यह कदम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का कारण बना है, क्योंकि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य को लंबे समय से वैश्विक समुद्री व्यापार के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मार्ग माना जाता है।
इस नई व्यवस्था के बीच क्षेत्र में शिपिंग गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ा है।
संकट से पहले प्रतिदिन लगभग 100 जहाज़ इस जलडमरूमध्य से गुजरते थे। लेकिन तनाव बढ़ने के बाद यह संख्या कई बार दिन में लगभग दो तेल टैंकर तक सीमित हो गई ।
इसी दौरान कई जहाज़ फारस की खाड़ी में ही फंस गए। समुद्री डेटा के अनुसार एक समय करीब 2,190 वाणिज्यिक जहाज़, जिनमें 320 से अधिक तेल और गैस टैंकर शामिल थे, मार्ग बंद होने और सुरक्षा जोखिमों के कारण आगे नहीं बढ़ पाए ।
उपग्रह ट्रैकिंग और शिपिंग डेटा में यह भी देखा गया कि कई जहाज़ दुबई जैसे प्रमुख बंदरगाहों के आसपास के समुद्री क्षेत्र में समूह बनाकर खड़े रहे, क्योंकि ऑपरेटर सुरक्षा स्थिति साफ होने या अनुमति मिलने का इंतजार कर रहे थे ।
हालांकि पूरी तरह ठहराव नहीं है। कुछ परिस्थितियों में सीमित शिपिंग अभी भी जारी है।
उदाहरण के लिए संकट के दौरान भारत की ओर जा रहे 15 एलपीजी (LPG) टैंकर नौसैनिक सुरक्षा के साथ जलडमरूमध्य पार करने में सफल रहे। इससे पता चलता है कि सुरक्षा व्यवस्था और समन्वय होने पर सीमित यातायात संभव है ।
लेकिन कई रिपोर्टों के अनुसार यह पारगमन अक्सर ईरानी अधिकारियों से सीधे संपर्क और बदलती सुरक्षा परिस्थितियों पर निर्भर करता है, जिससे शिपिंग कंपनियों के लिए अनिश्चितता बनी हुई है ।
हॉर्मुज़ में मौजूदा स्थिति व्यापक भू‑राजनीतिक टकराव का हिस्सा बन गई है।
ईरान का कहना है कि जहाज़ों पर लगाए गए प्रतिबंध अमेरिकी दबाव और ईरानी बंदरगाहों पर कथित नाकेबंदी के जवाब में उठाया गया कदम है। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कुछ चरणों में जहाज़ों को चेतावनी भी दी कि वे जलडमरूमध्य की ओर न बढ़ें ।
दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका का कहना है कि वह क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता (freedom of navigation) बनाए रखने और वाणिज्यिक जहाज़ों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई कर रहा है, खासकर तब जब जलडमरूमध्य के आसपास सैन्य झड़पें हुई हैं ।
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य की अहमियत इसकी भौगोलिक स्थिति से आती है।
सबसे संकरे हिस्से में लगभग 34 किलोमीटर चौड़ा यह समुद्री रास्ता दुनिया के समुद्री तेल व्यापार का करीब 20% हिस्सा संभालता है ।
इसलिए यहां थोड़ी‑सी भी रुकावट:
Persian Gulf Strait Authority की स्थापना से यह संकेत मिलता है कि ईरान इस मार्ग पर नियंत्रण को अस्थायी सैन्य दबाव से आगे बढ़ाकर एक स्थायी प्रशासनिक ढांचे में बदलना चाहता है।
अगर यह व्यवस्था लंबे समय तक जारी रहती है, तो शिपिंग कंपनियों, बीमा कंपनियों और सरकारों को हॉर्मुज़ से गुजरने की प्रक्रिया को एक नियंत्रित समुद्री मार्ग की तरह मानना पड़ सकता है—जहां परमिट, समन्वय और संभावित शुल्क शामिल हों।
हालांकि यह प्रणाली स्थायी बनती है या नहीं, यह काफी हद तक अमेरिका‑ईरान वार्ता और क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति पर निर्भर करेगा। फिलहाल इतना साफ है कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक पर नियंत्रण का तरीका तेजी से बदल रहा है।
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