हालाँकि रूस आधिकारिक रूप से विस्तृत हताहत आंकड़े जारी नहीं करता, इसलिए सभी अनुमान कुछ हद तक अनिश्चित हैं। फिर भी अधिकांश स्वतंत्र आकलन इस बात पर सहमत हैं कि नुकसान बहुत बड़े पैमाने पर हुआ है।
युद्ध के मैदान में एक और महत्वपूर्ण बदलाव रूसी प्रगति की गति में कमी है।
इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) के विश्लेषण के अनुसार, 2026 के पहले चार महीनों में रूसी सेना औसतन लगभग 2.9 वर्ग किलोमीटर प्रतिदिन क्षेत्र ही कब्जा कर पाई। तुलना के लिए, 2025 की इसी अवधि में यह दर लगभग 9.76 वर्ग किलोमीटर प्रतिदिन थी।
भारी नुकसान के कारण कई मोर्चों पर रूसी सेना को अपने ऑपरेशनों की गति कम करनी पड़ी। पूर्वी यूक्रेन के कई प्रमुख हमलावर क्षेत्रों में यूक्रेनी रक्षा और जवाबी हमलों ने रूस की प्रगति को और महँगा बना दिया है।
अप्रैल 2026 में युद्ध के विश्लेषकों ने एक असामान्य घटना देखी—रूस को यूक्रेन में शुद्ध क्षेत्रीय नुकसान हुआ।
कुल युद्ध क्षेत्र के मुकाबले यह क्षेत्र बहुत बड़ा नहीं है, लेकिन इसका प्रतीकात्मक महत्व महत्वपूर्ण है। पिछले समय में युद्ध अक्सर धीरे‑धीरे लेकिन लगातार रूसी बढ़त के रूप में देखा जाता था, इसलिए ऐसा उलटफेर असामान्य माना गया।
इसी दौरान यूक्रेन ने भी कुछ क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है।
ISW के आकलन बताते हैं कि 2026 की सर्दियों और वसंत में किए गए यूक्रेनी जवाबी हमलों से कई सेक्टरों में क्षेत्र वापस लिया गया। कुछ समय में यूक्रेन ने उतनी जमीन वापस ली जितनी रूस उसी अवधि में हासिल नहीं कर पाया।
ये बढ़त अभी सामरिक (tactical) स्तर पर है, रणनीतिक स्तर पर नहीं। लेकिन यह दिखाती है कि यूक्रेन अभी भी कई इलाकों में पहल वापस लेने की क्षमता रखता है।
इस संघर्ष में शायद सबसे बड़ा बदलाव ड्रोन का तेजी से बढ़ता उपयोग है।
यूक्रेन ने घरेलू उत्पादन वाले हवाई और नौसैनिक ड्रोन का इस्तेमाल करके लंबी दूरी के हमलों को तेज़ किया है। 2026 की शुरुआत से विश्लेषकों का कहना है कि इन हमलों की दूरी, संख्या और तीव्रता तीनों बढ़ी हैं।
इन हमलों में रूस के भीतर स्थित ऊर्जा और सैन्य ढांचे भी निशाने पर आए हैं। उदाहरण के लिए लेनिनग्राद ओब्लास्ट और क्रास्नोदार क्राय जैसे क्षेत्रों में तेल सुविधाओं, बंदरगाहों और सैन्य ठिकानों पर हमले हुए हैं—जो फ्रंट लाइन से काफी दूर हैं।
इसके साथ ही यूक्रेन ने मध्यम दूरी के ड्रोन और मिसाइल हमलों को भी बढ़ाया है, जिनका लक्ष्य रूसी लॉजिस्टिक्स हब, सैन्य उपकरणों के जमावड़े और सैनिक तैनाती क्षेत्र हैं। विश्लेषकों का कहना है कि इससे रूस की निरंतर बड़े पैमाने की आक्रामक कार्रवाइयाँ चलाने की क्षमता कमजोर हो रही है।
इस तरह युद्ध अब केवल फ्रंट लाइन तक सीमित नहीं रहा—यूक्रेन की रणनीति रूस की आपूर्ति प्रणाली और ऊर्जा ढांचे तक दबाव पहुँचा रही है।
इन संकेतों में से कोई भी अकेले यह साबित नहीं करता कि युद्ध का रणनीतिक संतुलन पूरी तरह बदल गया है। रूस अभी भी मानव‑बल, तोपखाने और कुल संसाधनों में महत्वपूर्ण बढ़त रखता है।
लेकिन जब कई रुझान एक साथ दिखाई देते हैं—बढ़ते नुकसान, भर्ती पर दबाव, धीमी प्रगति, क्षेत्रीय उलटफेर और यूक्रेन की बढ़ती स्ट्राइक क्षमता—तो यह संकेत मिलता है कि रूस की थकावट‑आधारित रणनीति पर दबाव बढ़ रहा है।
फिलहाल सबसे यथार्थवादी आकलन यही है कि युद्ध लंबे समय तक चलने वाले थकावट के नए चरण में प्रवेश कर रहा है। यूक्रेन के ड्रोन हमले और सीमित जवाबी अभियान रूस के लिए आक्रामक कार्रवाई को और महँगा और मुश्किल बना रहे हैं।
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