उनके अनुसार, एक ऐसा बिंदु आएगा जहां ट्रांजिस्टर को और छोटा करना तथा बड़े चिप पैकेज में अधिक HBM जोड़ना भौतिक और आर्थिक, दोनों दृष्टि से अस्थिर हो जाएगा। उन्होंने इस संभावित स्थिति को ‘एवलॉन्च’ यानी अचानक तेजी से बढ़ने वाली समस्या के रूपक के रूप में समझाया ।
Liao का दावा है कि Moore’s Law का सबसे महत्वपूर्ण आर्थिक लाभ—हर ट्रांजिस्टर की लागत में लगातार कमी—16nm और 7nm प्रोसेस नोड्स के बाद प्रभावी रूप से समाप्त हो गया। अब इस नियम को मुख्यतः प्रदर्शन और ऊर्जा दक्षता में सुधार के जरिए आगे बढ़ाया जा रहा है, लेकिन इन क्षेत्रों में भी लाभ धीरे-धीरे कम हो रहे हैं ।
उन्होंने विशेष रूप से Nvidia के बड़े मोनोलिथिक AI चिप्स की रणनीति को इस सीमा के प्रति संवेदनशील बताया। ऐसे चिप्स में अधिक कंप्यूटिंग क्षमता और HBM जोड़कर प्रदर्शन बढ़ाया जाता है। Liao के शब्दों में, लगातार अधिक ट्रांजिस्टर और अधिक बैंडविड्थ मेमोरी जोड़कर पैमाना बढ़ाना टिकाऊ नहीं रह गया है ।
Huawei ने इस वैकल्पिक दृष्टिकोण को मई 2026 में शंघाई में आयोजित IEEE International Symposium on Circuits and Systems में पेश किया था। Liao ने जुलाई के इंटरव्यू में इसके तर्क को विस्तार से समझाया ।
Moore’s Law में प्रगति को आम तौर पर ट्रांजिस्टर के आकार यानी नैनोमीटर में मापा जाता है। इसके विपरीत, Tau Scaling Law का लक्ष्य τ (टाउ)—कंप्यूटिंग सिस्टम में सिग्नल को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचने में लगने वाले समय—को कम करना है। यानी ध्यान ट्रांजिस्टर को छोटा करने से हटाकर डेटा मूवमेंट और सिग्नल देरी घटाने पर है ।
सरल शब्दों में, Huawei का तर्क है कि केवल अधिक ट्रांजिस्टर जोड़ना पर्याप्त नहीं है। अगर चिप के अलग-अलग हिस्सों, मेमोरी और पूरे कंप्यूटिंग सिस्टम के बीच डेटा तेजी से पहुंच सके, तो समान हार्डवेयर से अधिक प्रभावी प्रदर्शन हासिल किया जा सकता है।
LogicFolding Tau Scaling Law का प्रस्तावित हार्डवेयर रूप है। इसमें लॉजिक, एनालॉग और मेमोरी सर्किट को पारंपरिक सपाट 2D लेआउट में रखने के बजाय अधिक सघन, ऊर्ध्वाधर या 3D-जैसी संरचना में व्यवस्थित करने की कोशिश की जाती है ।
Huawei का दावा है कि इस डिजाइन से मौजूदा और अपेक्षाकृत सुलभ लिथोग्राफी नोड्स पर रहते हुए ट्रांजिस्टर घनत्व में 53.5% तक वृद्धि हासिल की जा सकती है । कंपनी का यह भी कहना है कि इस रास्ते से उसे अत्याधुनिक EUV लिथोग्राफी मशीनों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
Huawei ने 2031 तक इस डिजाइन पद्धति का उपयोग करके ‘1.4nm-क्लास’ चिप्स बनाने का लक्ष्य सार्वजनिक रूप से रखा है । यह लक्ष्य प्रक्रिया-तकनीक को उसी अनुपात में छोटा किए बिना आर्किटेक्चरल बदलावों से अधिक घनत्व हासिल करने का दावा करता है। हालांकि, ‘1.4nm-क्लास’ नाम को सीधे पारंपरिक निर्माण प्रक्रिया के वास्तविक 1.4nm नोड के बराबर नहीं माना जाना चाहिए; यह Huawei की बताई गई डिजाइन क्षमता का वर्गीकरण है।
Huawei के प्रस्ताव को अमेरिका-चीन तकनीकी प्रतिस्पर्धा और आपूर्ति-श्रृंखला प्रतिबंधों से अलग करके देखना मुश्किल है। अमेरिकी निर्यात नियंत्रणों के कारण Huawei को ASML की अत्याधुनिक EUV स्कैनर मशीनों और TSMC जैसी अग्रणी फाउंड्री सेवाओं तक सीमित पहुंच का सामना करना पड़ता है ।
इसलिए Tau Scaling Law और LogicFolding को ऐसे रास्ते के रूप में पेश किया जा रहा है, जिसमें उन्नत चिप प्रदर्शन हासिल करने के लिए केवल पश्चिमी लिथोग्राफी उपकरणों और सबसे नए प्रोसेस नोड्स पर निर्भर रहना जरूरी न हो। यह Huawei के लिए तकनीकी रणनीति के साथ-साथ प्रतिबंधों के बीच आत्मनिर्भरता का संदेश भी है।
Liao Heng ने यह स्वीकार किया कि Huawei एकल AI कार्ड की कंप्यूटिंग शक्ति और स्पेसिफिकेशन के आधार पर Nvidia से सीधी ‘ब्रूट-फोर्स’ टक्कर नहीं ले सकती। उनका जोर सिस्टम-स्तरीय प्रदर्शन पर है—जहां चिप, सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग और बड़े कंप्यूटिंग क्लस्टर मिलकर अंतिम क्षमता तय करते हैं ।
इस रणनीति में Huawei का CANN सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म, MindSpore फ्रेमवर्क और बड़े पैमाने पर क्लस्टर नेटवर्किंग शामिल हैं। विचार यह है कि एकल चिप की कमियों की भरपाई पूरे हार्डवेयर-सॉफ्टवेयर सिस्टम की बेहतर तालमेल और नेटवर्क क्षमता से की जाए।
यह संदेश चीन के घरेलू सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए तकनीकी तर्क भी है और मनोबल बढ़ाने वाली कहानी भी। Huawei पश्चिमी कंपनियों की मौजूदा बढ़त को एक संभावित ‘डेड एंड’ के रूप में देखती है, जबकि अपने प्रतिबंध-प्रेरित डिजाइन रास्ते को भविष्य की दिशा बताती है ।
अभी इसका उत्तर स्पष्ट नहीं है। Reuters और अन्य रिपोर्टों ने रेखांकित किया है कि यह दृष्टिकोण नया जरूर है, लेकिन बड़े पैमाने पर इसका प्रदर्शन अभी साबित होना बाकी है । LogicFolding वास्तविक परिस्थितियों में Nvidia की अगली पीढ़ी की आर्किटेक्चर के बराबर प्रदर्शन, ऊर्जा दक्षता, निर्माण क्षमता और विश्वसनीयता दे पाएगा या नहीं—यह खुला सवाल है। कुछ विश्लेषक इसे वास्तविक तकनीकी छलांग के बजाय प्रतिबंधों से बचने का workaround मानते हैं।
इस दावे की पहली ठोस परीक्षा Huawei की अगली स्मार्टफोन चिप हो सकती है। Liao ने संकेत दिया है कि 2026 के अंत में इस चिप का विश्लेषण करके दिखाया जाएगा कि LogicFolding प्रतिद्वंद्वियों के मुकाबले के अंतर को कितना कम कर पाती है ।
फिलहाल Huawei का संदेश साफ है: चिप उद्योग की अगली दौड़ केवल छोटे नैनोमीटर नोड्स या अधिक ट्रांजिस्टर की नहीं होगी। मुकाबला सिग्नल की गति, पैकेजिंग, सॉफ्टवेयर, नेटवर्किंग और पूरे कंप्यूटिंग सिस्टम की क्षमता पर भी निर्भर करेगा।