पहला चरण कूटनीतिक है। रेज़ाई ने कहा कि ईरान आसपास के देशों से अमेरिकी “आर्थिक युद्ध” में शामिल न होने को कहेगा। इसका उद्देश्य पड़ोसी देशों को अमेरिकी प्रतिबंधों को लागू करने या ईरान के व्यापार पर दबाव बढ़ाने में मदद करने से रोकना है। CA
अगर कोई पड़ोसी देश अमेरिकी अभियान में शामिल होता है, तो रेज़ाई के अनुसार तेहरान उसे शत्रुतापूर्ण देश मानेगा और उसके हितों को निशाना बनाएगा। उपलब्ध रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं किया गया है कि “हितों” से किन विशेष परिसंपत्तियों या गतिविधियों का मतलब है। इसलिए इसे किसी विस्तृत सैन्य योजना के बजाय व्यापक जवाबी कार्रवाई की धमकी के रूप में देखना अधिक उचित है। LC
सबसे गंभीर चेतावनी ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ी थी। रेज़ाई ने कहा कि यदि आसपास के देश अमेरिकी अभियान में शामिल हुए, तो फारस की खाड़ी और होर्मुज़ जलडमरूमध्य से “तेल की एक बूंद भी” बाहर नहीं जाने दी जाएगी। उन्होंने खाड़ी से तेल निर्यात के दूसरे मार्गों को भी निशाना बनाने की बात कही—इनमें वे वैकल्पिक मार्ग शामिल हैं जिन्हें होर्मुज़ से बचने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। I
हालांकि, उपलब्ध विश्वसनीय रिपोर्टें यह नहीं बतातीं कि ईरान किन वैकल्पिक मार्गों की बात कर रहा था या उन पर किस तरह की कार्रवाई की जा सकती है। इसका अर्थ है कि बयान व्यापक व्यवधान की धमकी तो देता है, लेकिन कोई सार्वजनिक और स्पष्ट परिचालन योजना सामने नहीं रखता।
यह चेतावनी उस युद्ध की पृष्ठभूमि में आई है, जो 28 फ़रवरी 2026 को अमेरिका और इज़राइल के ईरान पर हमलों से शुरू हुआ था। इसके बाद ईरान ने होर्मुज़ जलडमरूमध्य पर नियंत्रण कायम करने की कोशिश की और वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए। ब्रुकिंग्स के अनुसार, कई जहाजों के लिए बीमा या तो उपलब्ध नहीं रहा या बेहद महंगा हो गया, जबकि नाविक भी इस मार्ग से गुजरने को तैयार नहीं थे। परिणामस्वरूप जलडमरूमध्य प्रभावी रूप से बंद हो गया। CB
होर्मुज़ केवल अमेरिका और ईरान के बीच दबाव का एक बिंदु नहीं है। यह फारस की खाड़ी में आने-जाने का प्रमुख समुद्री द्वार और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है। यदि ईरान अन्य तेल निर्यात गलियारों पर भी रोक या हमला करता है, तो आर्थिक असर मौजूदा अमेरिका-ईरान टकराव से कहीं आगे तक फैल सकता है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माईल बघाई ने प्रस्तावित अमेरिकी कदमों को “आर्थिक आतंकवाद” बताया है। उन्होंने वॉशिंगटन पर दूसरे देशों के बैंकों, कंपनियों और परिवहन ढांचे को ईरान के साथ वैध व्यापार रोकने के लिए मजबूर करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार, द्वितीयक प्रतिबंध स्वतंत्र देशों पर अमेरिका की बाह्यक्षेत्रीय सत्ता थोपने का प्रयास हैं। RYK
विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप के “आर्थिक डी-डे” वाले बयान को भी खारिज किया है। उनका कहना है कि जबरन डाला गया आर्थिक दबाव ईरान को रियायतें देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। ईरानी अधिकारियों ने कहा है कि तेहरान के लिए स्वीकार्य शर्तों पर कूटनीति संभव है, लेकिन रिपोर्टों के अनुसार अमेरिका-ईरान वार्ता अटकी हुई है और होर्मुज़ के भविष्य पर भी गतिरोध बना हुआ है। GN
अमेरिकी अभियान का निशाना केवल ईरानी संस्थान नहीं, बल्कि वह पूरा नेटवर्क भी है जो ईरान को व्यापार जारी रखने में मदद करता है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने देशों से अमेरिका का साथ देने या परिणाम भुगतने के लिए तैयार रहने को कहा है। प्रशासन उन सरकारों, कंपनियों और वित्तीय संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई की धमकी दे रहा है जो ईरान को आर्थिक जीवनरेखा उपलब्ध कराते हैं। NRB
बेसेंट ने इस रणनीति को मौजूदा नाकाबंदी और इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंधों के संयोजन के रूप में पेश किया है। वॉशिंगटन ने चीन से भी इस दबाव अभियान में सहयोग करने का आग्रह किया है। R
चीन की भूमिका इस अभियान की सफलता को लेकर सबसे बड़ा सवाल खड़ा करती है। रॉयटर्स ने केप्लर के आंकड़ों के हवाले से बताया कि 2025 में ईरान के समुद्री रास्ते से भेजे गए तेल का 80% से अधिक चीन ने खरीदा था। R
अगर बीजिंग ईरानी तेल खरीदना जारी रखता है, तो अमेरिका द्वारा जहाजरानी, वित्त और बिचौलियों पर दबाव बढ़ाए जाने के बावजूद ईरान के पास तेल बेचने का एक बड़ा रास्ता बना रह सकता है। इसलिए यह विवाद केवल ईरान पर प्रतिबंध लगाने का मामला नहीं है। यह इस बात की भी परीक्षा है कि अमेरिका अपने बड़े व्यापारिक साझेदारों को प्रतिबंध लागू करने के लिए कितना राजी कर सकता है और वे देश इसके आर्थिक तथा भू-राजनीतिक खर्च को स्वीकार करेंगे या नहीं।
रेज़ाई के संदेश में कूटनीतिक दबाव और क्रमिक जवाबी कार्रवाई—दोनों शामिल हैं: पहले पड़ोसी देशों को अमेरिकी अभियान से दूर रखना, फिर शामिल होने वालों के हितों को निशाना बनाना और अंत में उन ऊर्जा मार्गों पर दबाव डालना जिनके जरिए अमेरिकी प्रतिबंधों को प्रभावी बनाया जा सकता है। यह चेतावनी प्रतिबंध विवाद को पहले से बाधित होर्मुज़ जलडमरूमध्य से सीधे जोड़ती है।
फिलहाल सबसे स्पष्ट निष्कर्ष यही है कि अगर बाहरी सरकारें ईरान को अलग-थलग करने में मदद करती हैं, तो तेहरान आर्थिक संघर्ष का दायरा बढ़ाने का संकेत दे रहा है। हालांकि, संभावित लक्ष्यों और कार्रवाई के तरीकों का विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसी बीच बातचीत रुकी हुई है और वॉशिंगटन अपने दबाव अभियान को व्यापक स्तर पर लागू करने की दिशा में बढ़ रहा है। LIG