यूनिट ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और ओमान से मई में लोड होने वाले लगभग हर उपलब्ध कच्चे तेल के कार्गो को खरीद लिया। यह संख्या लगभग 70 शिपमेंट्स (जहाज़ों में भरा माल) थी, जो फरवरी में कंपनी की खरीद से दोगुनी से भी अधिक थी । इसे परिप्रेक्ष्य में रखने के लिए, पूरी अवधि में वैश्विक स्तर पर उस ग्रेड के कुल मात्र 347 शिपमेंट का व्यापार हुआ था
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इस रणनीति का सीधा-सादा तर्क था: जब होर्मुज जलडमरूमध्य टैंकरों के आवागमन के लिए बंद हो जाएगा, तो वह कच्चा तेल बेहद कीमती हो जाएगा जिसे इस जलडमरूमध्य से होकर नहीं गुज़रना पड़ता—खासकर यूएई और ओमान का तेल, जो खाड़ी के बाहर स्थित बंदरगाहों से लोड होता है। टोटलएनर्जी ने अपनी भौतिक खरीद के जोखिम को कम करने और बढ़ती कीमतों पर रिटर्न को बढ़ाने के लिए वायदा, विकल्प और स्वैप जैसे 'पेपर' ऑयल मार्केट उपकरणों का भी इस्तेमाल किया ।
जब ईरान युद्ध शुरू हुआ और होर्मुज़ यातायात के लिए दुर्गम हो गया, तो यह जुआ शानदार ढंग से सफल रहा। टोटलएनर्जी ने उन माल को भारी प्रीमियम पर बेचा और अकेले इस व्यापार से एक अरब डॉलर (लगभग 8,500 करोड़ रुपये) से अधिक का मुनाफा कमाया ।
टोटलएनर्जी ने 2026 की पहली तिमाही में 5.4 अरब डॉलर का समायोजित शुद्ध लाभ (एडजस्टेड नेट इनकम) दर्ज किया, जो साल-दर-साल 29% की भारी वृद्धि थी और विश्लेषकों के 4.98 अरब डॉलर के औसत अनुमान से आराम से अधिक थी । कंपनी ने इस प्रदर्शन का श्रेय "बहुत मजबूत तेल कारोबार परिणामों" और ईरान युद्ध के कारण बढ़ी तेल कीमतों को दिया
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गौर करने लायक बात यह है कि यह शानदार मुनाफा तब आया जब युद्ध के कारण कंपनी के अपने वैश्विक उत्पादन का 15% हिस्सा—लगभग 100,000 बैरल प्रतिदिन तेल के बराबर—ठप पड़ा हुआ था । ट्रेडिंग से हुए अप्रत्याशित लाभ ने उत्पादन घाटे की भरपाई कर ही दी। जवाब में, टोटलएनर्जी ने अपने अंतरिम लाभांश (डिविडेंड) में 6% की वृद्धि की और अपने शेयर बायबैक (शेयरों की पुनर्खरीद) कार्यक्रम को दोगुना कर दिया
। यूरोप में कंपनी का रिफाइनिंग मार्जिन 11.40 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो एक साल पहले 3.90 डॉलर के मार्जिन से 192% की ज़बरदस्त छलांग थी।
भारी-भरकम मुनाफे ने जल्द ही राजनीतिक आग भड़का दी। वामपंथी पार्टी ला फ्रांस इंसूमीज़ के नेता और फ्रांस की नेशनल असेंबली की वित्त समिति के अध्यक्ष, एरिक कोकरेल ने सीईओ पुआन्ने को 17 जून, 2026 को संसद में पेश होने के लिए तलब किया, ताकि वह "युद्ध के सुपर-प्रॉफिट" और कंपनी के कर दायित्वों पर सवालों का जवाब दे सकें ।
कोकरेल ने एक ऐसे तथ्य पर रोशनी डाली जिसने जनता के आक्रोश को और भड़का दिया: टोटलएनर्जी ने 2025 में फ्रांस में कॉर्पोरेट आयकर के रूप में शून्य यूरो का भुगतान किया था । इस खुलासे ने वामपंथी दलों को नया हथियार दे दिया, जो लंबे समय से तर्क दे रहे थे कि बहुराष्ट्रीय ऊर्जा कंपनियों पर संकट के दौरान निकाले जाने वाले मुनाफे की तुलना में बहुत कम कर लगता है।
फ्रांसीसी प्रधानमंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने अप्रैल के आखिर में कंपनी का बचाव किया और 'विंडफॉल टैक्स' (अप्रत्याशित लाभ पर कर) की मांगों का विरोध किया । लेकिन विपक्षी दल अपनी मुहिम पर डटे रहे। ग्रीन पार्टी ने तेल और गैस मुनाफे पर 'असाधारण एकजुटता योगदान' के लिए एक बिल पेश किया, जबकि सोशलिस्ट पार्टी ने भी इसी तरह के प्रस्ताव की घोषणा की
। ग्रीन पार्टी की नेता मरीन टोंडलीयर ने पुआन्ने को "संकट का फायदा उठाने वाला" (crisis profiteer) करार देते हुए कहा कि वह "घिनौनी ब्लैकमेलिंग" कर रहे हैं
। वहीं सोशलिस्ट नेता पियरे जूवे ने पुआन्ने की धमकियों को "गैर-ज़िम्मेदाराना" और "देशद्रोही" बताया
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सीईओ पुआन्ने ने इसका सीधा और सख़्त जवाब दिया। मई 2026 की शुरुआत में, उन्होंने क्षेत्रीय प्रेस को दिए एक साक्षात्कार में चेतावनी दी कि अगर फ्रांस सरकार ने रिफाइनरी मुनाफे पर कोई सुपर-टैक्स लगाया, तो टोटलएनर्जी अपने फ्रांसीसी पेट्रोल पंपों पर कीमतों की सीमा—जो पेट्रोल को 1.99 यूरो प्रति लीटर से नीचे रखने का एक लोकप्रिय कदम था—को समाप्त कर देगी ।
पुआन्ने ने कहा, "हमारी रिफाइनरियों पर अतिरिक्त कर की स्थिति में, जो अक्सर घाटे में भी रहती हैं, हम फ्रांस में अपने स्टेशनों पर मूल्य सीमा बनाए नहीं रख पाएंगे।" । उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह "बहुत संभावित" है कि कंपनी 2025 में शुरू किए गए उस सरचार्ज के दायरे में आएगी, जो 1.5 अरब यूरो से अधिक राजस्व वाली बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर लागू होता है
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इस धमकी ने फ्रांस सरकार को मुश्किल स्थिति में डाल दिया। ईंधन मूल्य सीमा, जिसे पहली बार 2023 के ऊर्जा संकट के दौरान परखा गया था और जिसे 12 मार्च, 2026 को फिर से लागू किया गया था, एक बहुत ही दृश्यमान उपभोक्ता संरक्षण उपाय बन गई थी । इसके जारी रहने को कर विवाद से जोड़कर, पुआन्ने ने प्रभावी रूप से कानून निर्माताओं को एक खुली चुनौती दी कि यदि वे नए कर लगाते हैं, तो उन्हें फ्रांसीसी नागरिकों को पेट्रोल पंपों पर ऊंची कीमतों के रूप में इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।
सरकार के भीतर भी इस मुद्दे पर मतभेद साफ थे। लघु और मध्यम उद्यम मंत्री सर्ज पापिन ने कहा कि वह टोटलएनर्जी के युद्धकालीन मुनाफे पर कर लगाने के "पक्ष में नहीं" हैं, यह तर्क देते हुए कि "वह एक ईंधन वितरक के रूप में अपना काम कर रहे हैं।" यह रुख अर्थव्यवस्था मंत्री रोलां लेस्क्यूर के अधिक सतर्क बयानों से कहीं अधिक सख्त था ।
जब पुआन्ने ने ले फिगारो को दिए इंटरव्यू में यह कहा कि "हमारा मुनाफा आसमान से नहीं गिरता," तो 17 जून की संसदीय सुनवाई से पहले ही विवाद और गहरा गया । इस सुनवाई में न केवल कंपनी की व्यापारिक रणनीति पर सवाल उठने की उम्मीद है, बल्कि इस व्यापक सवाल पर भी बहस होगी कि क्या फ्रांस की कर प्रणाली भू-राजनीतिक व्यवधानों से होने वाले अप्रत्याशित लाभ को पर्याप्त रूप से पकड़ती है।
यह पूरा प्रकरण कमोडिटी बाजारों में सूचना की विषमता पर गंभीर सवाल उठाता है। टोटलएनर्जी ने ज़ोर देकर कहा कि वह केवल "खुद के लिए और अपने ग्राहकों के लिए आपूर्ति सुनिश्चित करने" का काम कर रही थी और उसने यह भी नोट किया कि उसके वैश्विक हाइड्रोकार्बन उत्पादन का लगभग 15% प्रत्यक्ष रूप से जोखिम में था ।
लेकिन इस लाभ का पैमाना—जो गोपनीय खुफिया जानकारी के बजाय सार्वजनिक रूप से युद्धपोतों की आवाजाही पर नज़र रखने वाले व्यापारियों द्वारा उत्पन्न हुआ—ने आलोचकों को यह सवाल करने पर मजबूर कर दिया है कि क्या मौजूदा नियम सशस्त्र संघर्ष की आशंका और उससे लाभ उठाने से प्राप्त मुनाफे को पर्याप्त रूप से संबोधित करते हैं। जैसे-जैसे पुआन्ने संसद का सामना करने की तैयारी कर रहे हैं, इस मामले का नतीजा न केवल टोटलएनर्जी के कर बिल को आकार देगा, बल्कि भू-राजनीतिक अस्थिरता के इस दौर में अप्रत्याशित कराधान पर पूरी यूरोपीय बहस को भी एक नई दिशा देगा।
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