लेकिन इस सहमति का मतलब यह नहीं था कि ASEAN के पास अब कोई तैयार आपात बटन है जिसे तुरंत दबाया जा सके। ASEAN अध्यक्ष मार्कोस के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि तेल-साझेदारी योजना की कार्यपद्धति अभी तय नहीं हुई थी। यानी सेबू से एक राजनीतिक संदेश और तेज़ अनुमोदन की अपील ज़रूर निकली, पर कोई चालू संकट-प्रबंधन मशीनरी नहीं।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए अहम समुद्री मार्ग माना जाता है, और उसके व्यवधान ने तेल-आयात पर निर्भर अर्थव्यवस्थाओं की चिंता बढ़ा दी। Reuters-आधारित रिपोर्टों में ASEAN को 11 देशों का, करीब 70 करोड़ लोगों वाला ब्लॉक बताया गया है, जो ईरान युद्ध के बाद हॉर्मुज़ बंद होने और ऊर्जा आपूर्ति बाधित होने से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में गिना जा रहा है।
मामला सिर्फ तेल का नहीं है। फिलीपींस की विदेश सचिव मा. थेरेसा लाज़ारो, जो सेबू में ASEAN विदेश मंत्रियों की बैठक की अध्यक्षता कर रही थीं, ने कहा कि संघर्ष ने ऊर्जा प्रवाह, व्यापार मार्गों और खाद्य आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित किया है; इसके साथ परिवहन, पर्यटन और पश्चिम एशिया में ASEAN नागरिकों पर भी असर पड़ा है।
नेताओं की बैठक से पहले हुई मंत्री-स्तरीय बैठकों में भी ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने पर चर्चा केंद्रित रही। यही वजह है कि हॉर्मुज़ संकट ASEAN के लिए सिर्फ विदेश नीति का मुद्दा नहीं, बल्कि रोज़मर्रा के खर्च, माल ढुलाई और खाद्य कीमतों से जुड़ा आर्थिक जोखिम बन गया।
क्योंकि कोई तत्काल ASEAN-व्यापी संकट योजना घोषित नहीं हुई, छोटे समय की प्रतिक्रिया अभी अधिकतर राष्ट्रीय स्तर पर है। Anadolu की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिण-पूर्व एशियाई सरकारें हॉर्मुज़ व्यवधान से जुड़े वैश्विक ऊर्जा झटके के असर को सीमित करने की कोशिश कर रही हैं; उदाहरण के तौर पर फिलीपींस में ऊर्जा-आपात तैयारी और वियतनाम तथा थाईलैंड में रिमोट-वर्क को बढ़ावा देने जैसे कदमों का उल्लेख किया गया।
इन प्रतिक्रियाओं को मोटे तौर पर तीन हिस्सों में समझा जा सकता है:
ASEAN की सार्वजनिक भाषा अब भी तनाव घटाने पर केंद्रित है। अप्रैल में ASEAN विदेश मंत्रियों ने अमेरिका और ईरान से बातचीत जारी रखने की अपील की थी, ताकि संघर्ष का स्थायी अंत और क्षेत्रीय स्थिरता हासिल हो सके। AJP की रिपोर्ट के अनुसार, ASEAN ने हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवाजाही बहाल करने और स्थायी समाधान की भी मांग की।
यह रुख सेबू सम्मेलन के सीमित नतीजे से मेल खाता है। ASEAN आर्थिक नुकसान घटाने, सदस्य देशों की एकता दिखाने और सुरक्षित समुद्री आवाजाही की मांग करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उपलब्ध रिपोर्टिंग से यह संकेत नहीं मिलता कि ब्लॉक हॉर्मुज़ में कोई सीधी सुरक्षा भूमिका निभाने जा रहा है।
सेबू की घोषणा सिर्फ बयान बनकर रह जाएगी या सचमुच क्षेत्रीय सुरक्षा जाल में बदलेगी, यह तीन बातों पर निर्भर करेगा:
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