बाद में यूक्रेन ने स्वीकार किया कि ड्रोन शायद उसका ही था और इस घटना के लिए माफी मांगी। कीव ने कहा कि उसके ड्रोन रूस के अंदर सैन्य लक्ष्यों पर हमले के लिए भेजे जाते हैं, NATO देशों के लिए नहीं।
यह घटना अकेली नहीं थी। मार्च 2026 से कई ड्रोन—जिन्हें अक्सर यूक्रेनी माना गया—रूस के हवाई क्षेत्र से गुजरने के बाद एस्टोनिया, लातविया, लिथुआनिया और फिनलैंड में प्रवेश कर गए या दुर्घटनाग्रस्त हो गए।
मई में कई घटनाओं ने चिंता और बढ़ा दी:
इन घटनाओं ने दिखाया कि आधुनिक ड्रोन युद्ध सीमाओं के पार भी सुरक्षा संकट पैदा कर सकता है।
क्षेत्र के कई अधिकारियों का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे रूस की इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर प्रणाली एक प्रमुख कारण हो सकती है।
GPS जामिंग या स्पूफिंग के जरिए उपग्रह संकेतों में हस्तक्षेप किया जाता है। इससे ड्रोन अपने निर्धारित मार्ग से भटक सकते हैं या गलत स्थान का अनुमान लगा सकते हैं। विश्लेषकों का कहना है कि रूस के सैन्य अभियानों के पास इस तरह की गतिविधि आम है, और इससे ड्रोन अनजाने में NATO क्षेत्र में जा सकते हैं।
एस्टोनिया के विदेश मंत्री मार्गुस त्साह्कना (Margus Tsahkna) ने इससे भी आगे जाकर कहा कि रूस संभवतः इस हस्तक्षेप का जानबूझकर फायदा उठा रहा है ताकि यूक्रेनी ड्रोन पड़ोसी NATO देशों के हवाई क्षेत्र में पहुँच जाएँ। उनके अनुसार इससे बाल्टिक देशों पर दबाव बनाया जा सकता है और यूक्रेन के लिए समर्थन कमजोर करने की कोशिश की जा सकती है।
हालाँकि अभी तक सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई निर्णायक प्रमाण सामने नहीं आया है जो यह साबित करे कि रूस वास्तव में जानबूझकर ड्रोन को NATO की दिशा में मोड़ रहा है।
ड्रोन घटनाओं ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद भी पैदा कर दिया है।
इस तरह ये घटनाएँ रूस‑यूक्रेन युद्ध के साथ चल रही सूचना‑युद्ध (information war) का हिस्सा भी बन गई हैं।
इन घटनाओं ने एक व्यावहारिक समस्या भी उजागर की है: NATO की मौजूदा एयर‑पोलिसिंग व्यवस्था छोटे ड्रोन से निपटने के लिए नहीं बनाई गई थी।
2004 में शुरू हुई Baltic Air Policing मिशन मुख्यतः लड़ाकू विमानों पर आधारित है, जो बाल्टिक देशों के हवाई क्षेत्र की निगरानी करते हैं। लेकिन अब हजारों डॉलर के छोटे ड्रोन का सामना करने के लिए लाखों डॉलर के लड़ाकू विमानों को भेजना पड़ रहा है।
इसी कारण एस्टोनिया, लातविया और लिथुआनिया के नेताओं ने NATO से आग्रह किया है कि केवल एयर‑पोलिसिंग से आगे बढ़कर पूरी तरह विकसित एयर‑डिफेंस और काउंटर‑ड्रोन सिस्टम स्थापित किया जाए।
ड्रोन से जुड़ी यह घटनाएँ दिखाती हैं कि यूक्रेन‑रूस युद्ध का प्रभाव सीमाओं के पार भी महसूस किया जा रहा है। रूस के अंदर लक्षित लंबी दूरी के यूक्रेनी ड्रोन कभी‑कभी—अनजाने में या संभवतः बाहरी हस्तक्षेप के कारण—NATO देशों के ऊपर पहुँच जाते हैं।
एस्टोनिया और उसके पड़ोसी देशों के लिए चिंता केवल ड्रोन की नहीं है, बल्कि इस संभावना की भी है कि इलेक्ट्रॉनिक युद्ध तकनीक से उनकी उड़ान दिशा बदली जा सकती है, जिससे NATO सीमा पर बार‑बार सुरक्षा घटनाएँ हो सकती हैं। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि ऐसा जानबूझकर किया जा रहा है या नहीं, लेकिन इन घटनाओं ने NATO को अपने उत्तर‑पूर्वी हवाई क्षेत्र की सुरक्षा पर दोबारा विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है।
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