इसी चिंता के बीच अम्मान ने बुधवार, 5 अगस्त 2026 को अरब और इस्लामी देशों के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक बुलाई ।
जॉर्डन के अनुसार, 23 जुलाई 2026 को 2,000 से अधिक इज़राइली धार्मिक-दक्षिणपंथी बसने वालों ने अल-अक्सा मस्जिद परिसर में प्रवेश किया। इस समूह का नेतृत्व इज़राइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने किया । जॉर्डन का आरोप है कि परिसर के भीतर प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठान किए गए। उसने इसे आधुनिक इतिहास में इस स्थल की पुरानी व्यवस्था का सबसे गंभीर उल्लंघन बताया ।
यह घटना कई महीनों से जारी उस बढ़ती प्रवृत्ति के बाद हुई, जिसमें सरकार के समर्थन वाले यहूदी धार्मिक चरमपंथी समूह परिसर में बार-बार पहुंच रहे हैं ।
जॉर्डन के विदेश मंत्री अयमन सफादी का कहना है कि 23 जुलाई की घटना कोई अलग-थलग मामला नहीं, बल्कि अल-अक्सा परिसर की ऐतिहासिक और कानूनी व्यवस्था बदलने का सुनियोजित प्रयास है ।
सफादी ने द गार्जियन से कहा, “स्टेटस क्वो के साथ छेड़छाड़… ऐसा धार्मिक संघर्ष भड़का सकती है, जिसकी गूंज फिलिस्तीन और जॉर्डन से आगे पूरे मुस्लिम जगत तक पहुंचेगी” ।
‘स्टेटस क्वो’ से आशय उस लंबे समय से चली आ रही व्यवस्था से है, जिसके तहत अल-अक्सा परिसर की संरक्षकता हाशमी राजवंश के नेतृत्व वाले जॉर्डन के पास है। यह व्यवस्था 1994 की इज़राइल-जॉर्डन शांति संधि में औपचारिक रूप से पुष्ट की गई थी । इसके तहत परिसर में केवल मुसलमानों को प्रार्थना की अनुमति है, जबकि गैर-मुसलमान वहां जा सकते हैं ।
जॉर्डन लंबे समय से इज़राइल पर आरोप लगाता रहा है कि वह बसने वालों की ऐसी घुसपैठ को सुविधा और सुरक्षा देकर इस व्यवस्था का उल्लंघन कर रहा है । यह परिसर मुसलमानों के लिए अल-अक्सा या हरम अल-शरीफ और यहूदियों के लिए टेंपल माउंट के नाम से जाना जाता है।
जॉर्डन ने 5 अगस्त 2026 को अरब और इस्लामी दुनिया के विदेश मंत्रियों की आपात बैठक बुलाई । इसमें अरब लीग के सदस्य देशों के अलावा तुर्की, इंडोनेशिया, मलेशिया और पाकिस्तान जैसे गैर-अरब मुस्लिम-बहुल देशों के प्रतिनिधियों के शामिल होने की बात कही गई है ।
बैठक का उद्देश्य जॉर्डन के अनुसार, इस्लाम के तीसरे सबसे पवित्र स्थल के सामने खड़े “आसन्न” खतरे पर साझा कूटनीतिक प्रतिक्रिया तैयार करना है ।
अल-अक्सा संकट के साथ-साथ सफादी ने फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन के मुद्दे पर जॉर्डन की पुरानी चेतावनी भी दोहराई है। उनका कहना है कि वेस्ट बैंक से फिलिस्तीनियों को जबरन जॉर्डन भेजने का कोई भी इज़राइली प्रयास “युद्ध की घोषणा” माना जाएगा ।
सफादी ने यह भी चेताया है कि फिलिस्तीनियों के नए विस्थापन से क्षेत्र एक व्यापक संघर्ष की “खाई” में जा सकता है ।
जॉर्डन की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब पश्चिमी तट और यरुशलम में तनाव पहले से बेहद ऊंचा है। सफादी ने इज़राइली सरकार पर वेस्ट बैंक को “विस्फोट की ओर धकेलने” का आरोप लगाया है। उन्होंने यरुशलम के इस्लामी और ईसाई पवित्र स्थलों की ऐतिहासिक-कानूनी व्यवस्था के उल्लंघन को “अवैध कदम और खतरनाक उकसावे” बताया ।
उनके अनुसार, ये कदम क्षेत्र को एक नए विनाशकारी संघर्ष की ओर ले जा रहे हैं, जिसका असर अधिकृत फिलिस्तीनी क्षेत्रों से कहीं आगे तक पहुंच सकता है । अल-अक्सा परिसर मुस्लिम और यहूदी दोनों समुदायों के लिए अत्यंत पवित्र है। इसलिए जॉर्डन की चेतावनी का केंद्र यह आशंका है कि दशकों से तनाव को सीमित रखने वाली व्यवस्था को धीरे-धीरे बदला जा रहा है—और यरुशलम पहले से ही एक “बारूद के ढेर” जैसी स्थिति में है ।