बैंक ऑफ जापान के डिप्टी गवर्नर रयोज़ो हिमिनो ने चेतावनी दी कि अमेरिका के स्टेबलकॉइन मॉडल और यूरोप के डिजिटल यूरो के बीच बढ़ता अंतर वैश्विक वित्त को विभाजित कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर डिजिटल मनी के अलग‑अलग ढांचे बने तो ‘Singleness of Money’—यानी सभी प्रकार के पैसे का समान मूल्य—कमजोर पड़ सकता है। जापान टोकनाइज्ड...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What warning did Bank of Japan Deputy Governor Ryozo Himino give about the United States promoting stablecoins while Europe pursues a digita. Article summary: Bank of Japan Deputy Governor Ryozo Himino warned that the United States’ pro-stablecoin path and Europe’s digital-euro path could pull the global monetary system in different directions, so policymakers should take a “h. Topic tags: general, general web. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "A conflict over the future of global payments. **A significant regulatory conflict is brewing between the United Kingdom and the United States over the future of global payments.**" source context "BoE Warns of US Stablecoin Dominance" Reference image 2: visual subject "### Leléka performed Ridnym in Eurovision 2026 final in Vie
बैंक ऑफ जापान (BOJ) ने चेतावनी दी है कि अगर दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाएँ डिजिटल पैसे के लिए अलग‑अलग ढांचे बनाती हैं, तो वैश्विक मौद्रिक प्रणाली में दरार पड़ सकती है।
बैंक ऑफ जापान के डिप्टी गवर्नर रयोज़ो हिमिनो के अनुसार, अमेरिका और यूरोप डिजिटल मनी को लेकर अलग रास्तों पर बढ़ रहे हैं। अमेरिका निजी कंपनियों द्वारा जारी डॉलर स्टेबलकॉइन को बढ़ावा दे रहा है, जबकि यूरोपीय सेंट्रल बैंक डिजिटल यूरो नाम की केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा (CBDC) पर काम कर रहा है। अगर इन दोनों मॉडल के बीच समन्वय नहीं हुआ, तो अर्थशास्त्र में महत्वपूर्ण माने जाने वाले सिद्धांत “Singleness of Money” को खतरा हो सकता है।
यह सिद्धांत कहता है कि किसी भी अर्थव्यवस्था में अलग‑अलग रूपों में मौजूद पैसा—जैसे नकद, बैंक डिपॉजिट और केंद्रीय बैंक रिज़र्व—हमेशा समान मूल्य पर विनिमेय होना चाहिए।
हिमिनो ने कहा कि दुनिया के दो बड़े वित्तीय ब्लॉक डिजिटल मनी के मामले में अलग नीति अपना रहे हैं।
अमेरिका में नीति‑निर्माता रेगुलेटेड स्टेबलकॉइन को बढ़ावा दे रहे हैं और संघीय एजेंसियों को CBDC जारी करने से रोका गया है। इसका उद्देश्य डॉलर की वैश्विक भूमिका को निजी डिजिटल टोकनों के माध्यम से मजबूत करना माना जाता है।
दूसरी ओर, यूरोप का रुख अलग है। यूरोपीय सेंट्रल बैंक डिजिटल यूरो विकसित कर रहा है, जो खुद केंद्रीय बैंक द्वारा जारी रिटेल डिजिटल करेंसी होगी। इसका लक्ष्य यूरोप के भुगतान तंत्र को आधुनिक बनाना और क्षेत्रीय भुगतान विखंडन को कम करना है।
दोनों ही पहलें मौद्रिक ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत देती हैं। लेकिन अगर इनके कानूनी ढांचे, तकनीक और सेटलमेंट सिस्टम अलग‑अलग विकसित होते हैं, तो वैश्विक वित्त एक टुकड़ों में बंटी प्रणाली बन सकता है।
आधुनिक वित्तीय प्रणाली में केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करते हैं कि अलग‑अलग प्रकार के पैसे—जैसे नकद, बैंक जमा और रिज़र्व—एक‑दूसरे के साथ समान मूल्य पर अदला‑बदली हो सकें।
हिमिनो के अनुसार, डिजिटल मनी के कई अलग रूप—जैसे स्टेबलकॉइन, CBDC और अन्य टोकनाइज्ड एसेट—अगर अलग‑अलग प्लेटफॉर्म और नियमों पर चलते हैं, तो बाजार उन्हें अलग‑अलग और प्रतिस्पर्धी मुद्रा साधनों की तरह देखने लग सकता है।
ऐसा होने पर भुगतान नेटवर्क, सेटलमेंट सिस्टम और तरलता (liquidity) के पूल आपस में कम जुड़ पाएंगे, जिससे वित्तीय स्थिरता पर जोखिम बढ़ सकता है।
हिमिनो का कहना है कि भविष्य की मौद्रिक व्यवस्था को सिर्फ स्टेबलकॉइन बनाम CBDC की बहस तक सीमित नहीं करना चाहिए। इसके बजाय नीति‑निर्माताओं को डिजिटल वित्तीय ढांचे के कई संभावित मॉडलों को साथ लेकर चलना चाहिए।
जापान की रणनीति भी इसी सोच को दर्शाती है। बैंक ऑफ जापान सिर्फ एक डिजिटल करेंसी मॉडल पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि अलग‑अलग प्रकार के टोकनाइज्ड पैसे के सह-अस्तित्व की संभावनाएँ तलाश रहा है।
एक विकल्प टोकनाइज्ड डिपॉजिट है—यानी पारंपरिक बैंक जमा का डिजिटल टोकन रूप। यह बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखते हुए ब्लॉकचेन जैसी तकनीक की गति और प्रोग्रामेबिलिटी प्रदान कर सकता है।
बैंक ऑफ जापान केंद्रीय बैंक रिज़र्व के टोकनाइज्ड संस्करण पर भी विचार कर रहा है। ये वे बैलेंस होते हैं जो वाणिज्यिक बैंक केंद्रीय बैंक में रखते हैं, और इन्हें डिजिटल टोकन रूप में इस्तेमाल करने से संस्थानों के बीच सेटलमेंट तेज और अधिक प्रोग्रामेबल हो सकता है।
जापान ने डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर (ब्लॉकचेन) आधारित सेटलमेंट प्रयोग भी शुरू किए हैं। इन परीक्षणों में केंद्रीय बैंक रिज़र्व को ब्लॉकचेन जैसे परीक्षण वातावरण में रखा जाता है ताकि यह समझा जा सके कि सेटलमेंट कैसे काम करेगा और मौजूदा वित्तीय सिस्टम से कैसे जुड़ेगा।
इन प्रयोगों का उद्देश्य यह देखना है कि क्या टोकनाइज्ड वित्तीय ढांचा दक्षता बढ़ा सकता है, जबकि पारंपरिक केंद्रीय बैंक प्रणाली की कानूनी सुरक्षा और स्थिरता भी बनी रहे।
जापान की रणनीति अमेरिका और यूरोप के बीच एक तरह का मध्य मार्ग दिखाती है।
सिर्फ निजी स्टेबलकॉइन या सिर्फ केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा पर निर्भर होने के बजाय, बैंक ऑफ जापान कई विकल्पों—जैसे CBDC, स्टेबलकॉइन, टोकनाइज्ड डिपॉजिट और टोकनाइज्ड रिज़र्व—को एक साथ परख रहा है।
हिमिनो का मुख्य संदेश यह है कि डिजिटल पैसे की वैश्विक संरचना अभी तय हो रही है। आज लिए गए फैसले तय करेंगे कि भविष्य की मौद्रिक प्रणाली एकीकृत और स्थिर रहेगी या फिर कई प्रतिस्पर्धी डिजिटल मुद्राओं में बंट जाएगी।
इसलिए, उनके अनुसार, बदलती तकनीक के बीच भी “Singleness of Money” को बनाए रखना केंद्रीय बैंकों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
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बैंक ऑफ जापान के डिप्टी गवर्नर रयोज़ो हिमिनो ने चेतावनी दी कि अमेरिका के स्टेबलकॉइन मॉडल और यूरोप के डिजिटल यूरो के बीच बढ़ता अंतर वैश्विक वित्त को विभाजित कर सकता है।
बैंक ऑफ जापान के डिप्टी गवर्नर रयोज़ो हिमिनो ने चेतावनी दी कि अमेरिका के स्टेबलकॉइन मॉडल और यूरोप के डिजिटल यूरो के बीच बढ़ता अंतर वैश्विक वित्त को विभाजित कर सकता है। उन्होंने कहा कि अगर डिजिटल मनी के अलग‑अलग ढांचे बने तो ‘Singleness of Money’—यानी सभी प्रकार के पैसे का समान मूल्य—कमजोर पड़ सकता है।
जापान टोकनाइज्ड बैंक डिपॉजिट, टोकनाइज्ड सेंट्रल बैंक रिज़र्व और ब्लॉकचेन आधारित सेटलमेंट प्रयोगों जैसे विकल्पों पर काम कर रहा है।