इन कारणों से निवेशक जोखिम वाले एसेट्स से दूरी बनाने लगते हैं।
दूसरा बड़ा कारण अमेरिका से आया महंगाई का डेटा है। हालिया आंकड़ों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) उम्मीद से ज्यादा निकला, जिससे यह चिंता बढ़ गई कि महंगाई उतनी तेजी से नहीं घट रही जितनी नीति‑निर्माताओं ने उम्मीद की थी।
उदाहरण के तौर पर अप्रैल में अमेरिकी CPI लगभग 3.8% सालाना दर्ज हुआ, जो अनुमान से ऊपर था और इसमें ऊर्जा कीमतों का बड़ा योगदान रहा।
ऊर्जा‑आधारित महंगाई का असर व्यापक होता है—परिवहन, विनिर्माण और खाद्य कीमतों तक। फेडरल रिज़र्व के अधिकारियों ने भी संकेत दिया है कि मध्य‑पूर्व संघर्ष से ऊर्जा कीमतों में तेज वृद्धि हुई और इससे कई वित्तीय बाजारों में पुनर्मूल्यांकन देखने को मिला।
जब महंगाई बढ़ने की आशंका होती है तो बॉन्ड बाजार तेजी से प्रतिक्रिया देता है। निवेशक अधिक रिटर्न की मांग करते हैं, जिससे सरकारी बॉन्ड—खासकर अमेरिकी ट्रेज़री—की यील्ड ऊपर चली जाती है।
हालिया डेटा दिखाता है कि तेल की कीमतों और महंगाई के आंकड़ों के साथ‑साथ ट्रेज़री यील्ड भी बढ़ रही है, जिससे वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां सख्त हो रही हैं।
उच्च यील्ड शेयर बाज़ार के लिए कई कारणों से नकारात्मक होती है:
इसका असर खास तौर पर टेक्नोलॉजी जैसी ग्रोथ कंपनियों पर ज्यादा पड़ता है, जिनकी वैल्यूएशन भविष्य की कमाई पर निर्भर होती है।
साल की शुरुआत में बाजार को उम्मीद थी कि अमेरिकी फेडरल रिज़र्व जल्द ही ब्याज दरों में कटौती शुरू कर सकता है। लेकिन बढ़ती महंगाई और तेल की ऊँची कीमतों ने इस धारणा को बदल दिया है।
अब निवेशकों को लग रहा है कि फेड दर कटौती में देरी कर सकता है या लंबे समय तक कड़ी मौद्रिक नीति बनाए रख सकता है, और कुछ विश्लेषक फिर से दर बढ़ोतरी की संभावना की भी चर्चा कर रहे हैं।
जब बाजार को लगता है कि ब्याज दरें लंबे समय तक ऊँची रहेंगी, तो शेयर बाज़ार की वैल्यूएशन पर दबाव बढ़ जाता है।
इस वैश्विक तनाव का असर एशिया में विशेष रूप से दिखाई दिया है। एशियाई अर्थव्यवस्थाएँ वैश्विक व्यापार और पूंजी प्रवाह पर अधिक निर्भर होती हैं, इसलिए वे ऐसे झटकों पर जल्दी प्रतिक्रिया देती हैं।
दक्षिण कोरिया का Kospi इंडेक्स एक समय इंट्राडे में 5% से अधिक गिर गया, हालांकि बाद में कुछ नुकसान कम हुआ।
क्षेत्र के कई बाजारों में टेक शेयरों के प्रति पहले जो उत्साह था, वह महंगाई और सख्त मौद्रिक नीति की आशंका से कमजोर पड़ गया।
अमेरिकी शेयर फ्यूचर्स में भी गिरावट देखी गई, जबकि तेल और ट्रेज़री यील्ड दोनों ऊपर जा रहे थे। यह संयोजन आमतौर पर संकेत देता है कि निवेशकों का जोखिम लेने का मनोबल कमजोर हो रहा है और गिरावट वॉल स्ट्रीट सत्र तक जारी रह सकती है।
इस समय बाजार को परेशान करने वाली बात यह है कि कई नकारात्मक कारक एक साथ सक्रिय हैं:
जब ये सभी कारक एक साथ सामने आते हैं तो निवेशक स्टैगफ्लेशन—यानी धीमी आर्थिक वृद्धि और ऊँची महंगाई—की संभावना से डरने लगते हैं। ऐसे माहौल में शेयर बाज़ार अक्सर दबाव में रहते हैं और अलग‑अलग एसेट क्लास में उतार‑चढ़ाव बढ़ जाता है।
आगे की दिशा काफी हद तक भू‑राजनीतिक स्थिति पर निर्भर करेगी। यदि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ में तनाव कम होता है और तेल आपूर्ति सामान्य होती है तो तेल की कीमतें गिर सकती हैं और महंगाई का दबाव भी कम हो सकता है। लेकिन अगर व्यवधान लंबा खिंचता है, तो ऊँची ऊर्जा कीमतें और सख्त मौद्रिक नीति वैश्विक बाज़ारों पर दबाव बनाए रख सकती हैं।
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