इन फिल्मों का सबसे बड़ा विचार यह है कि AI को केवल सहायक टूल की तरह नहीं, बल्कि पूरी प्रोडक्शन पाइपलाइन के केंद्र में रखा जाए। यानी कहानी के शुरुआती विकास से लेकर पोस्ट‑प्रोडक्शन तक AI का इस्तेमाल होगा।
दोनों फिल्मों में से Hyperia के बारे में फिलहाल सबसे ज्यादा जानकारी सामने आई है। यह कहानी एक ऐसे फरार व्यक्ति की है जिसे एक दूरस्थ ग्रह पर बेहद खतरनाक होवर‑स्लेज रेस में उतरने के लिए मजबूर किया जाता है।
यह सेटिंग एक विशाल और काल्पनिक एलियन दुनिया दिखाने का अवसर देती है—जहाँ नए जीव, वाहन और बड़े पैमाने के रेसिंग दृश्य होंगे। ऐसे विजुअल‑भारी माहौल को AI‑आधारित डिजाइन और प्रोडक्शन के लिए एक आदर्श प्रयोग माना जा रहा है।
दूसरी फिल्म “b” को भी एक मूल साइ‑फाई फीचर बताया गया है, लेकिन इसकी कहानी के बारे में अभी तक सार्वजनिक रूप से ज्यादा जानकारी साझा नहीं की गई है।
हालाँकि इतना स्पष्ट है कि यह फिल्म भी Hyperia की तरह AI‑केंद्रित निर्माण प्रक्रिया का उपयोग करेगी।
इस साझेदारी में AI का उपयोग फिल्म निर्माण के कई चरणों में किया जाएगा, जैसे:
इसके अलावा फिल्म में लाइव कलाकारों को LED स्टेज पर शूट किया जाएगा, जबकि उनके आसपास के वातावरण AI‑जनरेटेड होंगे। यह तरीका आधुनिक वर्चुअल प्रोडक्शन तकनीकों से मिलता‑जुलता है।
Higgsfield का फिल्ममेकिंग सिस्टम वीडियो जनरेशन, कैमरा कंट्रोल, री‑यूजेबल कैरेक्टर‑लोकेशन एसेट्स और सहयोगी टूल्स को एक ही प्लेटफॉर्म में जोड़ने के लिए बनाया गया है, ताकि फिल्म निर्माता तेजी से सिनेमैटिक शॉट्स तैयार कर सकें।
इस घोषणा में कई प्रमुख नाम जुड़े हुए हैं:
अब तक किसी कलाकार, वितरक या रिलीज़ डेट की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
यह ऐलान ऐसे समय हुआ है जब फिल्म उद्योग में AI की भूमिका पर तीखी बहस चल रही है।
कई फिल्म निर्माता अब AI को एडिटिंग और विजुअल इफेक्ट्स जैसे समय‑खपत वाले कामों को तेज करने के लिए अपनाने लगे हैं। लेकिन दूसरी तरफ, कान्स के आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि जो फिल्में मुख्य रूप से जनरेटिव AI से बनाई गई हों, वे Palme d’Or प्रतियोगिता के लिए पात्र नहीं होंगी।
ऐसे माहौल में Hyperia और b की घोषणा अलग इसलिए दिखती है क्योंकि ये प्रोजेक्ट AI को केवल तकनीकी मदद के रूप में नहीं, बल्कि पूरी फिल्म निर्माण प्रणाली के आधार के रूप में अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।
अब यह देखना बाकी है कि क्या यह मॉडल भविष्य में मुख्यधारा बन पाएगा, या फिर यह सिर्फ एक प्रयोग साबित होगा। लेकिन इतना तय है कि AI और सिनेमा के बीच की चर्चा अब सिर्फ कल्पना नहीं रही—यह तेजी से वास्तविकता बन रही है।
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