दोनों ही पहलें मौद्रिक ढांचे में बड़े बदलाव का संकेत देती हैं। लेकिन अगर इनके कानूनी ढांचे, तकनीक और सेटलमेंट सिस्टम अलग‑अलग विकसित होते हैं, तो वैश्विक वित्त एक टुकड़ों में बंटी प्रणाली बन सकता है।
आधुनिक वित्तीय प्रणाली में केंद्रीय बैंक यह सुनिश्चित करते हैं कि अलग‑अलग प्रकार के पैसे—जैसे नकद, बैंक जमा और रिज़र्व—एक‑दूसरे के साथ समान मूल्य पर अदला‑बदली हो सकें।
हिमिनो के अनुसार, डिजिटल मनी के कई अलग रूप—जैसे स्टेबलकॉइन, CBDC और अन्य टोकनाइज्ड एसेट—अगर अलग‑अलग प्लेटफॉर्म और नियमों पर चलते हैं, तो बाजार उन्हें अलग‑अलग और प्रतिस्पर्धी मुद्रा साधनों की तरह देखने लग सकता है।
ऐसा होने पर भुगतान नेटवर्क, सेटलमेंट सिस्टम और तरलता (liquidity) के पूल आपस में कम जुड़ पाएंगे, जिससे वित्तीय स्थिरता पर जोखिम बढ़ सकता है।
हिमिनो का कहना है कि भविष्य की मौद्रिक व्यवस्था को सिर्फ स्टेबलकॉइन बनाम CBDC की बहस तक सीमित नहीं करना चाहिए। इसके बजाय नीति‑निर्माताओं को डिजिटल वित्तीय ढांचे के कई संभावित मॉडलों को साथ लेकर चलना चाहिए।
जापान की रणनीति भी इसी सोच को दर्शाती है। बैंक ऑफ जापान सिर्फ एक डिजिटल करेंसी मॉडल पर निर्भर नहीं रहना चाहता, बल्कि अलग‑अलग प्रकार के टोकनाइज्ड पैसे के सह-अस्तित्व की संभावनाएँ तलाश रहा है।
एक विकल्प टोकनाइज्ड डिपॉजिट है—यानी पारंपरिक बैंक जमा का डिजिटल टोकन रूप। यह बैंकिंग प्रणाली की विश्वसनीयता को बनाए रखते हुए ब्लॉकचेन जैसी तकनीक की गति और प्रोग्रामेबिलिटी प्रदान कर सकता है।
बैंक ऑफ जापान केंद्रीय बैंक रिज़र्व के टोकनाइज्ड संस्करण पर भी विचार कर रहा है। ये वे बैलेंस होते हैं जो वाणिज्यिक बैंक केंद्रीय बैंक में रखते हैं, और इन्हें डिजिटल टोकन रूप में इस्तेमाल करने से संस्थानों के बीच सेटलमेंट तेज और अधिक प्रोग्रामेबल हो सकता है।
जापान ने डिस्ट्रिब्यूटेड लेजर (ब्लॉकचेन) आधारित सेटलमेंट प्रयोग भी शुरू किए हैं। इन परीक्षणों में केंद्रीय बैंक रिज़र्व को ब्लॉकचेन जैसे परीक्षण वातावरण में रखा जाता है ताकि यह समझा जा सके कि सेटलमेंट कैसे काम करेगा और मौजूदा वित्तीय सिस्टम से कैसे जुड़ेगा।
इन प्रयोगों का उद्देश्य यह देखना है कि क्या टोकनाइज्ड वित्तीय ढांचा दक्षता बढ़ा सकता है, जबकि पारंपरिक केंद्रीय बैंक प्रणाली की कानूनी सुरक्षा और स्थिरता भी बनी रहे।
जापान की रणनीति अमेरिका और यूरोप के बीच एक तरह का मध्य मार्ग दिखाती है।
सिर्फ निजी स्टेबलकॉइन या सिर्फ केंद्रीय बैंक डिजिटल मुद्रा पर निर्भर होने के बजाय, बैंक ऑफ जापान कई विकल्पों—जैसे CBDC, स्टेबलकॉइन, टोकनाइज्ड डिपॉजिट और टोकनाइज्ड रिज़र्व—को एक साथ परख रहा है।
हिमिनो का मुख्य संदेश यह है कि डिजिटल पैसे की वैश्विक संरचना अभी तय हो रही है। आज लिए गए फैसले तय करेंगे कि भविष्य की मौद्रिक प्रणाली एकीकृत और स्थिर रहेगी या फिर कई प्रतिस्पर्धी डिजिटल मुद्राओं में बंट जाएगी।
इसलिए, उनके अनुसार, बदलती तकनीक के बीच भी “Singleness of Money” को बनाए रखना केंद्रीय बैंकों की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।
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