तीन जजों की पीठ ने 24 पन्नों का फैसला सुनाते हुए कंपनियों की अपील खारिज कर दी । सबसे अहम बात यह है कि अदालत ने यह तय नहीं किया कि सेक्शन 230 (Communications Decency Act) अंततः इन कंपनियों को इन दावों से बचाएगा या नहीं। बल्कि, अदालत ने कहा कि कंपनियों की अपील प्रक्रियात्मक रूप से जल्दबाजी थी — सेक्शन 230 के बचाव का दावा मुकदमे के दौरान किया जाना चाहिए, न कि मुकदमे को जड़ से खत्म करने के लिए शुरुआती चरण में ही इस्तेमाल किया जाए । अदालत ने सेक्शन 230 को 'पूर्ण छूट' (blanket immunity) नहीं, बल्कि एक 'देयता बचाव' (liability defense) करार दिया, जिसे मुकदमे के दौरान साबित करना होगा ।
Meta, Google, TikTok और Snap ने तर्क दिया कि सेक्शन 230 इंटरैक्टिव कंप्यूटर सेवाओं (जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म) को तीसरे पक्ष (यूज़र्स) की सामग्री के 'प्रकाशक' के रूप में मुकदमों से बचाता है । उनका कहना था कि 'आदी बनाने' के ये आरोप असल में इस बात से जुड़े हैं कि उन्होंने कैसे सामग्री को प्रकाशित और क्यूरेट किया, जो पूरी तरह से सेक्शन 230 के दायरे में आता है । कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि प्लेटफॉर्म डिज़ाइन के फैसले भी उनकी प्रकाशन स्वतंत्रता का हिस्सा हैं। अलग से, Meta ने 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा लाए गए मुकदमे को टालने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने ठुकरा दिया ।
वादी — जिनमें माता-पिता, स्कूल डिस्ट्रिक्ट और राज्यों के अटॉर्नी जनरल शामिल हैं — ने तर्क दिया कि ये मुकदमे किसी तीसरे पक्ष की पोस्ट की गई सामग्री के बारे में नहीं हैं, बल्कि प्लेटफॉर्म के डिज़ाइन के बारे में हैं: एल्गोरिदम, नोटिफिकेशन सिस्टम, इनफ़िनिट स्क्रोल और अन्य ऐसी सुविधाएँ जो जानबूझकर आदी बनाने वाली हैं । उन्होंने दलील दी कि कंपनियों की अपील एक प्रक्रियात्मक चाल थी और सेक्शन 230 एक 'सकारात्मक बचाव' (affirmative defense) है जो मुकदमे में उठाया जाएगा, न कि मुकदमे को रोकने का कोई अधिकार क्षेत्रीय (jurisdictional) हथियार । Ninth Circuit के फैसले में यह भी कहा गया कि कांग्रेस ने सेक्शन 230 को प्लेटफॉर्म को यूज़र्स द्वारा पोस्ट की गई चीज़ों से बचाने के लिए बनाया था — न कि कंपनियों को इस बात से बचाने के लिए कि उन्होंने बच्चों को आदी बनाने वाले प्लेटफॉर्म बनाए ।
यह फैसला 3,000 से अधिक समेकित मुकदमों (जिनमें कैलिफोर्निया के उत्तरी जिले का मल्टी-डिस्ट्रिक्ट लिटिगेशन भी शामिल है) को डिस्कवरी और संभावित मुकदमे की ओर बढ़ने का रास्ता साफ करता है । कंपनियां अब भी मुकदमे के दौरान सेक्शन 230 को एक बचाव के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं, लेकिन वे मुकदमों को सबसे शुरुआती चरण में ही खारिज कराने की अपनी कोशिश में हार गई हैं। यह फैसला एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक बदलाव है जो भविष्य में इसी तरह के मामलों के लिए कानूनी नजीर बन सकता है ।
तीन जजों की पीठ ने 24 पन्नों का फैसला सुनाते हुए कंपनियों की अपील खारिज कर दी । सबसे अहम बात यह है कि अदालत ने यह तय नहीं किया कि सेक्शन 230 (Communications Decency Act) अंततः इन कंपनियों को इन दावों से बचाएगा या नहीं। बल्कि, अदालत ने कहा कि कंपनियों की अपील प्रक्रियात्मक रूप से जल्दबाजी थी — सेक्शन 230 के बचाव का दावा मुकदमे के दौरान किया जाना चाहिए, न कि मुकदमे को जड़ से खत्म करने के लिए शुरुआती चरण में ही इस्तेमाल किया जाए । अदालत ने सेक्शन 230 को 'पूर्ण छूट' (blanket immunity) नहीं, बल्कि एक 'देयता बचाव' (liability defense) करार दिया, जिसे मुकदमे के दौरान साबित करना होगा ।
Meta, Google, TikTok और Snap ने तर्क दिया कि सेक्शन 230 इंटरैक्टिव कंप्यूटर सेवाओं (जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म) को तीसरे पक्ष (यूज़र्स) की सामग्री के 'प्रकाशक' के रूप में मुकदमों से बचाता है । उनका कहना था कि 'आदी बनाने' के ये आरोप असल में इस बात से जुड़े हैं कि उन्होंने कैसे सामग्री को प्रकाशित और क्यूरेट किया, जो पूरी तरह से सेक्शन 230 के दायरे में आता है । कंपनियों ने यह भी तर्क दिया कि प्लेटफॉर्म डिज़ाइन के फैसले भी उनकी प्रकाशन स्वतंत्रता का हिस्सा हैं। अलग से, Meta ने 29 राज्यों के अटॉर्नी जनरल द्वारा लाए गए मुकदमे को टालने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने ठुकरा दिया ।
वादी — जिनमें माता-पिता, स्कूल डिस्ट्रिक्ट और राज्यों के अटॉर्नी जनरल शामिल हैं — ने तर्क दिया कि ये मुकदमे किसी तीसरे पक्ष की पोस्ट की गई सामग्री के बारे में नहीं हैं, बल्कि प्लेटफॉर्म के डिज़ाइन के बारे में हैं: एल्गोरिदम, नोटिफिकेशन सिस्टम, इनफ़िनिट स्क्रोल और अन्य ऐसी सुविधाएँ जो जानबूझकर आदी बनाने वाली हैं । उन्होंने दलील दी कि कंपनियों की अपील एक प्रक्रियात्मक चाल थी और सेक्शन 230 एक 'सकारात्मक बचाव' (affirmative defense) है जो मुकदमे में उठाया जाएगा, न कि मुकदमे को रोकने का कोई अधिकार क्षेत्रीय (jurisdictional) हथियार । Ninth Circuit के फैसले में यह भी कहा गया कि कांग्रेस ने सेक्शन 230 को प्लेटफॉर्म को यूज़र्स द्वारा पोस्ट की गई चीज़ों से बचाने के लिए बनाया था — न कि कंपनियों को इस बात से बचाने के लिए कि उन्होंने बच्चों को आदी बनाने वाले प्लेटफॉर्म बनाए ।
यह फैसला 3,000 से अधिक समेकित मुकदमों (जिनमें कैलिफोर्निया के उत्तरी जिले का मल्टी-डिस्ट्रिक्ट लिटिगेशन भी शामिल है) को डिस्कवरी और संभावित मुकदमे की ओर बढ़ने का रास्ता साफ करता है । कंपनियां अब भी मुकदमे के दौरान सेक्शन 230 को एक बचाव के रूप में इस्तेमाल कर सकती हैं, लेकिन वे मुकदमों को सबसे शुरुआती चरण में ही खारिज कराने की अपनी कोशिश में हार गई हैं। यह फैसला एक महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक बदलाव है जो भविष्य में इसी तरह के मामलों के लिए कानूनी नजीर बन सकता है ।