अदालत ने पाया कि यह ज़मीन कभी कानूनी रूप से सरेंडर (आत्मसमर्पण) नहीं की गई थी। प्रांतीय सरकार द्वारा 1871 से 1914 के बीच जारी किए गए 'फी सिंपल' अनुदान दो कारणों से अमान्य थे:
फैसले का एक अहम पहलू ज़मीन मालिकों के साथ अलग-अलग व्यवहार का रहा। अदालत ने संघीय सरकार और रिचमंड शहर के 'फी सिंपल' अधिकारों को "दोषपूर्ण और अमान्य" (Defective and Invalid) घोषित कर दिया । लेकिन, निजी ज़मीन मालिकों के 'फी सिंपल' अधिकारों को अमान्य करने की घोषणा नहीं की गई। इसके बजाय, अब ये निजी स्वामित्व अधिकार, अंतर्निहित आदिवासी स्वामित्व के साथ सह-अस्तित्व में हैं—एक ऐसी कानूनी स्थिति जिसकी कोई मिसाल नहीं है
। फैसले ने यह हल नहीं किया कि ज़मीन के एक ही टुकड़े पर, दो अलग-अलग पक्षों के उपयोग और कब्जे के अनन्य अधिकार एक साथ कैसे काम कर सकते हैं
।
अदालत ने फ्रेजर नदी की दक्षिणी शाखा में भोजन के लिए मछली पकड़ने के काउइचन राष्ट्र के आदिवासी अधिकार की भी पुष्टि की ।
यह फैसला तुरंत विवादों में घिर गया। सभी सात मूल पक्षों ने अपील दायर कर दी है, और मामला अब बी.सी. कोर्ट ऑफ अपील में है। इस प्रक्रिया में वर्षों लगने की उम्मीद है, और आखिरकार इसके कनाडा के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court of Canada) तक पहुँचने की प्रबल संभावना है ।
ट्रायल के दौरान निजी ज़मीन मालिकों को कभी औपचारिक रूप से नोटिस नहीं दिया गया। 2017 में जस्टिस जेनिफर पावर ने फैसला दिया था कि निजी मालिकों को नोटिस देने की ज़रूरत नहीं है, क्योंकि वे बाद की कार्यवाही में अपनी दलीलें रख सकते हैं । इस फैसले की अब तीखी आलोचना हो रही है।
दावा क्षेत्र में बड़ी हिस्सेदारी रखने वाली एक प्रमुख निजी कंपनी मॉन्ट्रोज़ प्रॉपर्टीज़—जिसके पास कोका-कोला प्लांट और कैनेडियन टायर डिपो सहित लगभग 120 हेक्टेयर औद्योगिक संपत्ति है—ने 23 जनवरी 2026 को मुकदमे में पक्ष बनने और फैसले को फिर से खोलने की अर्ज़ी दायर की ।
कंपनी के अध्यक्ष और सीईओ केन लो ने कहा, "एक ऐसे मामले से प्रभावित होने वाले कई निजी ज़मीन मालिकों में से एक के रूप में, जिसमें हम पक्ष भी नहीं थे, हमारे पास यह कदम उठाने के अलावा कोई विकल्प नहीं है" । उनका तर्क है कि 11 साल तक चले इस ऐतिहासिक मुकदमे में उन्हें कभी सुनवाई का मौका नहीं दिया गया
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अन्य निजी ज़मीन मालिक संपत्ति मूल्यांकन अपील बोर्ड (PAAB) में अपील कर रहे हैं, और तर्क दे रहे हैं कि आदिवासी स्वामित्व की घोषणा ने उनकी ज़मीन की कीमत खत्म कर दी है ।
यह फैसला ब्रिटिश कोलंबिया में 'फी सिंपल' स्वामित्व की बुनियादी धारणाओं को बदल देता है। अदालत ने स्थापित किया कि सरकार (क्राउन) केवल 'फी सिंपल' डीड देकर आदिवासी स्वामित्व को संवैधानिक रूप से समाप्त नहीं कर सकती थी, खासकर 1982 के संविधान अधिनियम की धारा 35 के तहत आदिवासी अधिकारों को संरक्षण मिलने से पहले। इस तर्क का मतलब है कि बी.सी. में 1982 से पहले प्रांतीय सरकार के अनुदान से उत्पन्न कोई भी 'फी सिंपल' स्वामित्व, भविष्य के आदिवासी स्वामित्व के दावे के सामने कानूनी रूप से कमज़ोर हो सकता है, बशर्ते कोई फर्स्ट नेशन ऐतिहासिक और अनन्य कब्जे को साबित कर सके ।
कानूनी विशेषज्ञ "सह-स्वामित्व (को-टाइटल)" की अनिश्चितता के एक नए युग की ओर इशारा कर रहे हैं। यह संभावना कि आदिवासी स्वामित्व और 'फी सिंपल' निजी स्वामित्व एक ही ज़मीन पर एक साथ मौजूद रह सकते हैं—जिसे कनाडाई संपत्ति कानून ने कभी संबोधित नहीं किया—भूमि उपयोग की अनुमति, नगर निगम कराधान, बंधक ऋण और शीर्षक बीमा के लिए गंभीर अनिश्चितता पैदा करती है ।
इसके व्यावहारिक परिणाम पहले ही दिखने लगे हैं। उद्योग पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस फैसले ने बी.सी. में 'फी सिंपल' स्वामित्व की सुरक्षा, संपत्ति के मूल्यों, बिक्री योग्यता, और ऋणदाताओं व बीमाकर्ताओं की ज़मीन को पूर्ण सुरक्षित गारंटी मानने की इच्छा पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं ।
अदालत ने निजी 'फी सिंपल' स्वामित्व को फिलहाल अमान्य नहीं किया है। बल्कि, उसने घोषित किया कि वे स्वामित्व आदिवासी अधिकार का "अन्यायपूर्ण उल्लंघन" करते हैं, और ब्रिटिश कोलंबिया का कर्तव्य है कि वह "तीसरे पक्षों को दिए गए क्राउन-अनुदानित 'फी सिंपल' स्वामित्व के समाधान के संबंध में बातचीत करे" । फैसले के क्रियान्वयन पर 18 महीने की रोक लगा दी गई है ताकि "व्यवस्थित परिवर्तन" और बातचीत हो सके
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क्योंकि अदालत का तर्क पूरे प्रांत पर लागू होता है, काउइचन मिसाल को पूरे ब्रिटिश कोलंबिया में दोहराया जा सकता है, जो संभावित रूप से हज़ारों संपत्तियों को प्रभावित करेगा । अब यह बी.सी. कोर्ट ऑफ अपील और अंततः कनाडा के सर्वोच्च न्यायालय पर निर्भर करेगा कि वह आदिवासी स्वामित्व के संवैधानिक संरक्षण और पंजीकृत, अपरिवर्तनीय 'फी सिंपल' स्वामित्व की प्रणाली में सामंजस्य कैसे बिठाते हैं। इसका निर्णय तय करेगा कि यह मामला एक अपवाद बनकर रह जाएगा या कनाडा के संपत्ति कानून को स्थायी रूप से बदल देगा
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