4 जून, 2026 को, यू.एस. सुप्रीम कोर्ट ने 8 1 से फैसला सुनाया कि FCC अपनी आंतरिक प्रक्रिया का उपयोग करके वायरलेस कैरियर्स से लगभग 200 मिलियन डॉलर का जुर्माना वसूल सकता है, क्योंकि भविष्य में एक संघीय अदालत में जूरी ट्रा...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What was the U.S. Supreme Court's 8-1 ruling on June 4, 2026, backing the FCC's in-house system for levying fines against wireless carriers. Article summary: On June 4, 2026, the U.S. Supreme Court ruled **8–1** in *FCC v. AT&T, Inc.* and the consolidated *Verizon Communications, Inc. v. FCC*, upholding the Federal Communications Commission's in-house system for seeking monet. Topic tags: general, government, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "AT&T and Verizon said they were deprived of their right to a jury trial when the agency penalized the companies for failing to protect consumer information. The Supreme Court on Th" source context "Supreme Court Backs F.C.C. Power to Levy Fines Against Cellphone Carriers - The New York Times" Reference
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है जो फेडरल कम्युनिकेशंस कमीशन (FCC) की एक प्राइवेसी निगरानीकर्ता के रूप में कार्य करने की क्षमता को मजबूती प्रदान करता है। 4 जून, 2026 को 8-1 के बहुमत से आए इस निर्णय में, अदालत ने एजेंसी की मौद्रिक दंड लगाने की आंतरिक प्रणाली को बरकरार रखा। यह मामला तब सामने आया जब देश की सबसे बड़ी वायरलेस कंपनियों पर ग्राहकों की रियल-टाइम लोकेशन डेटा को उनकी सहमति के बिना साझा करने के लिए लगभग 200 मिलियन डॉलर (लगभग 1,660 करोड़ रुपये) का जुर्माना लगाया गया था ।
समेकित मामले, FCC बनाम AT&T, Inc. और Verizon Communications, Inc. बनाम FCC, इस बात की एक महत्वपूर्ण परीक्षा थे कि क्या किसी प्रशासनिक एजेंसी की प्रवर्तन कार्यवाही सातवें संशोधन (Seventh Amendment) के तहत जूरी द्वारा मुकदमे के अधिकार का उल्लंघन करती है। अदालत ने फैसला सुनाया कि ऐसा नहीं है।
कैरियर्स का केंद्रीय तर्क सीधा था: FCC ने अपने करोड़ों डॉलर के जुर्माने जारी करके अभियोजक, न्यायाधीश और जूरी तीनों की भूमिका निभाई, और कंपनियों को अदालत में अपना पक्ष रखने के अधिकार से वंचित कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने इस बात से असहमति जताते हुए एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक अंतर स्पष्ट किया।
बहुमत के लिए लिखते हुए, चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कहा कि FCC के जुर्माना आदेशों ने कैरियर्स के कानूनी दायित्वों का निश्चित रूप से समाधान नहीं किया। महत्वपूर्ण रूप से, एक पक्ष जो FCC जुर्माना भरने से इनकार करता है, उसे तुरंत ऐसा करने के लिए मजबूर नहीं किया जाता। न्याय विभाग (Department of Justice) को जुर्माना वसूलने के लिए संघीय अदालत में एक अलग प्रवर्तन कार्रवाई लानी होगी। उस चरण में, 47 यू.एस.सी. §504(a) के तहत, कैरियर को एक जूरी के समक्ष पूर्ण डि नोवो (नए सिरे से) मुकदमे का अधिकार है ।
जैसा कि चीफ जस्टिस रॉबर्ट्स ने लिखा, "संशोधन केवल यह अपेक्षा करता है कि, कानूनी अधिकारों और दायित्वों के निर्णायक रूप से 'पता लगाए और निर्धारित' किए जाने से पहले... एक पक्ष के पास इस बात पर जोर देने का मौका हो कि एक जूरी 'तथ्य के मुद्दों का अंतिम निर्धारण' करे" । क्योंकि FCC की योजना जूरी तक पहुंचने का वह अंतिम मार्ग प्रदान करती है, अदालत ने इसे संवैधानिक पाया।
इस निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए, अदालत को इस मामले को अपनी ही मिसाल से सावधानीपूर्वक अलग करना पड़ा। कैरियर्स ने 2024 के SEC बनाम जार्केसी मामले में अदालत के फैसले पर बहुत अधिक भरोसा किया, जिसने सिक्योरिटीज एंड एक्सचेंज कमीशन (SEC) के दीवानी-दंड मामलों के लिए आंतरिक न्यायाधिकरणों के उपयोग पर लगाम लगाई थी ।
अदालत ने फैसला सुनाया कि दोनों स्थितियां समान नहीं थीं। SEC की प्रणाली ने उसे बिना किसी आर्टिकल III अदालत के शुरुआती रास्ते के, अनिवार्य रूप से आंतरिक रूप से दंड का न्यायनिर्णयन करने और लागू करने की अनुमति दी। इसके विपरीत, FCC की जुर्माना प्रक्रिया स्व-निष्पादित (self-executing) नहीं है। आयोग एक जुर्माना आदेश जारी करता है, लेकिन उसे दंड को प्रभावी बनाने के लिए न्यायिक शाखा की ओर रुख करना होगा। एजेंसी आरोप लगाती है लेकिन खुद भुगतान के लिए बाध्य नहीं कर सकती—यही अलगाव FCC की प्रणाली की संवैधानिक बचत की कुंजी थी ।
जस्टिस क्लेरेंस थॉमस, एकमात्र असहमति रखने वाले जज, ने एकदम अलग दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने तर्क दिया कि बहुमत का तर्क एक कानूनी कल्पना मात्र था। उनके लिए, FCC का आदेश महज एक सुझाव नहीं था। उन्होंने कहा कि आयोग के अपने नियम जुर्माना आदेश को एक ऐसे दंड के रूप में मानते हैं जिसे एक निर्धारित तिथि तक "पूर्ण रूप से भुगतान किया जाना आवश्यक" है, और कैरियर्स को अनुपालन न करने पर वैधानिक दंड का सामना करना पड़ता है ।
थॉमस ने इस विचार को खारिज कर दिया कि कंपनियों के पास कोई सार्थक विकल्प था। उन्होंने बताया कि AT&T और Verizon ने "विरोध के तहत भुगतान किया और अपना भुगतान वापस पाने के लिए मुकदमा दायर किया," और उन्होंने बहुमत पर आरोप लगाया कि वे "AT&T और Verizon को एक सरकारी आदेश का पालन करने के लिए दंडित कर रहे हैं जिसे उन्होंने सद्भावना से अनिवार्य माना" । थॉमस के लिए, आदेश का व्यावहारिक प्रभाव बिना जूरी ट्रायल के संपत्ति का तत्काल, जबरदस्ती अधिग्रहण था।
यह उच्च-स्तरीय संवैधानिक लड़ाई एक विशाल प्राइवेसी प्रवर्तन कार्रवाई में निहित थी। FCC ने निर्धारित किया कि चार प्रमुख वायरलेस कैरियर्स संवेदनशील ग्राहक भौगोलिक-स्थान डेटा को अनधिकृत पहुंच से बचाने में विफल रहे थे, और प्रभावी रूप से इसे तीसरे पक्ष को बेचने की अनुमति दे रहे थे। FCC ने जो जुर्माना लगाने की मांग की, वह काफी बड़ा था :
संयुक्त रूप से, ये जुर्माना लगभग 200 मिलियन डॉलर था, जो FCC के इतिहास में सबसे बड़े प्राइवेसी जुर्मानों में से एक है ।
उच्चतम न्यायालय तक पहुंचने से पहले, ये मामले संघीय अपीलीय प्रणाली के माध्यम से अलग-अलग रास्तों पर चले, जिससे एक सर्किट विभाजन (circuit split) पैदा हो गया जिसने व्यावहारिक रूप से सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की।
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4 जून, 2026 को, यू.एस. सुप्रीम कोर्ट ने 8 1 से फैसला सुनाया कि FCC अपनी आंतरिक प्रक्रिया का उपयोग करके वायरलेस कैरियर्स से लगभग 200 मिलियन डॉलर का जुर्माना वसूल सकता है, क्योंकि भविष्य में एक संघीय अदालत में जूरी ट्रा...
4 जून, 2026 को, यू.एस. सुप्रीम कोर्ट ने 8 1 से फैसला सुनाया कि FCC अपनी आंतरिक प्रक्रिया का उपयोग करके वायरलेस कैरियर्स से लगभग 200 मिलियन डॉलर का जुर्माना वसूल सकता है, क्योंकि भविष्य में एक संघीय अदालत में जूरी ट्रा... चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने 2024 के SEC बनाम जार्केसी मामले से इसे अलग बताते हुए तर्क दिया कि FCC के आदेश तत्काल भुगतान के लिए बाध्य नहीं करते, जबकि जस्टिस क्लेरेंस थॉमस अकेले असहमति रखने वाले जज थे।
यह निर्णय एक सर्किट विभाजन को हल करता है, जिसने पांचवीं सर्किट के उस फैसले को पलट दिया जिसमें जुर्माने को असंवैधानिक ठहराया गया था और दूसरी सर्किट के उस फैसले को बरकरार रखा जिसने इसे सही ठहराया था।