मई 2026 में सिलहट के सोनारहाट इलाके में बीजीबी और बीएसएफ के बीच कथित गोलीबारी की रिपोर्ट आई, लेकिन भारत की ओर से इसे पूरी तरह नकार दिया गया। लालमोनिरहाट के पास तीन बीघा कॉरिडोर क्षेत्र में बाड़ और बाँस के खंभों को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण टकराव सामने आया। 2025 में कई सीमा जिलों में बाड़ लगाने को लेकर विवाद...

Create a landscape editorial hero image for this Studio Global article: What recent incidents have heightened tensions along the India–Bangladesh border, including the reported firing exchange between India’s Bor. Article summary: Recent India–Bangladesh border tensions appear to come from three overlapping issues: a disputed May 2026 Sonarhat/Sylhet shooting incident, recurring fencing-related confrontations near Tin Bigha and other sectors, and . Topic tags: general, general web, user generated. Reference image context from search candidates: Reference image 1: visual subject "Tensions between India's BSF and Border Guards Bangladesh (BGB) have escalated from time to time, manifesting in cross-border firing as well." source context "India Mulls Deployment of Crocodiles and Snakes at Border with Bangladesh – The Diplomat" Reference image 2: visual subject "India Mulls Deployment of Croc
भारत और बांग्लादेश के बीच लगभग 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा है, जो दुनिया की सबसे जटिल स्थलीय सीमाओं में से एक मानी जाती है। हाल के महीनों में इस सीमा पर तनाव बढ़ने के पीछे कई कारक एक साथ काम कर रहे हैं—जैसे स्थानीय सुरक्षा घटनाएँ, सीमा पर बाड़ और ढाँचे को लेकर विवाद, और दोनों देशों के राजनीतिक रिश्तों में आई ठंडक।
हाल की कुछ घटनाएँ—खासकर सिलहट में कथित गोलीबारी और तीन बीघा कॉरिडोर के आसपास बाड़ को लेकर विवाद—दिखाती हैं कि छोटी घटनाएँ भी किस तरह तेजी से कूटनीतिक मुद्दा बन सकती हैं।
मई 2026 में बांग्लादेश के सिलहट जिले के गोवाइनघाट उपजिला के सोनारहाट सीमा क्षेत्र में तनाव की खबरें सामने आईं।
बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के अनुसार, भारत की बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) ने सीमा के पास गोलीबारी की, जिसके जवाब में BGB ने भी फायरिंग की। बांग्लादेशी अधिकारियों ने कहा कि स्थिति जल्दी नियंत्रण में आ गई और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है।
लेकिन भारत की ओर से यह दावा सिरे से खारिज कर दिया गया। बीएसएफ के सूत्रों ने भारतीय मीडिया को बताया कि उस इलाके में कोई गोलीबारी हुई ही नहीं और बांग्लादेशी मीडिया में आई खबरों को "फर्जी" बताया।
दोनों पक्षों के बयान एक‑दूसरे से बिल्कुल अलग होने और स्वतंत्र पुष्टि सीमित होने के कारण यह घटना अब भी विवादित मानी जा रही है। फिर भी इन रिपोर्टों ने सीमा पर चौकसी बढ़ा दी और तनाव का माहौल बना दिया।
दूसरा बड़ा विवाद तीन बीघा कॉरिडोर क्षेत्र में सामने आया। यह पश्चिम बंगाल में भारत की जमीन का एक संकरा गलियारा है, जिसके जरिए बांग्लादेश को दहाग्राम–अंगरपोटा एन्क्लेव तक पहुंच मिलती है।
2025 की शुरुआत में भारतीय सीमा के पास रहने वाले कुछ लोगों ने कंटीली तार की बाड़ को मजबूत करने के लिए बाँस के खंभे लगाए। बांग्लादेश के सीमा रक्षकों ने इसका विरोध किया और कहा कि ये ढाँचे अंतरराष्ट्रीय सीमा या संवेदनशील ज़ीरो‑लाइन क्षेत्र के बहुत करीब लगाए जा रहे हैं।
यह विवाद दरअसल एक बड़े मतभेद का हिस्सा है—कि सीमा पर बाड़ कहाँ और किस तरह लगाई जा सकती है।
बांग्लादेश का आरोप है कि भारत के कुछ बाड़ निर्माण कार्य द्विपक्षीय समझौतों का उल्लंघन करते हैं, जबकि भारत का कहना है कि यह सब सीमा प्रबंधन और सुरक्षा के लिए जरूरी कदम हैं।
तीन बीघा कॉरिडोर की घटना अकेली नहीं है। हाल के वर्षों में सीमा के कई हिस्सों में इसी तरह के विवाद सामने आए हैं।
ढाका का कहना है कि कम से कम पाँच अलग‑अलग सीमा क्षेत्रों—जैसे चपाइनवाबगंज, नाओगांव और लालमोनिरहाट—में बाड़ को लेकर टकराव हुआ। इसी मुद्दे पर जनवरी 2025 में बांग्लादेश ने भारत के उच्चायुक्त को तलब कर अपना विरोध दर्ज कराया।
कई जगहों पर बीएसएफ और बीजीबी के बीच आमने‑सामने की स्थिति बनी, खासकर तब जब सीमा के संवेदनशील हिस्सों में बाड़ लगाने या उसे मजबूत करने का काम शुरू हुआ। कुछ मामलों में स्थानीय विरोध के बाद काम अस्थायी रूप से रोक भी दिया गया।
ये घटनाएँ दिखाती हैं कि सीमा के पास होने वाले छोटे‑छोटे निर्माण कार्य भी जल्दी सुरक्षा और कूटनीति का मुद्दा बन सकते हैं।
इन घटनाओं को समझने के लिए व्यापक राजनीतिक संदर्भ भी महत्वपूर्ण है।
5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना सत्ता से हट गईं और बाद में भारत चली गईं, जिसके बाद दोनों देशों के रिश्तों में तनावपूर्ण माहौल की चर्चा होने लगी।
तब से सीमा से जुड़े मुद्दों के साथ‑साथ अन्य विषय भी विवाद का हिस्सा बने हैं—जैसे सीमा सुरक्षा, सीमा पर हिंसा के आरोप, वीज़ा प्रतिबंध और सार्वजनिक राजनीतिक बयानबाज़ी।
कुछ विश्लेषकों का मानना है कि इस राजनीतिक बदलाव के बाद बांग्लादेश की सीमा एजेंसियों ने ज़ीरो‑लाइन और सीमा गतिविधियों पर अधिक सख्त रुख अपनाया है।
इतनी लंबी और जटिल सीमा पर छोटे‑मोटे विवाद नई बात नहीं हैं। गश्त, खेती, तस्करी रोकने की कार्रवाई या बाड़ लगाने जैसे मुद्दों पर पहले भी टकराव होते रहे हैं।
लेकिन जब दोनों देशों के राजनीतिक रिश्तों में भरोसा कम हो जाता है, तो स्थानीय घटनाएँ भी राष्ट्रीय और कूटनीतिक विवाद में बदल जाती हैं।
इसी वजह से सिलहट की कथित गोलीबारी या तीन बीघा कॉरिडोर के पास बाँस के खंभों का विवाद अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं रह जाता—बल्कि दोनों देशों के रिश्तों में बढ़ती संवेदनशीलता का प्रतीक बन जाता है।
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मई 2026 में सिलहट के सोनारहाट इलाके में बीजीबी और बीएसएफ के बीच कथित गोलीबारी की रिपोर्ट आई, लेकिन भारत की ओर से इसे पूरी तरह नकार दिया गया।
मई 2026 में सिलहट के सोनारहाट इलाके में बीजीबी और बीएसएफ के बीच कथित गोलीबारी की रिपोर्ट आई, लेकिन भारत की ओर से इसे पूरी तरह नकार दिया गया। लालमोनिरहाट के पास तीन बीघा कॉरिडोर क्षेत्र में बाड़ और बाँस के खंभों को लेकर दोनों पक्षों के बीच तनावपूर्ण टकराव सामने आया।
2025 में कई सीमा जिलों में बाड़ लगाने को लेकर विवाद बढ़े और ढाका ने भारत के उच्चायुक्त को तलब कर विरोध दर्ज कराया।